देश

विवाद सुलझाने से ज्यादा जरूरी विवाद रोकना- CJI का इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा संदेश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा कि 'रूल ऑफ लॉ' विवाद पैदा न होने देने की व्यवस्था है। उन्होंने विवाद के बाद कार्रवाई के बजाय शुरुआत से ही स्पष्ट अनुबंधों के जरिए 'निवारक न्याय' पर जोर दिया।

Image

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा कि रूल ऑफ लॉ सिर्फ किसी गलती के बाद उसे सुधारने का तंत्र नहीं है, बल्कि ऐसा सिस्टम बनाने की जिम्मेदारी भी है जिससे गलती और विवाद की स्थिति ही कम हो। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में कॉन्ट्रैक्ट, रिस्क अलोकेशन, खरीद प्रक्रिया और विवाद निपटाने की व्यवस्था शुरुआत से स्पष्ट होनी चाहिए।

CJI बोले- सबसे विवाद समाधान वही, जिसकी जरूरत न पड़े

CJI ने कहा कि किसी डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन सिस्टम की सफलता इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि उसने कितने विवाद सुलझाए। असली सफलता तब है जब उस सिस्टम की वजह से प्रोजेक्ट में विवाद पैदा ही न हों। उन्होंने इसे 'Retrospective Justice' से 'Preventive Justice' की ओर बदलाव बताया। यानी विवाद होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय कॉन्ट्रैक्ट और संस्थागत व्यवस्था ऐसी हो कि विवाद को पहले ही पहचाना और रोका जा सके।

पुल-हाईवे कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकते

CJI ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की व्यावहारिक चुनौती बताते हुए कहा कि ब्रिज निर्माण के दौरान आर्बिट्रेशन का इंतजार नहीं कर सकता, हाईवे अपील पूरी होने तक नहीं रुक सकता और पावर प्रोजेक्ट किसी कॉन्ट्रैक्ट क्लॉज की व्याख्या पर विवाद के दौरान अपना आर्थिक उद्देश्य स्थगित नहीं कर सकता।

कॉन्ट्रैक्ट में रिस्क सही पक्ष को देना जरूरी

CJI के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में अप्रत्याशित परिस्थितियां आम हैं। जैसे जमीन की स्थिति सर्वे से अलग निकल सकती है, नियम बीच प्रोजेक्ट में बदल सकते हैं और ऐसी परिस्थितियां आ सकती हैं जिन्हें कोई पक्ष नियंत्रित नहीं कर सकता। ऐसे में सबसे अहम सवाल है कि जोखिम उस पक्ष को दिया गया है या नहीं जो उसे समझने और संभालने की सबसे बेहतर स्थिति में है। गलत रिस्क अलोकेशन से कॉन्ट्रैक्टर ज्यादा कीमत लगाते हैं और सरकारों पर भी ऐसे जोखिम आ जाते हैं जिन्हें उठाने के लिए वे सबसे उपयुक्त नहीं हैं।

CJI का 'लोएस्ट बिड' मॉडल पर बड़ा सवाल

भारत में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का जिक्र करते हुए CJI ने कहा कि सिर्फ ज्यादा निर्माण करना पर्याप्त नहीं है। निर्माण तेज, मजबूत, टिकाऊ और बेहतर उत्पादकता वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जो सिर्फ सबसे कम कीमत नहीं, बल्कि वास्तविक वैल्यू को प्राथमिकता दे।

भारत में अभूतपूर्व पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण

CJI ने कहा कि भारत इस समय अपने इतिहास में पहले से कहीं ज्यादा बड़े पैमाने और तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है। लेकिन इस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए सिर्फ विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग और नए वित्तीय मॉडल पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए भरोसा पैदा करने वाले कॉन्ट्रैक्ट, संतुलित रिस्क अलोकेशन और तेज विवाद निपटाने की व्यवस्था भी जरूरी है।

CJI ने 5 प्राथमिकताएं गिनाईं

CJI ने सरकार, उद्योग और कानूनी क्षेत्र से पांच चीजों पर लगातार ध्यान देने की अपील की

  1. जिम्मेदारियों की स्पष्टता
  2. रिस्क का संतुलित बंटवारा
  3. जरूरत के मुताबिक मानकीकरण
  4. विवाद से पहले उसे रोकने की व्यवस्था
  5. विवाद होने पर तेज और स्वतंत्र समाधान

CJI ने कहा कि ये केवल कॉन्ट्रैक्ट की छोटी कानूनी शर्तें नहीं हैं, बल्कि सुशासन के महत्वपूर्ण साधन हैं।

अलग-अलग देशों के लिए कॉन्ट्रैक्ट की साझा भाषा

CJI ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में स्टैंडर्डाइजेशन पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि दुनिया में ऐसे प्रोजेक्ट बढ़ रहे हैं जिनमें पूंजी एक देश से, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता दूसरे से और निर्माण क्षमता तीसरे देश से आती है।

ऐसे में पेमेंट, प्रोजेक्ट में बदलाव, समय बढ़ाने, अप्रत्याशित परिस्थितियों और विवाद निपटाने जैसी शर्तों में कुछ समानता होने से अनिश्चितता कम की जा सकती है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

और पढ़ें
End of Article