वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक शतरंज के खेल में अमेरिका ने एक बेहद रणनीतिक कदम उठाया है। वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर अपना नियंत्रण और प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी तेल कंपनियों ने उन तेल क्षेत्रों (Oilfields) का संचालन संभालना शुरू कर दिया है, जिन पर अब तक चीन और रूस की सरकारी कंपनियों का वर्चस्व था। रिपोर्टों के अनुसार, वेनेजुएला सरकार और अमेरिकी प्रशासन के बीच बने नए समीकरणों के तहत यह बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। इस कदम को लैटिन अमेरिका में रूस और चीन की आर्थिक और रणनीतिक पकड़ को कमजोर करने के लिए अमेरिका के एक मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।
क्रूड ऑयल का भंडार
वेनेजुएला दुनिया में सबसे बड़े प्रमाणित कच्चे तेल (Crude Oil) के भंडार वाला देश है, लेकिन सालों के कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों, राजनीतिक अस्थिरता और कुप्रबंधन के कारण उसका तेल उद्योग जर्जर स्थिति में पहुंच गया था। जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, तब चीन और रूस ने मौका देखकर वहां के तेल क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश किया और प्रमुख ऑयलफील्ड्स का कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया था। वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी (PDVSA) के साथ मिलकर रूसी और चीनी कंपनियां ही वहां से तेल का उत्पादन और निर्यात कर रही थीं, जिससे अमेरिका का प्रभाव लगभग खत्म हो गया था।
अमेरिकी ने बदली अपनी स्ट्रैटेजी
हालांकि, अब वैश्विक ऊर्जा संकट और बदलते अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक माहौल के बीच अमेरिका ने अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी सरकार ने अपनी प्रमुख ऊर्जा कंपनियों को वेनेजुएला में उत्पादन बढ़ाने, रिफाइनरी और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने तथा परिचालन का प्रभार लेने के लिए लाइसेंस और विशेष अनुमतियां दी हैं। इसके बदले वेनेजुएला के उन तेल क्षेत्रों से रूसी और चीनी प्रभुत्व वाली कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है या उनके संचालन अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। इससे अमेरिकी कंपनियों को दुनिया के सबसे समृद्ध तेल क्षेत्रों में फिर से सीधी पहुंच मिल गई है।
इस बड़े घटनाक्रम के बहुआयामी वैश्विक परिणाम देखने को मिलेंगे। सबसे पहले, वैश्विक तेल बाजार में क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे तेल की वैश्विक कीमतों को स्थिर करने में मदद मिलेगी। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक झटका रूस और चीन को लगा है, क्योंकि वेनेजुएला में उनका भारी-भरकम निवेश अब अमेरिका के इशारों पर संचालित होगा। अमेरिका ने एक ही तीर से दो निशाने साधे हैं उसने न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेनेजुएला को अपने पाले में कर लिया है, बल्कि अपने सबसे बड़े वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों यानी रूस और चीन को लैटिन अमेरिकी महाद्वीप में बैकफुट पर धकेल दिया है।
