666 Rule in Breastfeeding: स्तनपान सिर्फ बच्चे को दूध पिलाने तक सीमित नहीं है। खासकर जब मां काम करती हो, बाहर जाती हो या किसी वजह से सीधे बच्चे को दूध न पिला पाए, तब पंप किया हुआ ब्रेस्ट मिल्क काफी काम आता है। लेकिन यहां एक सवाल अक्सर परेशान करता है कि, निकाला हुआ दूध कितनी देर तक सुरक्षित रहता है? इसी सवाल के जवाब में 6-6-6 नियम का नाम सोशल मीडिया और पैरेंटिंग कंटेंट में काफी सुनने को मिलता है।
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आखिर 6-6-6 नियम है क्या?
सबसे पहले इस वायरल नियम को आसान भाषा में समझते हैं। 6-6-6 को आमतौर पर एक याद रखने वाली ट्रिक की तरह इस्तेमाल किया जाता है, 6 घंटे कमरे के तापमान पर, 6 दिन फ्रिज में और 6 महीने फ्रीजर में। इसका मकसद नई मांओं को पंप किए हुए दूध की स्टोरेज का मोटा अंदाजा देना है।
लेकिन सिर्फ इस फॉर्मूले को देखकर दूध को 6 घंटे या 6 दिन तक रखना सही नहीं माना जाना चाहिए। दूध कितनी देर सुरक्षित रहेगा, यह तापमान, साफ-सफाई और स्टोरेज के तरीके पर भी निर्भर करता है। CDC गाइडलाइन्स के मुताबिक ताजा निकाला हुआ दूध 25°C या उससे कम कमरे के तापमान पर 4 घंटे तक, फ्रिज में 4 दिन तक और फ्रीजर में करीब 6 महीने तक अच्छी गुणवत्ता के लिए रखा जा सकता है।
भारत जैसे गर्म मौसम वाले देश में कमरे का तापमान कई बार 25°C से ऊपर चला जाता है। ऐसे में दूध को बाहर रखने के बजाय जल्दी फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है। यानी अगर आपने अभी दूध पंप किया है और अगले कुछ घंटों में बच्चे को नहीं देना है, तो उसे साफ, ढक्कन वाले फूड-ग्रेड कंटेनर में रखकर जल्द से जल्द ठंडा करना समझदारी है।
फ्रिज और फ्रीजर में रखते समय छोटी-सी समझदारी
ब्रेस्ट मिल्क को फ्रिज के दरवाजे में रखने के बजाय अंदर की तरफ रखना बेहतर होता है, क्योंकि दरवाजा बार-बार खुलने से तापमान बदलता रहता है। कंटेनर पर दूध निकालने की तारीख लिख देना भी बहुत काम की आदत है। इससे पुराना दूध पहले इस्तेमाल करने में आसानी होती है।
अगर दूध फ्रीज किया गया है और उसे इस्तेमाल करना है, तो उसे फ्रिज में रखकर धीरे-धीरे पिघलाया जा सकता है। वहीं इसे पूरी तरह पिघलने के बाद फ्रिज में 24 घंटे के भीतर इस्तेमाल करना चाहिए। एक बार पिघले हुए दूध को दोबारा फ्रीज नहीं करना चाहिए। साथ ही ध्यान रखें कि, पंप किया हुआ दूध माइक्रोवेव में गर्म नहीं करना चाहिए।
स्तनपान को लेकर सबसे जरूरी बात कोई वायरल नंबर या सोशल मीडिया का हैक नहीं, बल्कि मां और बच्चे की जरूरत है। इसलिए 6-6-6 को एक आसान याद रखने वाली बात के तौर पर जरूर जानिए, लेकिन इसे पक्का मेडिकल नियम न समझें। खासकर अगर बच्चा समय से पहले पैदा हुआ है, बीमार है या स्टोरेज को लेकर कोई खास स्थिति है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या लैक्टेशन एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर है।
