जेपी नड्डा ने दिए संकेत- अनुच्छेद 370 स्कूल सिलेबस में किया जाएगा शामिल

देश
Updated Sep 24, 2019 | 09:01 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

J P Nadda on Article 370: जेपी नड्डा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने का फैसला छात्रों को पढ़ाना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में इसे स्कूल सिलेबस में शामिल किया जाएगा।

 JP Nadda
जेपी नड्डा बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • जेपी नड्डा ने कहा कि युवा पीढ़ी को यह जानने में रुचि पैदा करनी चाहिए कि अनुच्छेद 370 में क्या हुआ
  • बीजेपी नेता ने कहा कि कि छात्रों को इतिहास जानना चाहिए
  • केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू- कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था

पुणे (महाराष्ट्र): भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोमवार को संकेत दिए कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का फैसला स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। नड्डा ने कहा, 'हमारी युवा पीढ़ी को यह जानने में रुचि पैदा करनी चाहिए कि इसमें क्या हुआ है (अनुच्छेद 370 का समाप्त करना) ।

बीजेपी नेता ने कहा कि छात्रों को इतिहास जानना चाहिए। उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से हम ऐसा करेंगे।' बता दें कि नड्डा ने यह जवाब दिया जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) पर मोदी सरकार का फैसला स्कूल सिलेबस (syllabus) का हिस्सा होगा।

जेपी नड्डा में महाराष्ट्र के पुणे में राष्ट्रीय एकता अभियान के तहत बीजेपी के जन जागरण की बैठक में प्रख्यात व्यक्तित्वों को संबोधित कर रहे थे, जिसमें उन्होंने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की पूरी प्रक्रिया और महत्व के बारे में बताया।

वहीं, जब बीजेपी नेता जेपी नड्डा से जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) के कार्यान्वयन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'जैसे ही जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू होती है, परिसीमन और चुनाव होते हैं, चीजें होंगी उन लोगों के साथ पुष्टि की जाती है जो वहां चुने जाते हैं और उसके बाद ही सभी प्रावधानों को लागू किया जाएगा।'

बता दें कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की ऐलान किया था। इसके साथ ही सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को विभाजित करते हुए दोनों को अलग केंद्रशासित प्रदेश बना दिया था। वहीं, असम में सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) के जरिए उन लोगों की पहचान की थी जो अवैध भारतीय हैं और लंबे समय से राज्य में रह रहे हैं। 

असम (Assam) में इसके लिए 31 अगस्त को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) की अंतिम सूची प्रकाशित की गई थी औऱ इस सूची में 19 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। इसी के बाद से एनआरसी को अन्य राज्यों में लागू करने की मांग उठने लगी थी। कई बीजेपी शासित राज्य जिसमें: गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, झारखंड और हरियाणा इसे अपने यहां लागू करने के संकेत दे चुके हैं, जबकि कई राज्यों ने इसको लेकर विरोध भी किया है। इसमें पश्चिम बंगाल प्रमुख रूप से शामिल है। 

 

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