रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है जो हड्डियों के जोड़ो पर तो असर डालती ही है साथ ही ये कुछ लोगों में त्वचा, फेफड़े, आंखें, ह्रदय और नसों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। ये एक ऑटो इम्यून रोग है जिसमें तेज दर्द के साथ सूजन हो जाती है और धीरे धीरे हड्डियां कमजोर और टेढ़ी हो जाती हैं। रूमेटाइड अर्थराइटिस विकलांगता का कारण भी बन सकता है। दुनिया की 1% आबादी इस बीमारी से प्रभावित है। आइए पहले समझते हैं ऑटोइम्यून रोग के बारे में।
ऑटोइम्यून रोग क्या है? What is autoimmune disease in Hindi
ऑटोइम्यून रोग यानी ऐसी बीमारी जो इम्यून सिस्टम के ज्यादा सक्रिय हो जाने की वजह से शरीर को होने वाले नुकसान के कारण होती है। हमारा इम्यून सिस्टम एंटीबॉडी नाम का एक प्रोटीन बनाता है जो वायरस-बैक्टीरिया से लेकर कैंसर सेल्स तक से लड़ते हैं। ऑटोइम्यून समस्याओं में शरीर का इम्यून सिस्टम इन बाहरी हानिकारक चीजों में और शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं में अंतर नहीं कर पाता। ऑटोइम्यून रोगों की संख्या फ़िलहाल 100 से अधिक है जिनमें से एक रूमेटाइड अर्थराइटिस भी है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षण: Symptoms of Rheumatoid Arthritis in Hindi
रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षणों में सबसे सामान्य है जोड़ों में सूजन और दर्द का होना, जो सुबह के समय अकड़े रहते हैं और आराम करने के बाद अकड़न बढ़ जाती है, साथ में थकान, बुखार और कमजोरी भी हो सकती है। शुरू में रूमेटाइड अर्थराइटिस में जोड़ों पर ही असर डालता है, खास तौर पर हाथ-पांव के उंगलियों के जोड़ों पर, लेकिन जैसे जैसे बीमारी बढ़ती है, इसके लक्षण कलाई, घुटने, टखने, कोहनी, कूल्हे और कंधों तक फैल जाते हैं। ज्यादातर मामलों में ये लक्षण शरीर के दोनों तरफ एक ही जोड़ में होते हैं।
रूमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज: Treatment of Rheumatoid Arthritis in Hindi
रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके इलाज से इसके असर को कम किया जा सकता है और इसके बढ़ने की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है। इसके इलाज में पेनकिलर, एंटी-रूमेटिक ड्रग्स और कुछ स्टेरॉइड्स की सहायता से दर्द को कम किया जा सकता है। साथ ही फिजिकल थेरेपी की सहायता भी ली जाती है, इस दौरान मरीज को डॉक्टर की सलाह पर ऐसा संतुलित आहार लेना होता है जो सूजनरोधी भी हो।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
