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ऐसे ही हैं नीतीश कुमार... फिर BJP से तोड़ेंगे नाता? जानिए हर बार कैसे बदल जाते हैं उनके सुर

Bihar Politics: नीतीश कुमार ने पाला बदलते ही अपना पुराना अंदाज अख्तियार कर लिया है। जब साल 2022 के सितंबर माह में उन्होंने एनडीए का साथ छोड़ा था, तब उन्होंने पानी पी-पीकर भाजपा को कोसा था। वो एक बार फिर कह रहे हैं कि अब राजग छोड़कर कहीं और जाने का सवाल ही नहीं।

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बार-बार ऐसा क्यों करते हैं नीतीश कुमार?

Photo : Times Now Digital

Nitish Kumar Political Technique: बिहार में नीतीश कुमार कब पलटी मार लें कुछ नहीं कहा जा सकता है। भाजपा के साथ जाते ही वो आरजेडी और कांग्रेस को कोसने लगते हैं, तो महागठबंधन का हिस्सा बनते ही भाजपा को पानी पी-पीकर कोसने लगते हैं। अब इसे उनकी फितरत कही जाए या सियासी अंदाज... मगर नीतीश ऐसे ही हैं। 9 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश बिहार के सीएम को लेकर ही नहीं बल्कि पलटी मारने को लेकर भी कई कीर्तिमान स्थापित किए होंगे।

नीतीश ने फिर कहा- NDA छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता

सियासत में नीतीश कुमार को बिन पेंदी का लोटा कहा जाता है। इसका मतलब समझना मुश्किल नहीं है। उनका हृदय कब परिवर्तित हो जाए और जनाब कब पाला बदलकर अपने सहयोगी को गच्चा दे दें, सपने में भी कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। मगर नीतीश कुमार तो ऐसे ही हैं... तभी शायद एक बार फिर उन्होंने पाला बदलते ही अपना सुर भी बदल लिया। बिहार के सबसे बड़े पलटीमार नेता नीतीश ने 9वीं बार सीएम पद की शपथ लेते ही ये कह दिया कि मैं जहां (राजग) था, वहां वापस आ गया और अब कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता।

कैसे नीतीश कुमार का इतनी जल्दी हो जाता है हृदय परिवर्तन?

मौसम और नीतीश दोनों बड़े ही प्यार से बदलते हैं, बिहार के मुख्यमंत्री का हृदय परिवर्तन सत्ता के लिए होता है या आत्मसम्मान की खातिर या फिर उन्हें ये सब करने में अब मजा आने लगा है। कुछ भी कह पाना आसान नहीं होगा। 72 साल की उम्र में नीतीश कुमार शपथ ग्रहण के बाद वही साल 2022 में जैसे लालू खेमे के साथ जाते ही ये दावा किया था कि 'अब कभी भाजपा के साथ नहीं जाऊंगा', उसी तरह इस बार में अपने पुराने मिजाज में उन्होंने कहा, 'मैं पहले भी उनके (राजग) साथ था। हम अलग-अलग रास्तों पर चले गए लेकिन अब हम साथ हैं और रहेंगे। मैं जहां (राजग) था, वहां वापस आ गया और अब कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता।' उन्होंने कहा कि रविवार को कुल आठ लोगों ने मंत्री पद की शपथ ली और बाकी लोगों के नाम जल्द ही तय कर लिये जायेंगे।

नीतीश का कसूर नहीं... सियासत का चरित्र ही है बेवफाई

इसमें नीतीश का कोई कसूर नहीं है, सियासत में बेवफा होना ही सबसे बड़ी कला है या फिर यूं कहें कि राजनीति का असल चरित्र ही बेवफाई है। तभी तो पाला बदलकर कोई सरकार बना लेता है, तो कोई मंत्री बन जाता है, किसी को टिकट मिल जाता है। बड़ी अजीब होती है ये राजनीति, मगर नीतीश कुमार तो ऐसे ही हैं। बिहार में नाटकीय उलटफेर के बाद रिकॉर्ड नौवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले जनता दल यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भले ही ये दावा किया हो कि 'अब NDA छोड़कर कहीं और जाने का कोई सवाल ही नहीं है।', मगर आदत बदलन पाना इतना ही आसान होता तो भला सियासत में कोई पाला ही नहीं बदलता।

नीतीश कुमार की राह पर ही चल रहे हैं सम्राट चौधरी

ऐसा नहीं है कि बिहार की सियासत में अपनी बात से सिर्फ नीतीश कुमार ही पलटी मारते हैं, उनकी सरकार में डिप्टी सीएम बने सम्राट चौधरी भी किसी से कम नहीं हैं। सत्ता का नशा ही ऐसा होता है कि कुर्सी के लिए कोई कुछ भी कर सकता है। तभी शायद नीतीश को पानी पी-पीकर कोसने वाले सम्राट चौधरी के भी सुर रविवार को बदले बदले नजर आए। याद दिला दें, ये वही सम्राट चौधरी हैं जो राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री हुआ करते थे। सांसद, विधायक, भाजपा के प्रदेश उपाअध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष फिर बिहार की नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम। जनाब ने कसमें खाई थीं और दावा किया था कि अपने सिर की पगड़ी तभी खोलूंगा जब नीतीश कुमार को बिहार की कुर्सी के बेदखल करूंगा। उन्होंने ये तो नहीं कहा था कि वो साथ मिलकर सरकार चलाएंगे। खैर... यही तो राजनीति है, यहां कुर्सी की खातिर कभी भी कुछ भी हो सकता है।

बिहार की महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा देने के बाद विपक्षी गठबंधन 'INDIA' में स्थिति ठीक नहीं होने का दावा करने वाले नीतीश को कुछ ही घंटों बाद NDA की नई सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में यहां राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने शपथ दिलायी। नीतीश कुमार ने कहा कि भाजपा नेता सम्राट चौधरी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री होंगे। नीतीश ने यह भी दोहराया कि वो बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। नीतीश और भाजपा नेताओं के सुर बदले हुए हैं, सियासत में ऐसा होना आम बात है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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