नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले को लेकर चल रहा आंदोलन अब पूरे देश में फैलने जा रहा है। हाल ही में छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई कथित पुलिस बर्बरता के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने शुक्रवार 24 जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन ने अपने समर्थकों, छात्र संघों और नागरिक समाज समूहों से हर जिले में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार बातचीत के जरिए इस गतिरोध को खत्म करने के प्रयासों में जुट गई है।
'चलो संसद' मार्च के दौरान भड़की हिंसक झड़प
यह फैसला दिल्ली में CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान भड़की हिंसक झड़पों और कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद आया है। संगठन का कहना है कि पुलिसिया कार्रवाई ने उनके आंदोलन को राष्ट्रीय राजधानी से बाहर ले जाने के संकल्प को और मजबूत कर दिया है। जहां एक तरफ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है, वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे, उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
हर जिला, एक दिन, एक मांग
CJP ने इस राष्ट्रव्यापी अभियान को "हर जिला, एक दिन, एक मांग" (Every District. One Day. One Demand) के नारे के साथ लॉन्च किया है। संगठन ने स्थानीय आयोजकों को निर्देश दिया है कि वे छात्र संघों और नागरिक समाज के साथ मिलकर काम करें, प्रशासन से जरूरी अनुमतियां लें और यह सुनिश्चित करें कि सभी प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहें।
घायल प्रदर्शनकारियों के समर्थन में SOP जारी
देशभर में प्रदर्शनकारियों को एकजुट करने के लिए संगठन ने एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), अभियान सामग्री और जिलाधिकारियों को सौंपे जाने वाले ज्ञापन का एक फॉर्मेट जारी किया है। गाइडलाइंस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों से तय ठिकानों पर इकट्ठा होने, छात्रों की मांगों को सार्वजनिक रूप से पढ़ने, पुलिस कार्रवाई में घायल हुए साथियों के प्रति एकजुटता जताने और जिला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के लिए कहा गया है।
यह देशव्यापी अभियान CJP द्वारा आंदोलन को दिल्ली से बाहर ले जाने का अब तक का सबसे बड़ा प्रयास है। छात्र और कार्यकर्ता 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डाले हुए हैं। उनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा में हुई धांधली के लिए जवाबदेही तय करना है। हाल ही में इस आंदोलन को तब और मजबूती मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी प्रदर्शन में शामिल हो गए और छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
झड़पों के बाद और उग्र हुआ आंदोलन
इस हफ्ते की शुरुआत तक जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन सीमित स्तर पर था, जहां छात्र और कार्यकर्ता रोजाना प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन पिछले सोमवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई तीखी झड़प के बाद आंदोलन ने नाटकीय मोड़ ले लिया।
झड़पों के बाद के दिनों में जंतर-मंतर पर भीड़ काफी बढ़ गई है और कई नए लोग इस धरने में शामिल होने पहुंचे हैं। CJP आयोजकों का कहना है कि अब प्रदर्शनकारियों की संख्या का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। वहीं, कई प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने के बाद वे दिल्ली आकर आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित हुए।
इस बीच, झड़पों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो दोनों पक्षों के लिए हथियार बन गए हैं। कुछ वीडियो में पुलिस प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग करती दिख रही है, तो वहीं कुछ अन्य वीडियो में प्रदर्शनकारियों के समूह पुलिस पर पथराव करते, बोतलें फेंकते और सुरक्षाकर्मियों से भिड़ते नजर आ रहे हैं। CJP और दिल्ली पुलिस दोनों ही इन वीडियो का हवाला देकर अपनी-अपनी बात सही साबित करने में जुटे हैं, हालांकि इन वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
