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अतीक पर गोलियां बरसाने वाले शूटर लवलेश के पिता बोले, कैसे पहुंचा प्रयागराज पता नहीं लेकिन वो था...

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 16, 2023, 09:43 AM IST

Atiq Ahmed Shot Dead: माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिस तीनों से पूछताछ कर रही है।

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अतीक व अशरफ की हत्या

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

Atiq Ahmed Shot Dead: माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या करने वाले तीनों शूटरों ने मौका-ए-वारदात पर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। फिलहाल तीनों पुलिस की गिरफ्त में हैं, जिनकी पहचान अरुण मौर्या, लवलेश तिवारी और सोनू के रूप में हुई है। पुलिस तीनों से पूछताछ कर रही है।

इस बीच हत्या के एक आरोपी लवलेश के पिता का बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि उन्हें नहीं पता कि उनका बेटा वहां कैसे पहुंच गया। बताया कि लवलेश नशे का आदी था, जिसके चलते परिवार का कोई सदस्य लवलेश से मतलब नहीं रखता था।

लवलेश के पिता ने क्या बताया

अतीक अहमद पर गोली चलाने वाले लवलेश के पिता ने बताया कि हमें घटना के बारे में टीवी से पता चला, जो भी हुआ उससे हमारे परिवार का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने बताया, हमें यह भी नहीं पता यह प्रयागराज में कब से है। घर में उसे किसी चीज से मतलब नहीं था। घर सिर्फ नहाने आता था।

वह सात-आठ दिन पहले घर आया था। सालों से हमारी बोलचाल बंद है। एक मारपीट का मुकदमा उस पर चल रहा है, उसमें वह जेल भी गया था।

इंटर पास था लवलेश, दिन भर रहता था नशे में

लवलेश के पिता ने बताया कि उसने इंटर तक की पढ़ाई की है। बीए करने के दौरान ही उसने पढ़ाई छोड़ दी। वह चार भाई-बहन हैं, जिसमें लवलेश तीसरे नंबर पर था। पिता ने बताया, वह दिन भर नशा करता था, जिसकी वजह से घर वालों ने उसे त्याग दिया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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