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गिरफ्तार हो चुका है अमृतपाल! अब एनकाउंटर की बारी, 'वारिस पंजाब दे' का बड़ा दावा

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 20, 2023, 08:02 AM IST

वारिस पंजाब दे के कानूनी सहालकार इमान सिंह खारा ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। उन्होंने दावा किया है कि पुलिस ने अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार करने के बाद 24 घंटे के अंदर उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया है।

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अमृतपाल सिंह

Photo : PTI

Amritpal Singh Arrested: अमृतपाल सिंह के मामले में 'वारिस पंजाब दे' की ओर से अब तक का सबसे बड़ा दावा किया गया है। संगठन के कानूनी सलाहकार इमान सिंह खारा ने दावा किया है कि शाहकोट पुलिस ने अमृतपाल को गिरफ्तार कर लिया है और उनके फर्जी एनकाउंटर की साजिश रची जा रही है।

खारा की ओर यह दावा तब किया गया है, जब पंजाब पुलिस लगातार कह रही है कि अमृतपाल अभी भी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने उसे भगोड़ा भी घोषित कर दिया है।

अदालत पहुंचा मामला

खारा ने इस मामले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में एक रिट याचिका भी दायर की है। उन्होंने अमृतपाल को पुलिस से जान का खतरा बताया है और आरोप लगाया कि शाहकोट पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर अमृतपाल को मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया है। पुलिस उन्हें फर्जी एनकाउंटर में मारने की योजना तैयार कर रही है।

वारिस पंजाब दे से जुड़े अब तक 112 लोग गिरफ्तार

दूसरी तरफ पंजाब पुलिस ने दावा किया है कि अमृतपाल अभी भी उनकी गिरफ्त से दूर है। इस मालमे में कानून व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में पुलिस ने 34 और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके बाद पूरे मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर 112 पहुंच गई है। पुलिस ने रविवार को बताया था कि पूरे मामले में कई हथियार भी बदामद किए हैं, जिनकी वैधता की जांच की जा रही है।

बड़ी साजिश रच रहा था अमृतपाल

अमृतपाल सिंह के बारे में एक खुफिया दस्तावेज से खुलासा हुआ है कि वह एक बड़ी साजिश रच रहा था। कहा गया है कि वह एक आत्मघाती हमले की तैयारी कर रहा था और इसके लिए बाकायदा युवाओं को ट्रेनिंग भी दे रहा था। खुफिया सूचना में दावा किया गया है कि खालिस्तान समर्थक अमृतपाल हथियारों को जमा करने के लिए नशा मुक्ति केंद्रों और एक गुरुद्वारे का इस्तेमाल कर रहा था। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, अमृतपाल के तार कथित रूप से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी जुड़े हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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