हेल्थ

Valentine Week में प्यार ही नहीं, Stress भी तोड़ रहा है दिल, जानिए कैसे खतरे में पड़ती है हार्ट हेल्थ

Valentine week stress affect heart health: क्या आप जानते हैं वैलेंटाइन वीक में सिर्फ प्यार ही नहीं, बल्कि मानसिक तनाव भी दिल को नुकसान पहुंचा सकता है। रिश्तों की उम्मीदें, अकेलापन और भावनात्मक दबाव सीधे दिल की सेहत पर असर डालते हैं। इस लेख में आसान भाषा में समझिए कि वैलेंटाइन वीक के दौरान बढ़ा हुआ तनाव कैसे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाता है और इससे खुद को सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है।

Image

वैलेंटाइन वीक में स्ट्रेस का हार्ट पर असर

Valentine week stress affect heart health: वैलेंटाइन वीक आते ही चारों तरफ प्यार, रिश्तों और दिल से जुड़ी बातें शुरू हो जाती हैं। कोई अपने पार्टनर के साथ खुश नजर आता है, तो कोई अकेलापन, तुलना और रिश्तों की उलझनों में घिर जाता है। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि इस दौरान दिल को सबसे ज्यादा नुकसान प्यार से नहीं, बल्कि मानसिक तनाव (Stress) से होता है। मेडिकल साइंस भी मानता है कि भावनात्मक दबाव, उम्मीदों का बोझ और लगातार चिंता सीधे दिल की सेहत पर असर डालती है। वैलेंटाइन वीक के दौरान बढ़ा हुआ तनाव कई बार दिल के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

वैलेंटाइन वीक और बढ़ता भावनात्मक तनाव

आज वैलेंटाइन वीक सिर्फ प्यार जताने तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर जोड़ों की खूबसूरत तस्वीरें, महंगे तोहफे और परफेक्ट रिश्तों की झलक देखकर कई लोग खुद को पीछे छूटा हुआ महसूस करने लगते हैं। यही भावना धीरे-धीरे भावनात्मक तनाव (Emotional Stress) में बदल जाती है। रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक ऐसा तनाव रहने से शरीर में तनाव हार्मोन (Cortisol) बढ़ जाता है, जो दिल की धड़कन और रक्तचाप पर असर डालता है।

तनाव कैसे दिल पर सीधा असर डालता है

जब इंसान लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर एक तरह की सतर्क स्थिति में चला जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में लड़ो या भागो की अवस्था (Fight or Flight Response) कहा जाता है। इस दौरान दिल तेजी से धड़कता है, रक्तचाप बढ़ता है और नसों पर दबाव पड़ता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो दिल का दौरा (Heart Attack), सीने में दर्द (Angina) और दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

टूटे दिल की बीमारी भी है हकीकत

बहुत ज्यादा भावनात्मक झटका लगने पर एक खास तरह की बीमारी भी हो सकती है, जिसे आम भाषा में टूटे दिल की बीमारी (Broken Heart Syndrome) कहा जाता है। मेडिकल शब्दों में इसे टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी (Takotsubo Cardiomyopathy) कहते हैं। इसमें अचानक गहरा दुख, ब्रेकअप या भावनात्मक सदमा दिल की मांसपेशियों को कमजोर कर देता है। वैलेंटाइन वीक में रिश्तों से जुड़ा दुख इस खतरे को बढ़ा सकता है।

अकेलापन और रिश्तों का दबाव, दोनों ही नुकसानदायक

वैलेंटाइन वीक में सिर्फ सिंगल लोग ही तनाव में नहीं होते, बल्कि रिश्ते में रहने वाले लोग भी उम्मीदों के दबाव से परेशान रहते हैं। परफेक्ट डेट, परफेक्ट गिफ्ट और परफेक्ट व्यवहार का दबाव रिश्तों को भारी बना देता है। वहीं अकेलापन महसूस कर रहे लोग खुद को भावनात्मक रूप से कमजोर समझने लगते हैं। दोनों ही हालात दिल की सेहत के लिए ठीक नहीं माने जाते।

वैलेंटाइन वीक में दिल को तनाव से कैसे बचाएं

वैलेंटाइन वीक को तनाव का कारण बनाने के बजाय इसे खुद के साथ जुड़ने का मौका बनाएं। अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाएं और खुद की तुलना दूसरों से करना बंद करें। डॉक्टरों के अनुसार हल्की शारीरिक गतिविधि, गहरी सांस लेने की प्रक्रिया (Breathing Exercise) और पूरी नींद तनाव कम करने में मदद करती है। याद रखें, दिल की सेहत के लिए मानसिक शांति सबसे जरूरी है।Valentine Week में प्यार ही नहीं, Stress भी तोड़ रहा है दिल, जानिए कैसे खतरे में पड़ती है हार्ट हेल्थ

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

और पढ़ें
End of Article