Nitish Kumar Political Technique: बिहार में नीतीश कुमार कब पलटी मार लें कुछ नहीं कहा जा सकता है। भाजपा के साथ जाते ही वो आरजेडी और कांग्रेस को कोसने लगते हैं, तो महागठबंधन का हिस्सा बनते ही भाजपा को पानी पी-पीकर कोसने लगते हैं। अब इसे उनकी फितरत कही जाए या सियासी अंदाज... मगर नीतीश ऐसे ही हैं। 9 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश बिहार के सीएम को लेकर ही नहीं बल्कि पलटी मारने को लेकर भी कई कीर्तिमान स्थापित किए होंगे।
नीतीश ने फिर कहा- NDA छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता
सियासत में नीतीश कुमार को बिन पेंदी का लोटा कहा जाता है। इसका मतलब समझना मुश्किल नहीं है। उनका हृदय कब परिवर्तित हो जाए और जनाब कब पाला बदलकर अपने सहयोगी को गच्चा दे दें, सपने में भी कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। मगर नीतीश कुमार तो ऐसे ही हैं... तभी शायद एक बार फिर उन्होंने पाला बदलते ही अपना सुर भी बदल लिया। बिहार के सबसे बड़े पलटीमार नेता नीतीश ने 9वीं बार सीएम पद की शपथ लेते ही ये कह दिया कि मैं जहां (राजग) था, वहां वापस आ गया और अब कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता।
कैसे नीतीश कुमार का इतनी जल्दी हो जाता है हृदय परिवर्तन?
मौसम और नीतीश दोनों बड़े ही प्यार से बदलते हैं, बिहार के मुख्यमंत्री का हृदय परिवर्तन सत्ता के लिए होता है या आत्मसम्मान की खातिर या फिर उन्हें ये सब करने में अब मजा आने लगा है। कुछ भी कह पाना आसान नहीं होगा। 72 साल की उम्र में नीतीश कुमार शपथ ग्रहण के बाद वही साल 2022 में जैसे लालू खेमे के साथ जाते ही ये दावा किया था कि 'अब कभी भाजपा के साथ नहीं जाऊंगा', उसी तरह इस बार में अपने पुराने मिजाज में उन्होंने कहा, 'मैं पहले भी उनके (राजग) साथ था। हम अलग-अलग रास्तों पर चले गए लेकिन अब हम साथ हैं और रहेंगे। मैं जहां (राजग) था, वहां वापस आ गया और अब कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता।' उन्होंने कहा कि रविवार को कुल आठ लोगों ने मंत्री पद की शपथ ली और बाकी लोगों के नाम जल्द ही तय कर लिये जायेंगे।
नीतीश का कसूर नहीं... सियासत का चरित्र ही है बेवफाई
इसमें नीतीश का कोई कसूर नहीं है, सियासत में बेवफा होना ही सबसे बड़ी कला है या फिर यूं कहें कि राजनीति का असल चरित्र ही बेवफाई है। तभी तो पाला बदलकर कोई सरकार बना लेता है, तो कोई मंत्री बन जाता है, किसी को टिकट मिल जाता है। बड़ी अजीब होती है ये राजनीति, मगर नीतीश कुमार तो ऐसे ही हैं। बिहार में नाटकीय उलटफेर के बाद रिकॉर्ड नौवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले जनता दल यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भले ही ये दावा किया हो कि 'अब NDA छोड़कर कहीं और जाने का कोई सवाल ही नहीं है।', मगर आदत बदलन पाना इतना ही आसान होता तो भला सियासत में कोई पाला ही नहीं बदलता।
नीतीश कुमार की राह पर ही चल रहे हैं सम्राट चौधरी
ऐसा नहीं है कि बिहार की सियासत में अपनी बात से सिर्फ नीतीश कुमार ही पलटी मारते हैं, उनकी सरकार में डिप्टी सीएम बने सम्राट चौधरी भी किसी से कम नहीं हैं। सत्ता का नशा ही ऐसा होता है कि कुर्सी के लिए कोई कुछ भी कर सकता है। तभी शायद नीतीश को पानी पी-पीकर कोसने वाले सम्राट चौधरी के भी सुर रविवार को बदले बदले नजर आए। याद दिला दें, ये वही सम्राट चौधरी हैं जो राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री हुआ करते थे। सांसद, विधायक, भाजपा के प्रदेश उपाअध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष फिर बिहार की नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम। जनाब ने कसमें खाई थीं और दावा किया था कि अपने सिर की पगड़ी तभी खोलूंगा जब नीतीश कुमार को बिहार की कुर्सी के बेदखल करूंगा। उन्होंने ये तो नहीं कहा था कि वो साथ मिलकर सरकार चलाएंगे। खैर... यही तो राजनीति है, यहां कुर्सी की खातिर कभी भी कुछ भी हो सकता है।
बिहार की महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा देने के बाद विपक्षी गठबंधन 'INDIA' में स्थिति ठीक नहीं होने का दावा करने वाले नीतीश को कुछ ही घंटों बाद NDA की नई सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में यहां राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने शपथ दिलायी। नीतीश कुमार ने कहा कि भाजपा नेता सम्राट चौधरी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री होंगे। नीतीश ने यह भी दोहराया कि वो बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। नीतीश और भाजपा नेताओं के सुर बदले हुए हैं, सियासत में ऐसा होना आम बात है।
