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Night Shift करने के रिस्क क्या हैं, लोगों में क्यों बढ़ रही हैं हार्मोनल और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी दिक्कतें

Night Shift Health Risks In Hindi: नाइट शिफ्ट में जॉब करने वालों में कई गंभीर बीमारियों का रिस्क देखा गया है। एक नई स्टडी में पाया गया है कि इससे बायोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ जाती है।

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नाइट शिफ्ट वाली जॉब क्यों बन रही सेहत के लिए बड़ा खतरा

Night Shift Health Risks In Hindi: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नाइट शिफ्ट कई लोगों की मजबूरी बन गई है। आईटी, हेल्थकेयर या कॉल सेंटर - हर जगह रात में काम करने वालों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन धीरे-धीरे यह आदत सेहत पर भारी पड़ने लगती है। हाल ही में पब्लिश एक स्टडी में साफ बताया गया है कि नाइट शिफ्ट करने से डायबिटीज, हार्मोनल गड़बड़ी, खराब कोलेस्ट्रॉल और विटामिन D की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। शुरुआत में ये बदलाव छोटे लगते हैं, लेकिन वक्त के साथ ये शरीर के अंदर बड़ी दिक्कतों का रूप ले सकते हैं।

कौन सी स्टडी में हुआ खुलासा - Night Shift Risks

यह स्टडी हैदराबाद के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के डॉक्टरों द्वारा की गई है और इसे इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित किया गया है। इस रिसर्च में नाइट शिफ्ट और डे शिफ्ट करने वाले लोगों की तुलना की गई, जिसमें पाया गया कि नाइट शिफ्ट करने वालों में इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोनल बदलाव और खराब कोलेस्ट्रॉल ज्यादा देखा गया।

शरीर की नैचुरल घड़ी कैसे बिगड़ती है

हमारा शरीर दिन-रात के हिसाब से काम करने का आदी होता है। दिन में एक्टिव रहना और रात में आराम करना इसकी फितरत है। लेकिन जब आप रातभर जागते हैं और दिन में सोते हैं, तो यह रूटीन उल्टा हो जाता है। स्टडी में बताया गया है कि इससे शरीर की सर्कैडियन रिदम यानी बॉडी क्लॉक गड़बड़ा जाती है, जो आगे चलकर कई हेल्थ प्रॉब्लम्स की जड़ बनती है।

हार्मोन पर पड़ता है सीधा असर

जब नींद का टाइम फिक्स नहीं रहता, तो शरीर के जरूरी हार्मोन भी गड़बड़ा जाते हैं। खासकर मेलाटोनिन (जो नींद से जुड़ा है) और कोर्टिसोल (जो स्ट्रेस कंट्रोल करता है) का बैलेंस बिगड़ने लगता है। इसका असर आपको थकान, चिड़चिड़ापन और वजन बढ़ने के रूप में दिख सकता है। यही वजह है कि नाइट शिफ्ट करने वालों में हार्मोनल असंतुलन ज्यादा देखा जाता है।

कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ने लगता है

रात में काम करने वाले लोग अक्सर अनियमित टाइम पर खाना खाते हैं और फिजिकल एक्टिविटी भी कम हो जाती है। स्टडी के अनुसार, इससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ सकता है। यह दिल की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता और आगे चलकर हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है।

डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है

नाइट शिफ्ट का असर सिर्फ नींद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के शुगर कंट्रोल सिस्टम को भी प्रभावित करता है। रिसर्च में पाया गया कि इससे इंसुलिन सही से काम नहीं करता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। यही कारण है कि ऐसे लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा ज्यादा हो जाता है।

विटामिन D की कमी का छुपा कारण

नाइट शिफ्ट करने वाले लोग अक्सर दिन में कम बाहर निकलते हैं, जिससे उन्हें धूप कम मिलती है। इसका सीधा असर विटामिन D पर पड़ता है। यह विटामिन हड्डियों और इम्युनिटी के लिए बहुत जरूरी होता है। इसकी कमी से शरीर में कमजोरी और थकान बनी रहती है।

क्या कहती है स्टडी

यह स्टडी हाल ही में एक इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुई है, जिसमें शोधकर्ताओं ने बताया कि लंबे समय तक नाइट शिफ्ट करने से मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और दिल की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। यानी यह सिर्फ लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि एक हेल्थ रिस्क बन सकता है।

अगर आपकी जॉब नाइट शिफ्ट की है, तो थोड़ा सावधान रहना जरूरी है। अपनी नींद पूरी करें, खान-पान का ध्यान रखें और दिन में थोड़ी धूप जरूर लें। छोटी-छोटी आदतें आपकी सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती हैं।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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