Ahmedabad Crash Anniversary: 12 जून 2025, जी हां, अहमदाबाद विमान हादसे के उस मनहूस दिन को आज एक साल पूरा हो गया है। लेकिन, उस हादसे के गवाह रहे लोगों के दिलों में वह मंजर ऐसा ताजा है, मानो कल की ही बात है। उस भयावह मंजर के गवाह बी.जे. मेडिकल कॉलेज (BJ Medical College) के छात्र आज भी उस हादसे को भूल नहीं पाए हैं। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी और कॉलेज के छात्र यश खत्री ने उस दिन की दहला देने वाली यादों को साझा करते हुए बताया कि कैसे कुछ ही सेकंड में उनकी जिंदगी बदल गई।
यश खत्री, जो हादसे के समय प्रथम वर्ष के छात्र थे और वर्तमान में सेकंड ईयर में पढ़ रहे हैं, ने बताया कि 12 जून 2025 को दोपहर करीब 1:30 बजे वे अपने दोस्तों के साथ कॉलेज की मेस में खाना खा रहे थे। खाना खत्म कर बाहर निकलते समय अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी।
शुरुआत में लगा जैसे गैस सिलेंडर फटा
उन्होंने कहा, 'शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई गैस सिलेंडर फटा है। लेकिन कुछ ही क्षणों में लगातार कई और धमाके सुनाई दिए। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, मेस की खिड़कियों और दरवाजों के शीशे टूटने लगे।'
'चारों ओर धुआं था, आखें नहीं खुल रही थीं'
यश के मुताबिक, कुछ ही सेकंड बाद मेस की एक दीवार भरभराकर छात्रों के ऊपर गिर गई। वे और उनके कई साथी मलबे में दब गए। उन्होंने बताया, 'मेरे पैर मलबे में फंस गए थे। चारों ओर धुआं था, आंखें खुल नहीं रही थीं। सिर, पीठ और हाथों पर पत्थर और मलबा गिर रहा था।'
विमान हादसे का अंदाजा नहीं था
किसी तरह मलबे से निकलकर यश और उनके साथी बाहर भागे। यश ने कहा कि बाहर आने के बाद उन्हें विमान का एक हिस्सा दिखाई दिया, लेकिन तब भी यह अंदाजा नहीं था कि एयर इंडिया का विमान कॉलेज परिसर पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ है।
विमान हादसे के बारे में ट्रॉमा सेंटर में पता चला
घायल अवस्था में वे अपने दोस्त का स्कूटर लेकर अस्पताल पहुंचे। ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान उन्हें हादसे की पूरी जानकारी मिली। उन्होंने कहा, 'तब जाकर एहसास हुआ कि हम कितनी बड़ी त्रासदी से बचकर निकले हैं।'
आज भी विमान की आवाज डराती है
यश ने बताया कि इस दुर्घटना में उनकी बैच के दो और सीनियर बैच के दो छात्रों की जान चली गई थी। वह कहते हैं कि एक साल बाद भी उनकी यादें भावुक कर देती हैं। आज भी विमान की तेज आवाज सुनते ही उस दिन की भयावह तस्वीरें आंखों के सामने घूमने लगती हैं।
यश ने बताया, 'कई दोस्तों ने गंभीर चोटें झेलीं, कुछ ने अपने अंग तक खो दिए। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि उस दिन मेरी जान बच गई।' उनके अनुसार, यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ऐसी त्रासदी है जिसकी यादें आज भी कॉलेज परिवार के जीवन का हिस्सा बनी हुई हैं।
