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ओजस है सेहत का बैंक अकाउंट, जहां घटा वहां परेशानी तय

आयुर्वेद में इसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिकता के संगम के तौर पर देखा गया है। ओजस शरीर में एक मात्रात्मक तरल पदार्थ है, जो समग्र स्वास्थ्य, ऊर्जा और जीवंतता के लिए उत्तरदायी है।

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ओजस है सेहत का बैंक अकाउंट, जहां घटा वहां परेशानी तय (Photo: Freepik)

'बर्न आउट' और 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' जैसे शब्द अब आम हो चले हैं। छोटी-छोटी बात पर तनाव लेना या उत्तेजित होना हमारे जीवन में नॉर्मल माना जाने लगा है। यहां तक कि बच्चे भी पैनिक अटैक जैसी स्थिति से गुजर रहे हैं। ऐसी स्थिति को लेकर हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति, यानी आयुर्वेद, बिलकुल स्पष्ट निर्देश देता है। कहता है अपने 'ओजस' को कमजोर न होने दें।

आयुर्वेद में इसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिकता के संगम के तौर पर देखा गया है। ओजस शरीर में एक मात्रात्मक तरल पदार्थ है, जो समग्र स्वास्थ्य, ऊर्जा और जीवंतता के लिए उत्तरदायी है।

चरक के अनुसार, ओजस वो है जो हृदय में निवास करता है और मुख्यतः श्वेत, पीत और लाल रंग का होता है। यदि ओजस नष्ट हो जाए, तो मनुष्य भी नष्ट हो जाएगा। मनुष्य के शरीर में पहली बार ओजस उत्पन्न होता है, उसका रंग घी जैसा, स्वाद शहद जैसा और गंध भुने हुए धान (लज) जैसा होता है।

जैसे मधुमक्खियां फलों और फूलों से शहद एकत्र करती हैं, वैसे ही मनुष्य के कर्मों, गुणों, आदतों और आहार द्वारा शरीर में ओजस एकत्र होता है। (संदर्भ: चरक संहिता सूत्रस्थान 17/76) चरक संहिता में ये भी कहा गया है कि ओजस हृदय में स्थित होता है और वहीं से पूरे शरीर का संचालन करता है।

साधारण भाषा में कहें तो ये 'गहरा जीवन भंडार' है जो आपकी भीतर की “एनर्जी, रोग-प्रतिरोधक शक्ति और मानसिक स्थिरता का बैंक अकाउंट” है और जैसे हम अपनी अमूल्य निधि को यूं ही नहीं गंवाते, सोच समझकर खर्च करते हैं, ठीक वैसे ही ओजस के साथ करना चाहिए। इसे सहेज कर रखने से जीवन आसान बनता है।

अगली बार कोई परेशान करने वाला मेल आए, ट्रैफिक में फंसे होने पर बहुत गुस्सा आए, तो समझ लीजिएगा ओजस कमजोर हो रहा है और इसे लिफ्ट कराने की जरूरत है!

(इनपुट-आईएएनएस)

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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