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'स्वाति मालीवाल CM House में कुछ बड़ा कांड करने आई थीं...' बिभव के पिता ने किया बड़ा दावा, BJP पर लगाए गंभीर आरोप

Swati Maliwal Case: बिभव कुमार के पिता महेश्वर राय ने बताया कि स्वाति मालीवाल 13 मई को सीएम आवास गई थीं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने की मांग करने लगीं। बिभव के पिता ने आगे बताया कि गार्ड ने स्वाति को रोका और सिर्फ इतना कहा था कि वह बिभव से पूछे बिना स्वाति को मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने नहीं देगा, जिससे वह भड़क गईं।

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बिभव कुमार के पिता महेश्वर राय

Photo : Twitter

Swati Maliwal Case: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए बिभव कुमार की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता महेश्वर राय का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि जो कुछ भी हो रहा है, वह गलत है। मेरा बेटा बीते 15 सालों से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ है, लेकिन आज तक उसकी एक भी शिकायत नहीं आई। उन्होंने दावा किया कि यह सबकुछ चुनाव की वजह से हो रहा है, मेरे बेटे (बिभव कुमार) को बीजेपी की ओर से सलाह दी जा रही है कि अगर वह अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ दे तो उसके साथ कुछ नहीं होगा।

सीएम आवास में स्वाति मालीवाल के साथ हुई मारपीट मामले में उन्होंने कहा कि स्वाति मालीवाल उस दिन कुछ बड़ा कांड करने सीएम हाउस गई थीं। बिभव कुमार के पिता ने बताया कि घटना के बाद मैंने अपने बेटे से बात की थी। उसने बताया कि वह नाश्ता कर रहा था, तभी स्वाति मालीवाल वहां कुछ बड़ा करने के उद्देश्य से आई थीं। उन्होंने कहा, मेरे बेटे (बिभव) ने स्वाति मालीवाल को छुआ तक नहीं है, मारपीट की बात पूरी तरह गलत है।

गार्ड के रोकने पर भड़क गई थीं मालीवाल

बिभव कुमार के पिता महेश्वर राय ने बताया कि स्वाति मालीवाल 13 मई को सीएम आवास गई थीं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने की मांग करने लगीं। बिभव के पिता ने आगे बताया कि गार्ड ने स्वाति को रोका और सिर्फ इतना कहा था कि वह बिभव से पूछे बिना स्वाति को मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने नहीं देगा। यह सुनकर स्वाति मालीवाल भड़क गईं और गार्ड को धमकी दी, यह सुनकर बिभव भी वहां चला गया, उसने उसे (स्वाति) एक बार भी छुआ तक नहीं।

कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

बता दें, दिल्ली पुलिस ने बिभव कुमार को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद अदालत ने उसे 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है, हालांकि पुलिस 7 दिन की कस्टडी की मांग कर रही थी। पुलिस का आरोप है कि बिभव कुमार ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश की है। उन्होंने मुंबई में अपना फोन भी फॉर्मेट कर दिया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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