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QDENGA Vaccine: डेंगू वैक्सीन पर 5 बड़े सवाल और उनके जवाब: कब से होगी उपलब्ध, कितनी लगवानी होंगी डोज

QDENGA Dengue Vaccine:डेंगू वैक्सीन QDENGA भारत में कब उपलब्ध होगी, कितनी डोज लगेंगी और किन लोगों को दी जा सकती है- डॉ. संजय महाजन से जानें पांच बड़े सवालों के जवाब।

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डेंगू की वैक्सीन पर 5 सवाल और डॉक्टर की तरफ से उनके जवाब

QDENGA Dengue Vaccine: भारत में डेंगू से बचाव की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी DCGI ने जापानी दवा कंपनी ताकेदा की डेंगू वैक्सीन QDENGA को देश में इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसका वैज्ञानिक नाम TAK-003 है और यह भारत में नियामकीय मंजूरी पाने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है।

QDENGA को 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए मंजूर किया गया है। हालांकि मंजूरी मिलने के बाद भी लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या वैक्सीन अभी से अस्पतालों में मिलने लगेगी? इसकी कितनी डोज लगेंगी? क्या इसे लगवाने के बाद डेंगू बिल्कुल नहीं होगा? इसके साइड इफेक्ट्स क्या हैं और किन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी होगी?

डेंगू वैक्सीन से जुड़े पांच प्रमुख सवालों को लेकर हमने नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन एवं इंटेंसिविस्ट डॉ. संजय महाजन से बात की। आइए, इन सवालों को विस्तार से समझते हैं।

सवाल 1: भारत में डेंगू वैक्सीन कब से उपलब्ध होगी?

QDENGA को भारत में इस्तेमाल की मंजूरी जरूर मिल गई है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वैक्सीन तुरंत अस्पतालों और वैक्सीनेशन सेंटर्स पर मिलने लगेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी इसे वर्ष 2027 की पहली छमाही में भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।

शुरुआत में यह वैक्सीन निजी अस्पतालों और चुनिंदा वैक्सीनेशन सेंटर्स में उपलब्ध हो सकती है। इसकी कीमत कितनी होगी, लॉन्च की निश्चित तारीख क्या रहेगी और इसे सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा या नहीं—इन सवालों पर अभी आधिकारिक जानकारी आनी बाकी है।

डॉ. संजय महाजन के अनुसार, किसी वैक्सीन को नियामकीय मंजूरी मिलने और उसके बाजार में उपलब्ध होने के बीच कुछ समय लग सकता है। इसमें उत्पादन, सप्लाई, वितरण और स्वास्थ्यकर्मियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।

सवाल 2: QDENGA की कितनी डोज लगवानी होंगी?

QDENGA की कुल दो डोज लगती हैं। प्रत्येक डोज 0.5 एमएल की होती है और इसे त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। पहली डोज लगने के तीन महीने बाद दूसरी डोज दी जाती है।

वैक्सीन से बेहतर सुरक्षा पाने के लिए दोनों डोज तय अंतराल पर लगवाना जरूरी होगा। केवल पहली डोज लगवाकर वैक्सीनेशन को अधूरा छोड़ देना उचित नहीं है। यदि किसी कारण से दूसरी डोज तय समय पर न लग पाए तो अपनी ओर से नया शेड्यूल बनाने के बजाय डॉक्टर या वैक्सीनेशन सेंटर से संपर्क करना चाहिए।

इसे लगवाने से पहले सामान्य रूप से यह साबित करना जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हो चुका है। यानी पुराने संक्रमण की जांच या डेंगू एंटीबॉडी टेस्ट को अनिवार्य शर्त नहीं बनाया गया है। फिर भी वैक्सीन लगवाने का फैसला व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य को देखकर डॉक्टर की सलाह से करना बेहतर होगा।

डेंगू वैक्सीन की कितनी डोज लगेंगी

डेंगू वैक्सीन की कितनी डोज लगेंगी

सवाल 3: क्या डेंगू वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं?

दूसरी वैक्सीन की तरह QDENGA के बाद भी कुछ सामान्य प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या लालिमा, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, हल्का बुखार और सामान्य बेचैनी इसके संभावित साइड इफेक्ट्स में शामिल हैं। ज्यादातर प्रतिक्रियाएं हल्की या मध्यम होती हैं और कुछ दिनों में ठीक हो जाती हैं।

यह एक लाइव-एटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसलिए गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, कीमोथेरेपी ले रहे मरीजों और इम्युनिटी दबाने वाली दवाएं इस्तेमाल कर रहे लोगों के लिए यह उपयुक्त नहीं हो सकती।

पहले किसी वैक्सीन से गंभीर एलर्जी हुई हो तो स्वास्थ्यकर्मी को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए। वैक्सीन प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में लगवाएं और उसके बाद निर्धारित ऑब्जर्वेशन पीरियड पूरा करें।

डेंगू वैक्सीन के क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं

डेंगू वैक्सीन के क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं

सवाल 4: क्या वैक्सीन लगने के बाद डेंगू नहीं होगा?

QDENGA डेंगू से 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। इसके परीक्षणों में वैक्सीन ने लक्षणों वाले डेंगू के साथ ही गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम करने में प्रभाव दिखाया है। लेकिन वैक्सीन लगवाने के बाद भी किसी व्यक्ति को डेंगू हो सकता है।

इसलिए वैक्सीनेशन के बाद मच्छरों से बचाव के उपाय बंद नहीं किए जा सकते। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहनें, मॉस्किटो रिपेलेंट और मच्छरदानी का प्रयोग करें। बुखार, शरीर में तेज दर्द या दूसरे संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो यह मानकर जांच न टालें कि वैक्सीन लगी हुई है।

यह भी समझना जरूरी है कि QDENGA बचाव की वैक्सीन है, डेंगू का इलाज नहीं। जिस व्यक्ति को पहले से डेंगू है, उसके मौजूदा संक्रमण को वैक्सीन ठीक नहीं करेगी।

वैक्सीन के बाद भी बचाव जरूरी होगा

वैक्सीन के बाद भी बचाव जरूरी होगा

सवाल 5: किस उम्र के लोग डेंगू वैक्सीन लगवा सकते हैं?

DCGI ने भारत में QDENGA को 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इस आयु वर्ग के हर व्यक्ति को बिना चिकित्सकीय सलाह के वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी सिफारिश मुख्य रूप से 6 से 16 वर्ष के बच्चों और डेंगू के अधिक संक्रमण वाले इलाकों पर केंद्रित रही है। नियामकीय मंजूरी और सार्वजनिक टीकाकरण की सिफारिश अलग-अलग बातें हैं। भारत में किस आयु वर्ग और किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, इसकी विस्तृत रणनीति अभी सामने आनी बाकी है।

फिलहाल सीधी बात यह है कि QDENGA डेंगू के खिलाफ सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत बन सकती है। वैक्सीन उपलब्ध होने पर उम्र, गर्भावस्था, इम्युनिटी, पुरानी बीमारियों और चल रही दवाओं की जानकारी डॉक्टर को देकर ही इसे लगवाने का फैसला करना चाहिए।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। वैक्सीन लगवाने से पहले योग्य डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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