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Hiroshima Day 2026: हिरोशिमा पर परमाणु हमले के बाद कौन-कौन सी बीमारियां फैलीं थी? जानिए रेडिएशन का शरीर पर असर

हिरोशिमा दिवस परमाणु बम के दर्दनाक इतिहास के साथ उसके स्वास्थ्य पर पड़े लंबे असर की भी याद दिलाता है। जानिए रेडिएशन शरीर को कैसे प्रभावित करता है और क्या आज भी हिरोशिमा में इसका खतरा मौजूद है।

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Diseases Caused by Hiroshima Attack

Hiroshima Day 2026: 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया गया। इस एक हमले ने कुछ ही सेकंड में पूरा शहर बदल दिया। हजारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन जिन लोगों की जान बच गई, उनके सामने एक और बड़ी चुनौती थी.. रेडिएशन का असर। यह ऐसा खतरा था जो दिखाई नहीं देता था, लेकिन धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाता रहा। कई लोग महीनों और वर्षों तक अलग-अलग बीमारियों से जूझते रहे। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस तरह के रेडिएशन की वजह से कौन-कौन सी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

रेडिएशन क्या करता है?

परमाणु विस्फोट के बाद निकलने वाली रेडिएशन शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को नुकसान पहुंचाती है। अगर शरीर को बहुत अधिक मात्रा में रेडिएशन मिले, तो उसका असर तुरंत भी दिख सकता है और कई बार सालों बाद भी।

शुरुआती लक्षण

न्यूक्लियर रेडिएशन से कई लोगों मे तेज बुखार, उल्टी, दस्त, कमजोरी और चक्कर जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। हिरोशिमा हमले के बाद कुछ लोगों के बाल तेजी से झड़ने लगे और त्वचा पर जलन व घाव भी बनने लगे थे। जिसे डॉक्टरों ने बाद में एक्यूट रेडिएशन सिंड्रोम (Acute Radiation Syndrome) के रूप में पहचाना था।

कैंसर का खतरा

हिरोशिमा के बचे हुए लोगों में सबसे ज्यादा चिंता कैंसर को लेकर देखी गई। खासकर ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) के मामले हमले के कुछ वर्षों बाद तेजी से बढ़े। इसके अलावा थायरॉयड, फेफड़े, स्तन और पेट के कैंसर का खतरा भी सामान्य लोगों की तुलना में अधिक पाया गया। कैंसर के साथ रेडिएशन से बोन मैरो को भी नुकसान पहुंचा था। जिसके कारण कई लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो गई और उन्हें बार-बार संक्रमण होने लगा। ऐसी स्थिति में छोटी-छोटी बीमारियां भी गंभीर रूप ले लेती हैं।

आंखों और त्वचा पर असर

कई लोगों में समय के साथ मोतियाबिंद (Cataract) विकसित हुआ। वहीं त्वचा पर लंबे समय तक जलने के निशान, दाग और घाव बने रहे। कुछ लोगों को त्वचा से जुड़ी दूसरी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा।

परमाणु हमले का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहा। अपने परिवार, घर और शहर को खोने वाले कई लोग लंबे समय तक डर, तनाव, अवसाद और मानसिक आघात से जूझते रहे। आज इसे पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस जैसी मानसिक स्थिति से भी जोड़ा जाता है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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