हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि हमारे शरीर में मौजूद सभी जरूरी चीजों का एक बैलेंस बना रहे। क्योंकि किसी भी तत्व के बैलेंस बिगड़ते ही हमारे शरीर में किसी न किसी तरह का विकार आना फिक्स हो जाता है। ऐसा ही एक तत्व हीमोग्लोबिन है, जो हमारे शरीर में पाया जाता है। हालांकि आमतौर पर हीमोग्लोबिन की कमी को खून की कमी से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन आज हम आपको हीमोग्लोबिन की अधिकता के कारण होने वाली समस्याओं के बारे में बताएंगे। शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाने पर आप 'हेमोक्रोमैटोसिस' नाम के रोग के शिकार हो जाते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से..
क्या है ‘हेमोक्रोमैटोसिस' रोग?
हीमोग्लोबिन हमारे खून के अंदर पाया जाने वाला एक बेहद जरूरी तत्व है। जिसका काम हमारे शरीर में मौजूद सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन को पहुंचाना होता है। वहीं जब हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ने लगता है तो यह 'हेमोक्रोमैटोसिस' की स्थिति कहलाती है। हेल्थ रिपोर्ट की मानें तो यह एक आनुवंशिक रोग है। जिसमें हमारा शरीर आयरन को अधिक मात्रा में संग्रहित करने लगता है।हीमोग्लोबिन बढ़ने के कारण होने वाली समस्याएं (Health problems caused by high hemoglobin)
- इसके बढ़ने से हमारा रक्त गाढ़ा होने लगता है, जिससे थक्का बनने की समस्या हो सकती है।
- इसके कारण नाक, कान और आंतों में ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।
- गाढ़े रक्त को पंप करने में हार्ट को अधिक जोर लगाना होता है, इसलिए हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा हो सकती है।
- हीमोग्लोबिन की स्तर ज्यादा होने से हमारे दिमाग के काम करने की क्षमता पर बेहद बुरा असर पड़ता है।
क्या है हीमोग्लोबिन का नॉर्मल रेंज?
एक वयस्क मानव शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14-16 प्रति डेसीलीटर होनी चाहिए। वहीं पुरुषों में इसका स्तर 15-16 प्रति डेसीलीटर तो महिलाओं में 13-14 प्रति डेसीलीटर होना चाहिए। इस लेवल से कम या ज्यादा होने पर हीमोग्लोबिन हमारे शरीर के लिए हानिकारक होने लगता है।
