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ट्रंप और जिनपिंग के पास कौन सा है तुरुप का पत्ता? क्या ईरान युद्ध पर हो पाएगी कोई डील

ट्रंप, चीन के साथ अपना व्यापार घाटा कम करने की दिशा में बात कर सकते हैं। अभी अमेरिका चीन को बेचता ज्यादा और उससे खरीदता कम और बेचता ज्यादा है। अमेरिकी टैरिफ लगने के बाद चीन ने अमेरिका से सोयाबीन खरीदना एक तरह से बंद कर दिया था।

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चीन के दौरे पर आए हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

Photo : AP

Trump China Visist: दुनिया के दो सबसे बड़े ताकतवर नेता आज बीजिंग में मिले। गुरुवार को शिष्टमंडल स्तर की इस वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की खूब तारीफ की और उन्हें महान नेता बताया। इस मुलाकात पर दुनिया भर की नजरें लगी हैं। दुनिया उम्मीद लगाए बैठी है कि दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश के नेता जब आपस में मिलेंगे और बात करेंगे तो सबसे बड़े संकट का कोई रास्ता निकलेगा लेकिन इस पूरी बातचीत पर ईरान युद्ध का साया है। यह साया अमेरिका और चीन दोनों पर है।

ईरान युद्ध से निकलना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप

ईरान युद्ध में फंसे ट्रंप किसी तरह इस समस्या और संकट से निकलना चाहते हैं। ईरान और चीन की करीबी को देखते हुए उन्हें पता है कि इस युद्ध से निकलने में चीन उनकी मदद कर सकता है। वह डील के लिए ईरान को तैयार कर सकता है। उसे मना सकता है लेकिन चीन ऐसा क्यों चाहेगा? वह तो चाहेगा कि अमेरिका इस तरह के युद्ध में फंसा रहे, उसके हजारों बिलियिन खर्च हों, उसके एयरक्राफ्ट का नुकसान हो और सैन्य ताकत के रूप में वह कमजोर होता रहे। फिर भी चीन यदि ट्रंप के लिए ईरान के साथ किसी डील पर आगे बढ़ता है तो वह इसके लिए ट्रंप से बहुत भारी कीमत वसूलेगा।

ताईवान पर यूएस से रियायत चाहेगा चीन

चीन, ट्रंप के सामने अपनी वन चाइना पॉलिसी मानने की शर्त रख सकता है। अमेरिका इस शर्त को मानने के लिए यदि तैयार नहीं होता तो चीन ताईवान को हथियार और सैन्य रूप से मदद बंद करने के लिए कह सकता है। दूसरा एआई चिप जिस पर ट्रंप ने रोक लगाई है। उस पर से प्रतिबंध हटाने की वह शर्त रख सकता है। चीन चाहेगा कि अमेरिका, ताईवान पर अपना हाथ हल्का रखे और उसे एआई चिप और सेमीकंडक्टर का निर्यात करता रहे।

बातचीत की टेबल पर चीन ज्यादा ताकतवर

एक्सपर्ट की राय है कि बातचीत की इस टेबल पर चीन के पास कार्ड ज्यादा और ट्रंप के पास कम हैं। ईरान युद्ध से निकलने के लिए ट्रंप। कोई ऐसी डील कर सकते हैं जो इजरायल को शायद पसंद न आए क्योंकि इजराइल के ऑब्जेक्टिव क्लियर हैं लेकिन युद्ध के दौरान ट्रंप के उद्देश्य साफ नहीं रहे हैं। वे युद्ध को लेकर अपना गोलपोस्ट बार-बार बदलते रहे हैं। इजराइल का लक्ष्य शुरू से स्पष्ट रहा है। वह ईरान में रिजीम चेंज, तेहरान का न्यूक्लियर और बैलिस्टिक प्रोग्राम का अंत और ईरान के हमास और हिज्बुल्ला जैसे प्रॉक्सीज का खात्मा चाहता है लेकिन ट्रंप का अब पूरा जोर होर्मुज खुलवाने और ईरान का संवर्धित यूरेनियम हासिल करने पर है।

होर्मुज खुलवाने में चीन की मदद मांग सकते हैं ट्रंप

दरअसल, ट्रंप और उनके रणनीतिकारों ने ईरान पर हमला करने से पहले जैसा सोचा था। वैसा हुआ नहीं, ईरान टूटा नहीं। वह बहादुरी से लड़ता आया है। होर्मुज से तेल और गैस की आपूर्ति ठप होने से ट्रंप पर अब भारी दबाव पड़ रहा है। वह इस युद्ध से निकलना चाहते हैं। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप अमेरिकी जनता को कुछ अपनी उपलब्धियां दिखाना और सुनाना चाहते हैं। होर्मुज खुलवाने के लिए यदि वह ईरान को तैयार कर लेते हैं तो यह उनकी सबसे बड़ी कामयाबी मानी जाएगी। दूसरा, ईरान का इनरिच्ड और लापता यूरेनियम हासिल करने पर भी यदि बात बन जाती है तो इसे भी वह अपनी बड़ी सफलता के रूप में पेश करेंगे।

US सोयाबीन का सबसे बड़ा खरीदार है चीन

दूसरा ट्रंप, चीन के साथ अपना व्यापार घाटा कम करने की दिशा में बात कर सकते हैं। अभी अमेरिका चीन को बेचता ज्यादा और उससे खरीदता कम और बेचता ज्यादा है। अमेरिकी टैरिफ लगने के बाद चीन ने अमेरिका से सोयाबीन खरीदना एक तरह से बंद कर दिया था। इससे अमेरिकी किसानों को भारी नुकसान होने लगा था। चूंकि, अमेरिकी सोयाबीन का सबसे बड़ा खरीदार चीन है, ऐसे में ट्रंप चीन को दोबारा पहले की तरह इसकी खरीद करने के लिए कह सकते हैं। चीन बाजारों तक ज्यादा अमेरिकी पहुंच होने की मांग भी अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर हो सकती है।

कुल मिलाकर, इस मुलाकात से ट्रंप और जिनपिंग दोनों अपने फायदे के लिए गिव एंड टेक की रणनीति पर आगे बढ़ सकते हैं। उनकी इस मुलाकात से निकलता क्या है? इसका इंतजार दुनिया बेसब्री से कर रही है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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