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Bangalore Auto Strike: ई-बाइक टैक्सियों के खिलाफ ऑटो चालकों की हड़ताल, बैन लगाने की मांग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 20, 2023, 09:46 AM IST

ऑटो चालकों के संगठन ने सोमवार को 24 घंटे हड़ताल का ऐलान किया है। संगठन शहर में अवैध रूप से चल रहीं ई-बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।

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बेंगलुरू में ऑटोरिक्शा चालकों की हड़ताल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Photo : ANI

Auto Strike: बेंगलुरू में ऑटो ड्राइवर यूनियन्स फेडरेशन ने शहर में अवैध रूप से चल रही रैपिडो बाइक टैक्सी और अन्य ई-बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ हड़ताल का ऐलान कर दिया है। सोमवार सुबह से ही हजारों ऑटो-रिक्शा ड्राइवर हड़ताल पर चले गए, जो यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है।

यूनियन लंबे समय से इन बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा है। दावा है कि ये बाइक टैक्सियां ऑटोरिक्शा चालकों की अजीविका को खतरे में डाल रही हैं। संगठनों ने मैजेस्टिक बस स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया है।

ऑटो चालकों की अजीविका को हो रहा नुकसान

यूनियन के संयोजक एम मंजूनाथ ने कहा है कि सरकार अवैध रैपिडो बाइक टैक्सी के खिलाफ कोई कार्रवाई न करके ऑटो चालकों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा, इन बाइक टैक्सियों ने ऑटो चालकों की आजीविका को नष्ट कर दिया है। बार-बार अपील के बाद भी सरकार ने कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा, ई-बाइक सेवाएं युवाओं को प्रलोभन देकर उनका शोषण कर रही हैं।

24 घंटे की हड़ताल करेंगे ऑटो चालक

ऑटो चालकों ने सोमवार से 24 घंटे हड़ताल की घोषणा की है। चालक बेंगलुरू सिटी स्टेशन से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च भी निकालेंगे। मंजूनाथ ने दावा किया कि राज्य परिवहन विभाग बाइक टैक्सियों को अवैध मानता है, इसके बावजूद वे सड़क पर बेखौफ चल रहे हैं और सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

एक घटना के बाद ऑटो ड्राइवर और रैपिडो राइडर के बीच बड़ा संघर्ष

बेंगलुरू में में इसी महीने एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक ऑटोरिक्शा ड्राइवर रैपिडो राइडर को परेशान कर रहा था। घटना सामने आने के बाद ऑटोरिक्शा ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया था। बता दें, जब से रैपिडो ने लाइसेंस के बिना संचालन शुरू किया है, बेंगलुरू में दोनों के बीच संघर्ष भी बढ़ गया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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