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आखिर कहां हैं राघव चड्ढा? केजरीवाल जेल में, दिल्ली में विपक्ष का महाजुटान, लेकिन गायब है AAP का दूसरा बड़ा चेहरा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 31, 2024, 09:41 AM IST

Where is Raghav Chadha: राघव चड्ढा की गिनती केजरीवाल के बाद आम आदमी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े चेहरे के रूप में होती है। हालांकि, अब जब केजरीवाल खुद जेल में हैं और पूरी आम आदमी पार्टी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है, तब राघव चड्ढा गायब हैं। वह आज इंडिया गठबंधन की महारैली में भी नहीं शामिल होंगे...

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कहां हैं राघव चड्ढा?

Photo : Times Now Digital

Where is Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी के नेताओं- सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद राघव चड्ढा ही ऐसे नेता थे, जो पार्टी में अरविंद केजरीवाल के बाद दूसरे नंबर पर पहुंच गए थे। हालांकि, अब जब केजरीवाल खुद जेल में हैं और पूरी आम आदमी पार्टी सड़क पर प्रदर्शन कर रही है, तब राघव चड्ढा गायब हैं। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर अब सवाल भी खड़े होने लगे हैं, लोग पूछ रहे हैं आखिर राघव चड्ढा कहां हैं?

पहले भारतीय जनता पार्टी ने सवाल खड़े किए थे, लेकिन अब इंडिया गठबंधन के घटक दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) भी सवाल पूछ रही है। शरद पवार कैंप के नेता जितेंद्र आव्हाड ने शनिवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पूछा राघव चड्ढा कहां हैं? हालांकि, इससे पहले उन्होंने आतिशी समेत अन्य नेताओं की सक्रियता का भी जिक्र किया।

राघव चड्ढा की अनुपस्थिति से कार्यकर्ताओं में दुख

एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा, राघव चड्ढा एक बुद्धिमान व्यक्ति हैं और पार्टी के लिए अत्यंत मूल्यवान भी हैं, लेकिन जब पार्टी संकट में तो उनकी अनुपस्थिति से कार्यकर्ताओं को दुख हुआ है। उन्होंने कहा, आप के सभी नेता दिख रहे हैं, आतिशी व अन्य भी सक्रिय हैं। हालांकि, राघव चड्ढा पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं, उनके गायब होने से कार्यकर्ता आहत हैं। उन्होंने आगे कहा, वे दिन गए जब दूर रहकर आप लोगों से नहीं जुड़ सकते थे। यह बहुत अजीब है कि वह इसलिए नहीं बोल रहे हैं क्योंकि वह लंदन में हैं। वह एक वीडियो बना सकते हैं और पार्टी को अपना संदेश भेज सकते हैं।

लंदन में क्या कर रहे राघव चड्ढा?

बता दें, राघव चड्ढा इन दिनों अपनी पत्नी परिणीति चोपड़ा के साथ लंदन में हैं। वह विट्रोक्टोमी के लिए यहां पहुंचे हैं। यह रेटिना डिटेचमेंट को रोकने के लिए एक प्रकार की आंख की सर्जरी होती है। बता दें, राघव चड्ढा दिल्ली के मुख्यमंत्री व आज संयोजक अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद और तेजतर्रार नेताओं में भी गिने जाते हैं, लिहाजा आप ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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