Health Risk Zone: आजकल कई बीमारियां अचानक नहीं होतीं, बल्कि लंबे समय तक शरीर के अंदर धीरे-धीरे पनपती रहती हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, फैटी लिवर, थायरॉइड, हार्मोनल गड़बड़ी, हाई बीपी और शुरुआती हार्ट डिजीज जैसी समस्याएं अक्सर बिना बड़े लक्षणों के शुरू होती हैं। यही वजह है कि डॉक्टर अब एक नए शब्द पर जोर दे रहे हैं - हेल्थ रिस्क जोन यानी वह स्थिति, जब बीमारी पूरी तरह सामने तो नहीं आई होती, लेकिन शरीर छोटे-छोटे संकेत देने लगता है (health risk zone symptoms)।
हो सकता है कि आपको लगता है कि हम तो पूरी तरह फिट हैं। लेकिन बॉडी हमें छोटे-बड़े ऐसे कई संकेत देती हैं जो हमें हेल्थ रिस्क जोन में एंट्री के बारे में अलर्ट करते हैं। अगर इन संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।
क्या होता है Health Risk Zone
हेल्थ रिस्क जोन का मतलब है ऐसी अवस्था, जहां व्यक्ति खुद को सामान्य महसूस करता है, लेकिन उसकी लाइफस्टाइल, शरीर के संकेत और अंदरूनी बदलाव यह बता रहे होते हैं कि भविष्य में बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। यानी जो हमें अचानक बीपी बढ़ना, हार्ट अटैक आना, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ जाना या फिर फैटी लिवर डिटेक्ट होने की जानकारी मिलती है, वो एकदम अचानक होती नहीं है। कहीं न कहीं, शरीर में चीजें पहले से 'खराब' हो रही होती हैं जिसकी जानकारी शरीर हमें धीरे-धीरे पहले ही देने लगता है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब तक कोई बड़ा दर्द या गंभीर समस्या न हो, तब तक सब ठीक होता है। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, शरीर बीमारी आने से पहले कई 'धीमे संकेत' देता है।
अमृता हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर मोहित शर्मा के अनुसार - आजकल के दौर में बढ़ती बीमारियों की एक बड़ी वजह यह भी है कि लोग शरीर के संकेत समझते नहीं हैं। वे उन्हें सामान्य थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही नजरअंदाजी बाद में महंगी पड़ती है और लोगों समझते हैं कि उनको अचानक से समस्या हो गई है।

हेल्थ रिस्क जोन क्या है, जानें इसके मुख्य लक्षण
लगातार थकान को हल्के में न लें
अगर पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर हमेशा थका हुआ महसूस करता है तो यह सिर्फ व्यस्त दिनचर्या की वजह नहीं हो सकती। लगातार थकान शरीर में कई अंदरूनी समस्याओं का संकेत हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एनीमिया, विटामिन B12 या विटामिन D की कमी, थायरॉइड डिसऑर्डर, हार्मोनल बदलाव, डायबिटीज या क्रॉनिक इंफ्लेमेशन का शुरुआती संकेत हो सकता है।
खासतौर पर अगर थकान के साथ चिड़चिड़ापन, ध्यान न लगना या कमजोरी भी महसूस हो रही हो, तो जांच करवाना जरूरी हो जाता है।
पेट के आसपास बढ़ती चर्बी हेल्थ रिस्क जोन की चेतावनी
कई लोग वजन बढ़ने को सिर्फ खाने-पीने या उम्र का असर मान लेते हैं। लेकिन अगर पेट के आसपास तेजी से फैट जमा हो रहा है, तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस या मेटाबॉलिक सिंड्रोम का शुरुआती संकेत हो सकता है।
वहीं दूसरी तरफ, बिना किसी वजह अचानक वजन कम होना भी चिंता की बात हो सकती है। खासकर अगर इसके साथ भूख कम लगना, कमजोरी या थकावट हो तो। जाहिर है कि ये एकदम से तो होता नहीं है। एक्स्ट्रीम पॉइंट पर शरीर धीरे-धीरे ही पहुंचता है।
शरीर के ये संकेत बताते हैं बढ़ रहा है Blood Sugar
डॉ. मोहित शर्मा का कहना है कि अगर बार-बार मीठा खाने का मन करता है, बहुत ज्यादा प्यास लगती है, बार-बार पेशाब आता है या खाना खाने के बाद बहुत नींद आने लगती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दरअसल, ये संकेत बढ़ते ब्लड शुगर लेवल की तरफ इशारा कर सकते हैं। अगर आपको ये लक्षण थोड़े भी महसूस हों तो टेस्ट कराने में देर ना करें। थोड़ी सी सावधानी और जल्दी एक्शन आपको शुगर का पूरा मरीज होने से बचा सकता है।
त्वचा और बाल भी बताते हैं अंदर की समस्या
शरीर की कई कमी सबसे पहले त्वचा और बालों पर दिखाई देती है। गर्दन या अंडरआर्म्स के आसपास काला पड़ना इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। इसके अलावा:
- ज्यादा बाल झड़ना
- नाखून टूटना
- ड्राई स्किन
- बार-बार मुंह में छाले
जैसी समस्याएं कई बार पोषण की कमी या हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी हो सकती हैं।
सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना भी हेल्थ रिस्क जोन की निशानी
अगर हल्की सी एक्टिविटी में ही सांस फूलने लगे, सीने में भारीपन महसूस हो, पैरों में सूजन आए या ज्यादा पसीना आने लगे, तो यह शुरुआती हार्ट स्ट्रेन का संकेत हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि अब हार्ट से जुड़ी समस्याएं सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। कम उम्र के लोगों में भी खराब लाइफस्टाइल की वजह से ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके संकेत भी शरीर सांस फूलने, जल्दी थकान के रूप में शुरूआती स्टेज पर ही देने लगता है।

हेल्थ रिस्क जोन के लिए कैसे करें खुद को चेक
खराब नींद यानी हेल्थ रिस्क जोन में एंट्री
बहुत से लोग नींद की समस्या को गंभीरता से नहीं लेते। वैसे पहले जो समस्या बुढ़ापे की मानी जाती थी, अब वो यंगस्टर्स को भी चपेट में ले रही है। रात में सोते समय जोर से खर्राटे लेना, सुबह उठकर भी थका महसूस करना, रात में बार-बार नींद टूटना या दिनभर सुस्ती रहना जैसे लक्षण अक्सर आगे चलकर स्लीप एपनिया, मोटापा, स्ट्रेस या मेटाबॉलिक डिसऑर्डर में बदल सकते हैं।
डॉ. मोहित कहते हैं कि अगर आप रात में ठीक 15 दिन से ज्यादा समय तक ठीक से सो नहीं पा रहे हैं तो बॉडी चेकअप जरूर कराएं।
खुद को ऐसे करें Health Risk Check
डॉक्टर्स के अनुसार, अगर आपकी लाइफस्टाइल में ये बातें शामिल हैं, तो आप हेल्थ रिस्क जोन में हो सकते हैं:
- लंबे समय तक बैठकर काम करना
- बहुत कम फिजिकल एक्टिविटी
- प्रोसेस्ड और जंक फूड ज्यादा खाना
- तनाव और अनियमित नींद
- मोटापा
- स्मोकिंग या शराब
- परिवार में डायबिटीज या हार्ट डिजीज की हिस्ट्री
ऐसे लोगों को भले ही कोई बड़ी बीमारी महसूस न हो, लेकिन उन्हें नियमित हेल्थ चेकअप जरूर करवाना चाहिए।
30 की उम्र के बाद कौन-कौन से टेस्ट जरूरी
हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि 30 की उम्र के बाद कुछ बेसिक टेस्ट नियमित रूप से करवाने चाहिए, जैसे:
- ब्लड प्रेशर
- ब्लड शुगर
- कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल
- लिवर फंक्शन टेस्ट
- किडनी फंक्शन टेस्ट
- थायरॉइड टेस्ट
- विटामिन B12 और Vitamin D
यानी आज के समय में बचाव सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि शरीर के छोटे संकेतों को समय रहते समझना भी है। क्योंकि कई बार शरीर धीरे से फुसफुसाता है, इससे पहले कि वह जोर से मदद के लिए पुकारे।
