Ahmedabad plane crash: अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन उस दिन की भयावह तस्वीरें आज भी अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों के जेहन में ताजा हैं। हादसे के दौरान राहत और चिकित्सा प्रबंधन की कमान संभालने वाले सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने उस दिन को अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों में से एक बताया। डॉ. जोशी ने बताया कि 12 जून 2025 को वह एक सर्जरी कर रहे थे, तभी उन्हें अस्पताल परिसर के पास आग लगने की सूचना मिली। कुछ ही देर बाद पता चला कि एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है और फिर जानकारी मिली कि यह एक अंतरराष्ट्रीय विमान था, जो अस्पताल परिसर के पास स्थित मेस और हॉस्टल क्षेत्र पर गिरा है।
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अस्पताल प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के निर्देश दिए गए। कुछ ही मिनटों में पहला झुलसा हुआ मरीज अस्पताल पहुंचा। उसने बताया कि हादसा मेस में हुआ है और उस समय खाने का समय होने के कारण वहां बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। इसके बाद अस्पताल में ट्रायज सिस्टम लागू किया गया, ताकि आने वाले घायलों को उनकी स्थिति के अनुसार आईसीयू या सामान्य उपचार के लिए वर्गीकृत किया जा सके। हालांकि, कुछ समय बाद स्पष्ट होने लगा कि अस्पताल में घायल कम और गंभीर रूप से झुलसे शव अधिक पहुंच रहे हैं।
मृतकों की पहचान थी सबसे बड़ी चुनौती
डॉ. जोशी ने कहा कि जो दृश्य उस दिन देखने को मिले, वे बेहद दर्दनाक थे। उन्होंने कहा कि जीवन में दोबारा ऐसा मंजर कभी न देखने को मिले, यही प्रार्थना है। हादसे के तुरंत बाद बड़ी संख्या में यात्रियों और अन्य पीड़ितों के परिजन अस्पताल पहुंचने लगे। चूंकि विमान उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, इसलिए कई परिजन पहले से ही एयरपोर्ट पर मौजूद थे और सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंच गए थे। सबसे बड़ी चुनौती मृतकों की पहचान थी। अधिकांश शवों की हालत ऐसी थी कि सामान्य पहचान संभव नहीं थी। इसके चलते डीएनए मिलान की व्यापक प्रक्रिया शुरू की गई। बी.जे. मेडिकल कॉलेज, फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस विभाग की मदद से सैंपलिंग और पहचान का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ।
सैंपल फॉरेंसिक साइंस लैब भेजे गए
सिविल अस्पताल में लगातार पोस्टमॉर्टम, डीएनए सैंपलिंग और दस्तावेजी प्रक्रिया चलती रही। सैंपल फॉरेंसिक साइंस लैब भेजे गए, जबकि अस्पताल प्रशासन और जांच एजेंसियां परिजनों को जल्द से जल्द सही जानकारी उपलब्ध कराने में जुटी रहीं। डॉ. जोशी के मुताबिक, हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मंत्री और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और निर्देश दिया कि पीड़ित परिवारों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद परिजनों को बुलाया जाता था, दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता था और फिर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, डेथ सर्टिफिकेट, डीएनए मैचिंग सर्टिफिकेट सहित सभी आवश्यक कागजात सौंपकर शव परिजनों को दिए जाते थे। अंतिम संस्कार में किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए पुलिस एस्कॉर्ट और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
कुल 254 डीएनए मैच किए गए थे
डॉ. जोशी ने बताया कि कुल 254 डीएनए मैच किए गए थे, जबकि केवल कुछ मामलों में ही पहचान सामान्य तरीके से संभव हो पाई थी। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, नगर निगम, फॉरेंसिक टीमों और स्वयंसेवकों ने एक टीम की तरह काम किया। सभी का उद्देश्य केवल इतना था कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके दुख में साथ खड़ा हुआ जाए। हादसे में प्रभावित मेडिकल छात्रों और हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने लगातार छात्रों और उनके परिवारों से संपर्क बनाए रखा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई।
सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक हादसा
एक साल बाद उस दिन को याद करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि यह उनके करियर का सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक हादसा था। उन्होंने कहा, 'जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके दर्द की भरपाई कभी नहीं हो सकती। हम केवल यही प्रार्थना कर सकते हैं कि भगवान उन्हें इस दुख को सहने की शक्ति दे और दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे।' एक साल बाद भी अहमदाबाद विमान हादसे की यादें सिविल अस्पताल के उन डॉक्टरों और कर्मचारियों के मन में जीवित हैं, जिन्होंने उस त्रासदी को बेहद करीब से देखा और सैकड़ों परिवारों के दुख के बीच राहत और सेवा का दायित्व निभाया।
