Income Tax Deadlines 2026 : वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जुलाई की सामान्य इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख समाप्त हो चुकी है। लेकिन करदाताओं के लिए टैक्स से जुड़ी जिम्मेदारियां यहीं खत्म नहीं होतीं। आने वाले महीनों में एडवांस टैक्स जमा करने, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने, बेलेटेड (विलंबित) रिटर्न और टीडीएस रिपोर्टिंग जैसी कई महत्वपूर्ण समय-सीमाएं (डेडलाइन्स) आ रही हैं। समय पर इन डेडलाइन्स का पालन करने से आप न केवल जुर्माने और ब्याज से बच सकते हैं, बल्कि टैक्स से जुड़े तनाव से भी मुक्त रह सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग ने स्पष्ट किया है कि आकलन वर्ष (AY) 2026-27 का संबंध वित्त वर्ष (FY) 2025-26 में कमाई गई आय से है और यह 'आयकर अधिनियम, 1961' के तहत ही संचालित होगा। हालांकि, नया 'आयकर अधिनियम, 2025' 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है, लेकिन यह नई व्यवस्था 'टैक्स ईयर' के नाम से वित्त वर्ष 2026-27 से पूरी तरह प्रभावी होगी। इसके तहत पुराना 'प्रीवियस ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' का दोहरा सिस्टम पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। आइए जानते हैं आने वाले महीनों की 8 सबसे महत्वपूर्ण डेडलाइन्स।
अगस्त से दिसंबर 2026 की महत्वपूर्ण इनकम टैक्स डेडलाइंस
टैक्स प्लानिंग और नियमानुसार अनुपालन (कॉम्प्लायंस) के लिए करदाताओं को नीचे दी गई मुख्य तिथियों को अपने कैलेंडर में जरूर दर्ज कर लेना चाहिए।
- 31 अगस्त 2026 (ITR फाइलिंग): यह डेडलाइन उन विशिष्ट नॉन-ऑडिट करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो जुलाई की समय-सीमा के तहत कवर नहीं हुए थे या जिन्हें विशेष छूट प्राप्त थी।
- 15 सितंबर 2026 (द्वितीय एडवांस टैक्स किस्त): उन सभी करदाताओं के लिए जिन्हें एडवांस टैक्स देना अनिवार्य है। इस तारीख तक अनुमानित सालाना टैक्स का 45 प्रतिशत हिस्सा जमा करना होता है।
- 30 सितंबर 2026 (टैक्स ऑडिट रिपोर्ट): जिन करदाताओं, कारोबारियों या पेशेवरों के खातों का ऑडिट (जांच) होना अनिवार्य है, उन्हें इस तिथि तक अपनी टैक्स ऑडिट रिपोर्ट सबमिट करनी होगी।
- 31 अक्टूबर 2026 (ITR फाइलिंग - ऑडिट केस): जिन टैक्सपेयर्स के खातों का ऑडिट होता है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
- 31 अक्टूबर 2026 (TDS/TCS रिपोर्टिंग): लागू डिडक्टर्स और कलेक्टर्स के लिए टीडीएस और टीसीएस की त्रैमासिक रिपोर्ट दाखिल करने की यह अंतिम सीमा है।
- 30 नवंबर 2026 (अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन व ट्रांसफर प्राइजिंग ITR): जिन करदाताओं के मामले ट्रांसफर प्राइजिंग (अंतर्राष्ट्रीय या विशिष्ट घरेलू लेनदेन) से जुड़े हैं, उनके लिए ITR फाइलिंग की अंतिम तिथि 30 नवंबर है।
- 15 दिसंबर 2026 (तृतीय एडवांस टैक्स किस्त): एडवांस टैक्स देने वाले करदाताओं को इस तारीख तक अपने कुल अनुमानित टैक्स दायित्व का 75 प्रतिशत हिस्सा पूरा जमा करना होता है।
- 31 दिसंबर 2026 (विलंबित या बेलेटेड ITR): यदि कोई करदाता अपनी मूल फाइलिंग डेडलाइन चूक गया है, तो वह 31 दिसंबर 2026 तक लेट फीस के साथ बेलेटेड ITR फाइल कर सकता है।
एडवांस टैक्स: सितंबर और दिसंबर की तिथियों का महत्व
अगर किसी करदाता की कुल टैक्स देनदारी (टीडीएस कटने के बाद) 10,000 रुपये या उससे अधिक बनती है, तो उसे एडवांस टैक्स की किस्तों का भुगतान करना अनिवार्य होता है। विशेष रूप से व्यावसायिक आय, स्वतंत्र पेशेवर शुल्क (प्रोफेशनल फीस), ब्याज, कैपिटल गेंस और गैर-वेतन स्रोतों से आय अर्जित करने वाले करदाताओं के लिए ये किश्तें बेहद महत्वपूर्ण हैं। एडवांस टैक्स समय पर न चुकाने की स्थिति में करदाता पर आयकर नियमों के तहत दंडात्मक ब्याज और जुर्माना लागू होता है। इसलिए 15 सितंबर और 15 दिसंबर की तारीखों का विशेष ध्यान रखें।
बेलेटेड ITR और रिवाइज्ड ITR में अंतर समझें
अक्सर टैक्सपेयर्स बेलेटेड (विलंबित) रिटर्न और रिवाइज्ड (संशोधित) रिटर्न की आखिरी तारीखों को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं। 31 दिसंबर 2026 केवल उन लोगों के लिए अंतिम अवसर है जिन्होंने तय समय में अपना ITR दाखिल ही नहीं किया था (बेलेटेड ITR)। वहीं दूसरी ओर, यदि आपने समय पर रिटर्न जमा कर दिया था लेकिन बाद में उसमें कोई गलती या अधूरी जानकारी पाई गई, तो उसे सुधारने के लिए रिवाइज्ड ITR दाखिल करने का समय 31 मार्च 2027 (या असेसमेंट पूरा होने से पहले) तक उपलब्ध रहता है।
अंतिम समय की आपाधापी से बचने के लिए जरूरी तैयारी
टैक्स एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि करदाताओं को पहले यह पहचानना चाहिए कि वे किस श्रेणी (नॉन-ऑडिट, ऑडिट, या एडवांस टैक्स दायित्व) में आते हैं। इसके बाद अपने सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे पैन (PAN), आधार (Aadhaar) कार्ड, पंजीकृत मोबाइल नंबर, बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) पहले से ही एकत्र करके रख लेने चाहिए। समय से पूर्व अनुपालन करने से अंतिम समय की तकनीकी खराबी, फॉर्म में गलतियों और बेवजह के वित्तीय जुर्माने से बचा जा सकता है।
