Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Breastfeeding Week: क्या मां में विटामिन की कमी से ब्रेस्ट मिल्क की क्वालिटी प्रभावित होती है, जानें बच्चे पर इसका असर

World Breastfeeding Week 2026: क्या मां में विटामिन D, B12, आयरन, फोलेट या आयोडीन की कमी ब्रेस्ट मिल्क की गुणवत्ता प्रभावित कर सकती है? विशेषज्ञों से जानें किन महिलाओं को CBC, फेरिटिन, B12, फोलेट, विटामिन D और थायरॉयड टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है।

Image
क्या विटामिन-मिनरल्स की कमी का मां के दूध पर असर होता है, क्या बताते हैं डॉक्टर
Authored by: Medha Chawla
Updated Aug 3, 2026, 16:35 IST
Follow on Google News

World Breastfeeding Week 2026: डिलीवरी के बाद अक्सर पूरा ध्यान बच्चे पर चला जाता है। बच्चा ठीक से दूध पी रहा है या नहीं, उसका वजन बढ़ रहा है या नहीं और वह कितनी देर सोता है- इन सब पर घरभर की नजर रहती है। इस बीच मां की थकान को सामान्य मान लिया जाता है। कमजोरी हो तो कहा जाता है कि नई मां के साथ ऐसा होता ही है और बाल झड़ें तो इसे डिलीवरी के बाद होने वाला बदलाव समझकर छोड़ दिया जाता है।

लेकिन क्या हर थकान सामान्य होती है? क्या मां में विटामिन या मिनरल की कमी होने से उसके दूध की गुणवत्ता भी कम हो सकती है? और क्या हर स्तनपान कराने वाली महिला को विटामिन प्रोफाइल या दूसरे ब्लड टेस्ट करवा लेने चाहिए?

1 से 7 अगस्त तक मनाए जा रहे वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2026 के मौके पर तीन विशेषज्ञों से समझते हैं कि मां के पोषण और ब्रेस्ट मिल्क के बीच क्या संबंध है और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्या मां का कमजोर होना दूध को भी ‘कमजोर’ बना देता है

सबसे पहले एक जरूरी बात समझनी होगी। मां के खाने में किसी दिन कमी रह जाने या हल्की पोषण की कमी होने से उसका दूध अचानक खराब या पोषणहीन नहीं हो जाता। शरीर ब्रेस्ट मिल्क बनाने को प्राथमिकता देता है और ज्यादातर परिस्थितियों में दूध बच्चे की जरूरतें पूरी करता रहता है।

डॉ. स्वाति सिन्हा, सीनियर कंसल्टेंट (ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, रोजवॉक बाय रेनबो हॉस्पिटल्स) बताती हैं - अगर मां में हल्की-फुल्की पोषण की कमी भी हो, तब भी ज्यादातर मामलों में उसके दूध की गुणवत्ता पर खास असर नहीं पड़ता। लेकिन विटामिन D, विटामिन B12, विटामिन A या आयोडीन की गंभीर कमी होने पर इनकी मात्रा मां के दूध में भी कम हो सकती है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि कमी का पता चलते ही ब्रेस्टफीडिंग रोक दी जाए। इसका सही रास्ता मां की जांच, कमी का इलाज और बच्चे के डॉक्टर से जरूरी सलाह लेना है।

किन पोषक तत्वों की कमी पर ध्यान देना चाहिए

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां की ऊर्जा और कुछ पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है। विशेष रूप से निम्न कमियों पर ध्यान दिया जाता है:

पोषक तत्वकमी के संभावित संकेतकिन महिलाओं में जोखिम अधिक हो सकता है
आयरनलगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना, चेहरा पीला पड़नाडिलीवरी में अधिक ब्लड लॉस, पहले से एनीमिया या आयरन कम लेना
विटामिन B12थकान, हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, जीभ में जलनवीगन या सीमित शाकाहारी डाइट, पेट या आंत से जुड़ी बीमारी
फोलेटकमजोरी, थकान और कुछ प्रकार का एनीमियाअसंतुलित या बहुत सीमित डाइट
विटामिन Dहड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, कमजोरीधूप बहुत कम लेना, त्वचा का अधिकतर हिस्सा ढका रहना या पहले से कमी
आयोडीनथायरॉयड से जुड़े लक्षण; कई बार स्पष्ट संकेत नहीं मिलतेआयोडीनयुक्त नमक न लेना, सीमित डाइट या थायरॉयड संबंधी स्थिति

डॉ. तृप्ति रहेजा, डायरेक्टर–ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के अनुसार- शरीर मां के दूध के निर्माण को प्राथमिकता जरूर देता है, लेकिन अगर लंबे समय तक विटामिन D, विटामिन B12, आयरन, फोलेट और आयोडीन जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी बनी रहे तो सबसे पहले मां की सेहत और रिकवरी प्रभावित हो सकती है। कुछ पोषक तत्वों के मामले में ब्रेस्ट मिल्क में उनकी मात्रा पर भी असर पड़ सकता है।

मां के शरीर में डेफिशिएंसी हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लिमेंट लें

मां के शरीर में डेफिशिएंसी हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लिमेंट लें

क्या हर ब्रेस्टफीडिंग मदर को ब्लड टेस्ट करवाने चाहिए

इस सवाल का सीधा जवाब है% नहीं। केवल ब्रेस्टफीडिंग कराने के कारण हर महिला को एक लंबा विटामिन टेस्ट पैकेज करवाने की जरूरत नहीं होती। जांच का फैसला महिला के लक्षण, डाइट, मेडिकल हिस्ट्री, डिलीवरी के दौरान हुए ब्लड लॉस और पहले से मौजूद बीमारियों को देखकर किया जाता है।

डॉ. मौमिता मिश्रा, हेड–लैब ऑपरेशंस (मुंबई), मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड कहती हैं कि लैब टेस्ट की मदद से किसी कमी को समय रहते पहचाना जा सकता है। इससे डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि रिपोर्ट, मेडिकल हिस्ट्री और महिला के जोखिम को देखते हुए उसके लिए सही इलाज और पोषण संबंधी सलाह तय कर पाते हैं।

किन संकेतों पर डॉक्टर से जांच की बात करनी चाहिए

नई मां को सामान्य से ज्यादा थकान होना आम हो सकता है, क्योंकि उसकी नींद पूरी नहीं होती और शरीर डिलीवरी से उबर रहा होता है। फिर भी कुछ लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ते जाएं तो उन्हें केवल 'पोस्ट-डिलीवरी कमजोरी' मानकर नहीं छोड़ना चाहिए।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर से बात करें, अगर...

  1. बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी कई सप्ताह तक बनी हुई है।
  2. उठने पर बार-बार चक्कर आते हैं या सांस फूलती है।
  3. हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या जलन महसूस होती है।
  4. शरीर या हड्डियों में लगातार दर्द रहता है।
  5. डिलीवरी के दौरान काफी ब्लड लॉस हुआ था।
  6. महिला वीगन या बहुत सीमित शाकाहारी डाइट लेती है।
  7. गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी हुई है या आंतों में पोषक तत्वों के अवशोषण से जुड़ी बीमारी है।
  8. पहले से एनीमिया, थायरॉयड, किडनी, लिवर या कोई दूसरी पुरानी बीमारी है।
  9. मां धूप में बहुत कम निकलती है।
  10. डिलीवरी के बाद रिकवरी उम्मीद से ज्यादा धीमी लग रही है।

डॉ. तृप्ति रहेजा का कहना है कि अगर महिला को लंबे समय तक बहुत ज्यादा थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झनझनाहट या रिकवरी में देरी महसूस हो रही है, तो उसे अपने डॉक्टर से पोषण संबंधी जांच के बारे में बात करनी चाहिए। खासकर तब, जब वह किसी तरह की सीमित डाइट ले रही हो।

डॉक्टर किन ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं

सभी टेस्ट हर महिला के लिए जरूरी नहीं होतीं। लक्षण और जोखिम देखकर इनमें से कुछ चुने जा सकते हैं:

जांचइससे क्या पता चलता है
CBC यानी कम्प्लीट ब्लड काउंटहीमोग्लोबिन और एनीमिया से जुड़ी शुरुआती जानकारी
सीरम फेरिटिनशरीर में जमा आयरन का स्तर
सीरम विटामिन B12B12 की कमी का आकलन
सीरम फोलेटशरीर में फोलेट की स्थिति
25-हाइड्रॉक्सी विटामिन Dविटामिन D का स्तर जांचने का सामान्य टेस्ट
थायरॉयड प्रोफाइलथकान, वजन में बदलाव या दूसरी शिकायतों के पीछे थायरॉयड की भूमिका
अन्य जांचेंलक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार डॉक्टर तय कर सकते हैं

डॉ. स्वाति सिन्हा का कहना है कि हर स्तनपान कराने वाली मां के लिए रूटीन में सभी ब्लड टेस्ट जरूरी नहीं होते। शाकाहारी या वीगन डाइट, एनीमिया, पोषक तत्वों के अवशोषण में दिक्कत या धूप में बहुत कम रहना जैसे जोखिम हों तो डॉक्टर CBC, फेरिटिन, विटामिन B12, फोलेट और विटामिन D जैसी जांचों की सलाह दे सकते हैं।

ब्रेस्टफीड कराने वाली मां कौन से टेस्ट कराएं

ब्रेस्टफीड कराने वाली मां कौन से टेस्ट कराएं

टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद क्या किया जाता है

किसी विटामिन या मिनरल की कमी मिलना ब्रेस्टफीडिंग बंद करने का कारण नहीं है। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर कमी की गंभीरता के अनुसार खाने में बदलाव, ओरल सप्लीमेंट, इंजेक्शन या दूसरी दवाओं की सलाह देते हैं। कुछ समय बाद दोबारा जांच करके देखा जा सकता है कि इलाज का असर हो रहा है या नहीं।

डॉ. मौमिता मिश्रा के मुताबिक, समय पर कमी का पता लगने से डॉक्टर सही सप्लीमेंट शुरू कर सकते हैं और नियमित जांच के जरिए इलाज का असर मॉनिटर कर सकते हैं। इससे मां और बच्चे में लंबे समय तक रहने वाली पोषण संबंधी समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है।

यहां अपने मन से हाई-डोज विटामिन लेना ठीक नहीं है। खासकर विटामिन A, विटामिन D, आयोडीन और आयरन की जरूरत तथा सुरक्षित मात्रा अलग-अलग हो सकती है। सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह से ही लिया जाना चाहिए।

मां की रिपोर्ट सामान्य हो, तब भी बच्चे के विटामिन पर ध्यान जरूरी

मां की जांच और बच्चे की जरूरत को एक ही बात नहीं समझना चाहिए। उदाहरण के लिए, ब्रेस्ट मिल्क में प्राकृतिक रूप से विटामिन D की मात्रा अक्सर बच्चे की पूरी जरूरत के लिए पर्याप्त नहीं होती। इसी कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से स्तनपान करने वाले बच्चे के लिए विटामिन D सप्लीमेंट के बारे में पीडियाट्रिशियन से सलाह लेना जरूरी है। इसी तरह छह महीने की उम्र के आसपास बच्चे को आयरन के बाहरी स्रोत की जरूरत बढ़ती है। CDC की ब्रेस्टफीडिंग और विटामिन D गाइडलाइन, CDC की आयरन गाइडलाइन

आयोडीन भी शिशु के मस्तिष्क और शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। स्तनपान के दौरान इसकी जरूरत बढ़ सकती है, लेकिन सप्लीमेंट की मात्रा महिला की डाइट, थायरॉयड की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार होनी चाहिए। CDC: आयोडीन और ब्रेस्टफीडिंग

मां के लिए आसान पोषण चेकलिस्ट

  • हर मुख्य भोजन में दाल, पनीर, दही, अंडा या डॉक्टर द्वारा अनुमत कोई प्रोटीन स्रोत रखें।
  • आयरन के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना और तिल जैसे खाद्य पदार्थ लें।
  • खाने के साथ या तुरंत बाद चाय-कॉफी पीने से बचें, खासकर आयरन की कमी होने पर।
  • वीगन डाइट लेने वाली महिलाएं विटामिन B12 को लेकर डॉक्टर से जरूर बात करें।
  • आयोडीनयुक्त नमक इस्तेमाल करें, लेकिन नमक की मात्रा जरूरत से ज्यादा न बढ़ाएं।
  • कैल्शियम और आयरन सप्लीमेंट साथ लेने के बजाय डॉक्टर द्वारा बताया गया अंतर रखें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और बिना जरूरत 'दूध बढ़ाने' वाले पाउडर या हर्बल सप्लीमेंट न लें।
  • प्रसूति रोग विशेषज्ञ के साथ बच्चे के पीडियाट्रिशियन से भी नियमित फॉलो-अप रखें।
  • ब्रेस्टफीडिंग रोकना नहीं, मां की कमी का इलाज करना है

यानी मां में किसी पोषक तत्व की कमी का अर्थ यह नहीं कि उसका दूध बच्चे के लिए सही नहीं है। ऐसी बातें नई मां में बेवजह अपराधबोध पैदा कर सकती हैं। सही तरीका यह है कि लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों को पहचाना जाए, जरूरत होने पर चुनिंदा जांच कराई जाए और डॉक्टर की देखरेख में कमी पूरी की जाए।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान केवल बच्चे की ग्रोथ नहीं, मां की रिकवरी भी पोस्टनेटल केयर का हिस्सा है। मां बार-बार यह सुनती है कि बच्चे के लिए अच्छा खाना जरूरी है। अब इसमें एक बात और जोड़ने की जरूरत है- मां को अच्छा खाना और सही इलाज इसलिए भी चाहिए क्योंकि उसका अपना स्वस्थ रहना उतना ही महत्वपूर्ण है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। जांच, सप्लीमेंट या दवा शुरू करने से पहले गायनेकोलॉजिस्ट या संबंधित डॉक्टर की सलाह लें।

End of Article