आगरा: आगरा में अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें ताजमहल के अंदर जाने से रोक दिया। जगद्गुरु परमहंस अपने तीन शिष्यों के साथ ताज का दीदार करने पहुंचे थे। लेकिन उन्हें ताज के दीदार नहीं करने दिया गया। पुलिस पर उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा कपड़ा पहने होने की वजह से उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया गया। ताजमहल में एंट्री को लेकर उन्होंने वहां मौजूद पुलिसवालों को अपना टिकट भी दिखाया इसके बाद भी उन्हें एंट्री नहीं मिली।
भगवा की नो एंट्री
जिस भगवा को पहन कर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताजमहल से पूरे देश को पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान से जुड़ने को जागरूक किया था। उसी भगवा को शरीर पर धारण कर राम जन्म भूमि अयोध्या से ताजमहल देखने आये जगद्गुरु परमहंसाचार्य और उनके शिष्यों को धक्के देकर बाहर निकाल दिया गया। हालाँकि संतों की वाणी की मधुरता थी की वो दुःख होने के बाद भी आशीर्वाद देकर वहां से वापस अयोध्या लौट गए। संतों के अपमान पर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनसे क्षमा भी मांगी है। अब मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के पास से कोई जवाब नहीं मिल पा रहा है।
अधीक्षण पुरातत्वविद RK Patel का बयान
मामले पर सफाई देते हुए अधीक्षण पुरातत्वविद आरके पटेल ने कहा, 'दिनांक 26 अप्रैल को 5.35 बजे शाम को कुछ लोग भगवा वस्त्र में वेस्ट गेट पर आए उनमें से एक साधु के हाथ में दंड था। ताजमहल परिसर में इस प्रकार की वस्तु ले जाना प्रतिबंध हैं। वेस्ट गेट पर इंस्पेक्टर द्वारा साधु को दंड लाकर में या बाहर रखकर आने के लिए बताया जिसको सुनकर बाहह गेट से चले गए और वापस नही आए। आज 27 अप्रैल को को सुरक्षा से ट्वीट प्राप्त हुआ तब पता चला की उक्त साधु जगद्गुरु परम हंस आचार्य जी थे और ट्वीट मंहत धर्मेंद्र गिरी द्वारा किया गया है मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए।'
अल्पसंख्यक मंत्री का बयान
इस पूरे मामले पर यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होगी। उन्होंने कहा कि ताजमहल में किसी को भी जाने से रोकना गलत है। इस मामले पर हमारे संवाददाता आदर्श सिंह नेदानिश आजाद से खास बात की और इस दौरान उन्होंने जगद्गुरु की एंट्री को रोकने को गलत बताते हुए कहा कि इस जांच होगी। दानिश ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि समाज को बेहतर बनाएं।

