सांस फूलने पर सबसे पहले लोग अक्सर ऑक्सीजन लेवल चेक करते हैं। पल्स ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन की रीडिंग नॉर्मल आए तो थोड़ी राहत जरूर मिलती है। लेकिन सिर्फ ऑक्सीजन लेवल सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि सांस से जुड़ी हर चीज ठीक है। पल्स ऑक्सीमीटर आमतौर पर खून में ऑक्सीजन का स्तर और नाड़ी की रफ्तार बताता है। लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि फेफड़े ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा तो जमा नहीं हो रही या सांस फूलने की वजह क्या है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - रेबीज कैसे होता है? जानें लक्षण, इलाज और कुत्ते-बिल्ली समेत किन जानवरों से रहता है खतरा
इसलिए अगर बार-बार या बिना किसी साफ वजह के सांस फूलती है, तो सिर्फ ऑक्सीमीटर की एक नॉर्मल रीडिंग देखकर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. के. युगवीर गौड़ के मुताबिक, सांस की समस्या को समझने के लिए सिर्फ ऑक्सीजन लेवल नहीं, बल्कि दूसरे लक्षणों और पूरी स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
फेफड़ों की परेशानी
अस्थमा या शुरुआती एयर पैसेज संबंधी समस्या में व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है, जबकि ऑक्सीजन की रीडिंग सामान्य बनी रह सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर फेफड़ों की कार्यक्षमता जांचने के लिए लंग फंक्शन टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। यानी ऑक्सीमीटर यह बता सकता है कि इस समय खून में ऑक्सीजन का स्तर कैसा है, लेकिन यह फेफड़ों की परेशानी के बारे में नहीं बताता है।
दिल की बीमारी
हर सांस की समस्या केवल फेफड़ों से जुड़ी नहीं होती। कुछ मामलों में दिल से संबंधित परेशानी भी सांस फूलने का कारण बन सकती है। ऑक्सीजन की सामान्य रीडिंग यह नहीं बताती कि दिल शरीर में खून को कितनी प्रभावी तरह से पंप कर रहा है। इसीलिए लगातार बनी रहने वाली सांस की परेशानी में डॉक्टर लक्षणों और जरूरत के अनुसार दिल की जांच भी कर सकते हैं।
हीमोग्लोबिन कम होने पर
एक और कारण एनीमिया हो सकता है। शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने पर थकान और सांस फूलने जैसी शिकायत हो सकती है, जबकि पल्स ऑक्सीमीटर सामान्य संख्या दिखा सकता है। ऐसी स्थिति में केवल ऑक्सीजन रीडिंग देखने के बजाय डॉक्टर जरूरत पड़ने पर खून की जांच कर सकते हैं।
फिटनेस भी है कारण
अगर लंबे समय से फिजिकल एक्टिविटी कम रही है, तो थोड़ा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर भी सांस ज्यादा फूल सकती है। कमजोर शारीरिक क्षमता या मांसपेशियों की कम एक्टिवनेस इसका एक कारण हो सकती है। इसी तरह तनाव और घबराहट भी सांस लेने के तरीके को बदल सकते हैं। ऐसे समय में व्यक्ति को सांस कम पड़ने जैसा महसूस हो सकता है, जबकि ऑक्सीजन का स्तर सामान्य रहता है।
यानि की पल्स ऑक्सीमीटर एक उपयोगी उपकरण है, लेकिन यह पूरी जांच नहीं है। अगर सांस फूलने की समस्या लगातार बनी हुई है, अचानक शुरू हुई है या बिना वजह समझ नहीं आ रही, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण, उनकी अवधि और किस परिस्थिति में सांस फूलती है, यह देखकर आगे की जांच तय कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार फेफड़ों की जांच, खून की जांच या हृदय से जुड़ी जांच की जा सकती है।
