चंडीगढ़ को लेकर पंजाब-हरियाणा में तनातनी, CM मनोहर लाल खट्टर ने कहा- चंडीगढ़ पर हरियाणा का अधिकार

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 5, 2022, 04:30 PM IST

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच तनातनी जारी है। हरियाणा विधानसभा में पंजाब विधानसभा से पास प्रस्ताव के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि चंडीगढ़ पर हरियाणा का अधिकार है।

चंडीगढ़ को लेकर पंजाब-हरियाणा में तनातनी, CM मनोहर लाल खट्टर ने कहा- चंडीगढ़ पर हरियाणा का अधिकार
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि राज्य के लिए एक अलग हाई कोर्ट के साथ-साथ चंडीगढ़ पर हरियाणा का अधिकार है। यह हमारी समझ से परे है कि उन्होंने (पंजाब की आप सरकार) चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद चंडीगढ़ का मुद्दा क्यों उठाया। वे ही बता सकते हैं कि वे किस दबाव में इस मुद्दे को सामने ला रहे हैं। शाह आयोग ने सिफारिश की कि चंडीगढ़ को हरियाणा जाना चाहिए। हरियाणा को एसवाईएल नहर से पानी मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के 2002 के आदेश पर असहमति के कारण और यह देखते हुए कि दोनों राज्यों को परस्पर निर्णय लेना चाहिए, हम फिर से अदालत को लिखेंगे क्योंकि पंजाब इस पर निष्क्रिय है।

इससे पहले हरियाणा विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें पंजाब विधानसभा द्वारा हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ पर दावा करने वाले प्रस्ताव को चिंता के साथ देखा गया। प्रस्ताव में सीएम ने केंद्र से यह भी आग्रह किया है कि जब तक पंजाब के पुनर्गठन से उत्पन्न सभी मुद्दों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा संतुलन को बिगाड़ने और सद्भाव बनाए रखने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाए। 

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि चंडीगढ़ पर राज्य के दावे को दोहराने के लिए पंजाब विधानसभा का प्रस्ताव पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत निर्देशों और समझौतों के विपरीत है। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा तब तक चंडीगढ़ में रहेगा जब तक हमें सतलुज यमुना लिंक नहर (SYL) का पानी, हिंदी भाषी क्षेत्रों और नई राजधानी की स्थापना के लिए केंद्र से पैसा नहीं मिल जाता।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 1 अप्रैल को विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश कर चंडीगढ़ को राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की। चंडीगढ़ कर्मचारियों पर केंद्रीय सेवा नियम लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद यह कदम उठाया गया।

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