NEET Paper Leak 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट इन दिनों सबसे बड़े सवालों के घेरे में है। एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की नाकामी के चलते नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट-अंडरग्रैजुएट (नीट-यूजी) 2026 परीक्षा का पेपर लीक हो गया और उसका खामियाजा देश के 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों को भुगतना पड़ रहा है। इस मामले में अब तक पांच राज्यों के 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में जांच के बीच सबके मन में ये सवाल है कि बेहद सघन सुरक्षा में कराई जाने वाली परीक्षा में सेंध कैसे लगी। छात्रों से लेकर देश का हर नागरिकों के मन में सवाल है कि आखिर इस पूरी सांठगांठ का मास्टरमाइंड कौन है? राजस्थान से शुरू हुई इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे ही नई जानकारी और गिरोह के नए गुर्गे सामने आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि कैसे पेपर लीक सिंडीकेट ने इसे अंजाम दिया...
3 मई को आयोजित हुई NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के चलते इसे रद्द कर दिया गया था। शुरुआत में पेपर लीक की खबरों को अफवाह बताया गया,लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल सबूत और गिरफ्तारियां सामने आईं, पूरा मामला एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करने लगा।
NTA से ही पेपर लीक की शुरुआत
सीबीआई ने जब इस पेपर लीक की जांच शुरू की तब पता चला कि इस पुरे खेल की शुरुआत उसी एजेंसी से हुई थी जिस पर इस पेपर को कराने की जिम्मेदारी थी। सीबीआई का दावा है कि लीक की शुरुआत एनटीए की पेपर सेट करने वाली समिति से हुई। इस मामले की जांच के दौरान मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों NEET-UG 2026 के लिए पेपर तैयार करने वाली एनटीए की एक्सपर्ट्स की टीम में शामिल थीं। मनीषा बॉटनी टीचर थीं और उनके पास नीट यूजी के लिए बॉटनी और ज्यूलॉजी के पेपर का एक्सेस था। वहीं, पीवी कुलकर्णी कैमिस्ट्री सेक्शन को देखते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, मनीषा कथित तौर पर पी.वी. कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर साजिश में शामिल थीं और उन्होंने प्रश्नपत्र आरोपी शुभम तक पहुंचाया था।
पेपर से काफी समय पहले ही शुरू हो गया था खेल
NEET पेपर लीक मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। CBI के मुताबिक, परीक्षा से काफी पहले ही कुछ छात्रों तक संभावित सवाल पहुंचाए जा रहे थे। आरोप है कि पुणे में गुप्त तरीके से क्लास चलाकर छात्रों को चुनिंदा प्रश्न तैयार करवाए गए और किताबों में उनके जवाब भी चिन्हित कराए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इनमें से बड़ी संख्या में सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि लीक सामग्री को डिजिटल रूप देकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलाया गया। करीब 500 से ज्यादा सवालों वाली PDF फाइल वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स में शेयर की गई थी।
नासिक से शुरू होकर कई राज्यों तक फैला जाल
जांच में अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार पेपर लीक का नेटवर्क महाराष्ट्र के नासिक से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान और फिर देश के कई हिस्सों तक फैला। पता चला है कि नीट यूजी का पेपर सबसे पहले नासिक से बाहर निकाला गया और फिर इसे हरियाणा के जरिए राजस्थान पहुंचाया गया। इसके बाद जयपुर और जमवारामगढ़ होते हुए यह नेटवर्क सीकर तक पहुंचा, जहां से पूरे ऑपरेशन को संचालित किया गया।
सीकर से देश के अन्य राज्यों तक पहुंचा पेपर
राजस्थान का सीकर लंबे समय से देश के बड़े कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस बार यही शहर लीक पेपर के वितरण का प्रमुख केंद्र बन गया। यहां से कथित तौर पर प्रश्नपत्र या उससे जुड़ी जानकारी जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड जैसे राज्यों तक पहुंचाई गई। यह पूरा नेटवर्क डिजिटल प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड चैट और निजी संपर्कों के जरिए संचालित किया गया, ताकि किसी को भनक तक न लगे।
कौन-कौन लोग हैं नेटवर्क में शामिल?
जांच एजेंसियों का दावा है कि इतना बड़ा सिंडीकेट के पीछे कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि इसके पीछे कई स्तरों पर काम करने वाला एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। इसमें छोटे कोचिंग सेंटर चलाने वाले लोग, एजेंट, तकनीकी कर्मचारी, कंप्यूटर लैब ऑपरेटर और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग शामिल थे।
सिंडीकेट के लोग कैसे करते थे छात्रों से संपर्क
छात्रों से संपर्क करने के लिए पेपर लीक सिंडीकेट के लोग कैसे संपर्क करते थे जब इसका पता जांच के दौरान चला तो सब चौंक गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मामले में एक ब्यूटी पार्लर संचालिका का नाम भी जांच के दायरे में आया है। एजेंसी का आरोप है कि वह छात्रों और नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच संपर्क कड़ी का काम करती थी। सिंडिकेट से जुड़े लोग छात्रों और अभिभावकों को यह कहकर संपर्क करते थे कि उनके पास परीक्षा में आने वाले संभावित सवाल हैं। पेपर लीक गिरोह ने यह तरीका बेहद चालाकी से तैयार किया था। अगर मामला सामने भी आए तो आरोपी यह दावा कर सकें कि उन्होंने केवल संभावित प्रश्न उपलब्ध कराए थे। इसी बहाने लाखों रुपये वसूले गए। कई अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के दबाव में इस जाल में फंस गए, जबकि कुछ छात्र भी जल्दी सफलता पाने की लालच में इस नेटवर्क का हिस्सा बन बैठे।CBI के अनुसार, इस पेपर सेट का सौदा लाखों रुपये में हुआ। आरोप है कि सवालों के बदले मोटी रकम ली गई और बाद में उनकी प्रिंटेड कॉपियां कई लोगों तक पहुंचाई गईं।
कई राज्यों में फैले नेटवर्क में से 10 लोगों की हुई गिरफ्तार
सीबीआई ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिनमें मनीषा मंधारे पी.वी. कुलकर्णी (पुणे, महाराष्ट्र), शुभम खैरनार (महाराष्ट्र), धनंजय लोखंडे (महाराष्ट्र) मनीषा वाघमारे (महाराष्ट्र),मांगीलाल बिंवाल (राजस्थान),दिनेश बिंवाल (राजस्थान),विकास बिंवाल (राजस्थान), यश यादव (हरियाणा), कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगावकर (लातूर) शामिल हैं। ये गिरफ्तारियां दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर जैसे अलग-अलग शहरों से हुई हैं। इससे पहले 9 आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी में लिया गया था और उनसे पूछताछ जारी है।
