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तो क्या ममता और केजरीवाल पका रहे अलग खिचड़ी, खरगे का नाम आगे कर राहुल के खिलाफ किया 'खेल'

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 20, 2023, 10:41 AM IST

'INDI' Alliance Meeting: कांग्रेस के सबसे बड़े नेता की अगर बात की जाए तो राहुल गांधी का नाम सबसे पहले आता है लेकिन केजरीवाल एवं ममता ने उनका नाम नहीं लिया। इस गठबंधन में ममता और केजरीवाल अलग खिचड़ी पकाते दिख रहे हैं।

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मंगलवार को दिल्ली में हुई इंडी अलायंस की बैठक।

Photo : PTI

'INDI' Alliance Meeting: तीन महीने बाद बड़ी जोर-शोर से इंडी गठबंधन की चौथी बैठक मंगलवार को दिल्ली में हुई। इस बैठक को लेकर माहौल तो यही बनाया जा रहा था कि नरेंद्र मोदी को कैसे हराना है ये आज फाइनल हो जाएगा। लेकिन बैठक में इंडी गठबंधन के नेताओं ने नरेंद्र मोदी नहीं बल्कि राहुल गांधी के खिलाफ ही खेल कर दिया है। बैठक में तय तो ये होना था कि नरेंद्र मोदी को कुर्सी से कैसे हटाना है लेकिन बैठक में ऐसा प्रस्ताव लाया गया कि अगर गलती से विपक्ष जीत भी जाए तो राहुल गांधी कुर्सी पर ना बैठ जाए इसका इंतजाम आज कर दिया गया। वही रटी रटाई बातें, जो पहले भी सुनते रहे हैं, वही बातें इस मीटिंग के बाद भी कही जा रही है, जैसे विपक्ष को एक मंच पर आना ही होगा। सब मिलकर पूरे देश में रैलियां करेंगे। सीट शेयरिंग पर आगे बात कर लेंगे।

अलग खिचड़ी पका रहे ममता-केजरीवाल?

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पीएम पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम आगे किया। कांग्रेस के सबसे बड़े नेता की अगर बात की जाए तो राहुल गांधी का नाम सबसे पहले आता है लेकिन केजरीवाल एवं ममता ने उनका नाम नहीं लिया। इस गठबंधन में ममता और केजरीवाल अलग खिचड़ी पकाते दिख रहे हैं। क्योंकि इंडी गठबंधन की मीटिंग से पहले सोमवार को ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की मुलाकात हुई थी। हो सकता है कि इस मुलाकात में ये तय किया गया हो कि राहुल गांधी का नाम ना लेकर खड़गे का नाम लिया जाएगा।

लेकिन एक बात जो इस मीटिंग से साफ होती दिखी वो ये कि विपक्ष के चेहरे के तौर पर राहुल गांधी का पत्ता कटता दिख रहा है। क्योंकि बैठक में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने मल्लिकार्जुन खड़गे को गठबंधन का चेहरा बनाने का प्रस्ताव दिया। ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल वो नेता हैं, जिनका राहुल गांधी से सीधा टकराव रहा है। ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल दोनों की पार्टियों की सोच ये रही है कि राहुल गांधी नरेंद्र मोदी की टीआरपी हैं।

मंगलवार की बैठक से जो बातें निकलीं हैं। वे कुछ इस तरह हैं।

  • विपक्ष खुद ही कॉन्फिडेंट नहीं है कि वो 2024 में नरेंद्र मोदी को हरा सकते हैं
  • दूसरी बात ये है कि विपक्ष बिना चेहरे के 2024 में उतरने की सोच रहा है
  • तीसरी बात ये है कि विपक्ष राहुल गांधी पर दांव लगाने के लिए तैयार नहीं है

गठबंधन का चेहरे पर निर्णय ले पा रहे

इंडी गठबंधन का हाल ये है कि ये ना तो गठबंधन का चेहरे पर निर्णय ले पा रहे हैं, ना तो सीट शेयरिंग कर पा रहे हैं, ना ही कॉन्फिडेंट है कि 2024 में लड़ पाएंगे। लेकिन ऐसी बैठकों से इनके नेता बाहर आते हैं तो माहौल पूरा बनाते हैं कि जैसे सब बात हो गई है, जैसे सब तय हो गया है। जैसे अब बस नरेंद्र मोदी को हरा ही देंगे। इस मीटिंग में जेएमएम की एक सांसद ने बताया कि सीट शेयरिंग को लेकर मीटिंग में बहुत बातें हुईं। कुछ लोग चाहते थे कि एक जनवरी से पहले पहले सीट शेयरिंग हो जाए। लेकिन कुछ भी फाइनल नहीं हो पाया।

सबसे बड़ा मुद्दा सीट शेयरिंग का

विपक्षी गठबंधन के सामने अभी सबसे बड़ा मुद्दा सीट शेयरिंग है। चार चार बैठक होने के बाद भी सीट शेयरिंग पर अगर कुछ फाइनल नहीं हो पा रहा है या कोई डेडलाइन फिक्स नहीं हो पा रही है। तो इसका मतलब ये है कि विपक्ष की पार्टियों पीएम मोदी के नाम पर साथ तो आ गई हैं लेकिन कोई भी किसी के लिए सीटें छोड़ने को तैयार नहीं हैं। नहीं तो ऐसा हो सकता है था कि जिन राज्यों में पेंच फंसा है उसे छोड़कर बाकी राज्यों में सीट शेयरिंग का ऐलान हो जाता जिससे एक सकारात्मक संदेश जाता।

बैठक में कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ

विपक्षी की चौथी मीटिंग में भी सीट शेयरिंग पर बात तो हुई लेकिन कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के बाद बताया कि दिल्ली या पंजाब मे सीट शेयरिंग को लेकर जो समस्या है उसे भी सुलझा लिया जाएगा। खड़गे ने बताया कि पहले राज्यों के स्तर पर बातचीत होगी अगर बात नहीं बनी तो फिर गठबंधन के नेता मामले को सुलझाएंगे। मल्लिकार्जुन ने कहा कि बहुत से राज्य ऐसे हैं जहां एक पार्टी मजबूत है वहां पर गठबंधन कैसे होगा इस समस्या को भी बाद में सुलझा लिया जाएगा।

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