Monsoon Digestion Problems: बारिश का मौसम आते ही मन पकौड़े, चाय और गर्मागर्म खाने की तरफ भागता है, लेकिन इसी मौसम में पेट सबसे पहले नाराज भी हो जाता है। कभी पेट में हल्का-हल्का दर्द महसूस होता है, कभी मरोड़, कभी गैस तो कभी ऐसा लगता है कि पाचन सिस्टम ही ठीक से काम नहीं कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि हर बार इसकी वजह पेट का इंफेक्शन नहीं होती। कई बार हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।
सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के इंटरनल मेडिसिन विभाग की डायरेक्टर डॉ. मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि मानसून में पेट दर्द को सिर्फ इंफेक्शन समझ लेना सही नहीं है। इस मौसम में शरीर और पाचन तंत्र दोनों पर मौसम का असर पड़ता है, इसलिए कारण को समझना जरूरी है।
हर पेट दर्द का मतलब इंफेक्शन नहीं होता
बरसात में बैक्टीरिया और वायरस ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण के मामले बढ़ते हैं। लेकिन अगर पेट दर्द के साथ बुखार, उल्टी या बार-बार दस्त नहीं हैं, तो इसका कारण इंफेक्शन नहीं होता है।
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कई बार ऐसा भी होता है कि ऑफिस में लगातार बैठकर काम किया, दोपहर का खाना देर से खाया, शाम को चाय के साथ समोसे या पकौड़े खा लिए और रात में फिर भारी डिनर कर लिया। मानसून में पाचन तंत्र के धीमे काम करने की वजह से अगले दिन पेट दर्द होना बिल्कुल आम बात है। मौसम का असर और खानपान में लापरवाही मिलकर पाचन को बिगाड़ देती है।
बारिश में पाचन हो जाता है सुस्त
शायद आपने भी महसूस किया होगा कि बरसात में भूख पहले जैसी नहीं लगती। लेकिन मन कुछ अच्छा और चटपटा खाने का जरूर करता है। ऐसे में हम जरूरत से ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना खा लेते हैं।
यहीं से दिक्कत शुरू होती है। इस मौसम में पाचन की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। खाना देर से पचता है, पेट में गैस बनने लगती है और फिर भारीपन, दर्द या मरोड़ जैसी परेशानी महसूस होने लगती है। मौसम की वजह से फिजिकल एक्टिविटी भी कम हो जाती है। ऐसे में जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी या IBS की समस्या रहती है, उनके लिए मानसून थोड़ा ज्यादा चुनौती भरा हो सकता है।
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बाहर का खाना ही नहीं, ये आदतें भी पेट की समस्याएं देती हैं
अक्सर हम पूरा दोष स्ट्रीट फूड को दे देते हैं, लेकिन कई बार गलती हमारी अपनी दिनचर्या में होती है। सुबह नाश्ता छोड़ देना, दिनभर सिर्फ चाय पर चलना, पानी कम पीना, ऑफिस में घंटों बैठे रहना या देर रात खाना खाना... ये सब भी पेट दर्द की वजह बन सकते हैं। ऊपर से बारिश में पानी पीने की इच्छा भी कम होती है, जिससे पाचन और प्रभावित होता है।
यानी कई बार पेट में महसूस होता दर्द या मरोड़ - हमें बीमारी का नहीं, बल्कि अपनी खराब दिनचर्या का संकेत दे रहा होता है।
कब समझें कि मामला सिर्फ गैस का नहीं है
अगर पेट दर्द थोड़ी देर में ठीक हो जाए और आराम मिलने लगे तो बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर दर्द लगातार बना रहे, बहुत तेज हो जाए या उसके साथ बुखार, उल्टी, दस्त, मल में खून, पेट फूलना या कमजोरी महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
ऐसे समय में दर्द की गोली या गैस की दवा खाकर बात टालना सही नही रहेगा। बेहतर होगा कि आप तुरंत डॉक्टर से मिलें और उसकी सलाह पर जांच कराएं।
छोटी-छोटी सावधानियां, पेट रहेगा आराम में
मानसून में पेट का ध्यान रखना कोई मुश्किल काम नहीं है। बस जितना हो सके ताजा और घर का बना खाना खाएं। लंबे समय तक खुला रखा खाना खाने से बचें। बाहर कुछ खाएं भी तो ऐसी जगह चुनें जहां साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता हो। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। और सबसे जरूरी बात... बारिश का मौसम है, इसका मतलब यह नहीं कि हर शाम पकौड़े और तली हुई चीजें ही प्लेट में हों।
डॉ. मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि अगर पेट दर्द बार-बार होने लगे या हर मानसून में यही परेशानी दोहराई जाए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते कारण पता चल जाए, तो इलाज भी आसान रहता है और बड़ी परेशानी से भी बचा जा सकता है।
