हेल्थ

Rujuta Diwekar ने बताई वजन घटाने की 3 बड़ी गलतफहमियां, चावल-घी छोड़ने की जरूरत क्यों नहीं?

रुजुता दिवेकर के अनुसार, चावल, घी और केला वेट लॉस डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। किसी भी खाद्य पदार्थ को बिना पूरी जानकारी के खराब मानने के बजाय, उसकी मात्रा और पूरी थाली पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

Image

Rujuta Diwekar ने बताई वजन घटाने की 3 बड़ी गलतफहमियां, चावल-घी छोड़ने की जरूरत क्यों नहीं

वजन कम करने की कोशिश शुरू करते ही कई लोगों की थाली का खाना एकदम बदल जाता है। चावल दिखे तो मन में डर, घी दिखे तो कैलोरी की चिंता और केला सामने आए तो चीनी का ख्याल आने लगता है। सोशल मीडिया पर भी वेट लॉस फूड को लेकर इतनी अलग-अलग सलाह मिलती रहती है कि आखिर सही क्या है, यह समझना मुश्किल हो जाता है। खासकर भारतीय घरों के सामान्य खाने को कई बार बिना पूरी जानकारी के अनहेल्दी मान लिया जाता है।

    रुजुता दिवेकर ने अपने साझा किए गए वीडियो में इसी तरह की कुछ आम धारणाओं पर बात की है। उनके अनुसार, चावल, घी और केला वेट लॉस में खाने के लिए खराब नहीं है। असली सवाल यह है कि इन्हें किस तरह और कितनी मात्रा में खाया जा रहा है। भारतीय भोजन की खूबी ही यह है कि एक चीज को अकेले खाने के बजाय उसे दाल, सब्जी, दही या दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ भोजन का हिस्सा बनाया जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए किसी बीमारी या खास डाइट की स्थिति में व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर रहता है।

    1. चावल को देखकर डरने की जरूरत नहीं

    चावल को वजन बढ़ाने वाला भोजन मानना एक आम धारणा बन गई है। रुजुता दिवेकर के अनुसार, भारतीय थाली में चावल अक्सर दाल, सब्जी, कढ़ी या दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाता है। यानी भोजन सिर्फ चावल का कटोरा नहीं होता। इसलिए चावल को पूरी तरह छोड़ने के बजाय अपनी पूरी थाली और खाने की मात्रा पर ध्यान देना ज्यादा समझदारी वाली बात हो सकती है।

    2. घी दुश्मन नहीं, मात्रा मायने रखती है

    डाइट शुरू होते ही घी सबसे पहले गायब हो जाता है। वीडियो में रुजुता दिवेकर ने घी को लेकर भी इसी सोच पर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, घी में वसा और कुछ उपयोगी घटक होते हैं, इसलिए इसे बिल्कुल छोड़ देना जरूरी नहीं। रोटी, दाल या चावल में थोड़ी मात्रा में घी शामिल किया जा सकता है। बस यह याद रखें कि अच्छी चीज भी जरूरत से ज्यादा हो तो संतुलन बिगाड़ सकती है।

    3. केला सिर्फ चीनी नहीं है

    केले को देखकर केवल उसमें मौजूद प्राकृतिक मिठास के बारे में सोचना सही तस्वीर नहीं देता। केला फाइबर, विटामिन और खनिज भी देता है। रुजुता दिवेकर की बातों का मुख्य संदेश यही है कि किसी फल को सिर्फ उसकी मिठास के आधार पर खराब भोजन मान लेना ठीक नहीं। अगर केला आपकी रोज की थाली का हिस्सा है, तो उसे बिना वजह डरकर हटाने की जरूरत नहीं।

    वजन घटाने के लिए किसी एक भोजन को विलेन बनाने के बजाय पूरी दिनचर्या पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। खाने की मात्रा, फिजिकल एक्टिविटी, नींद, स्ट्रेस ये सभी मायने रखते हैं।

    Avni Bagrola
    अवनी बागरोलाauthor

    अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

    और पढ़ें
    End of Article