Himanta Biswa Sarma: हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने गुवाहाटी के खानापारा क्षेत्र में वेटरनरी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में शर्मा और चारों विधायकों को पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, सर्वानंद सोनोवाल, पबित्रा मारगेरिटा, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन मौजूद थे। असम में लगातार तीसरी बार एनडीए की सरकार बनी है। हिमंत सरमा की मां मृणालिनी देवी, पत्नी रिंकी भुइयां सरमा, पुत्र नंदिल विश्व सरमा और पुत्री सुकन्या सरमा भी समारोह में मौजूद थीं।
सीएम हिमंत की टीम से मिलिए, 4 मंत्री कौन?
उनके साथ चार विधायकों ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली जिनमें भाजपा के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली, सहयोगी दल असम गण परिषद (अगप) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो शामिल हैं। नियोग, बोरा और बोरो शर्मा के पहले मंत्रिमंडल में भी शामिल थे, वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री तेली राज्य की राजनीति में लौटे हैं। पिछली सरकार में नेओग वित्त मंत्री थीं, जबकि बोरा कृषि विभाग संभाल रहे थे और बोरो के पास परिवहन विभाग था।
दो बार सीएम बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री
हिमंत सरमा (57) असम में लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने रिकॉर्ड 102 सीटों पर जीत दर्ज की, जिनमें से 82 सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिलीं। भाजपा की सहयोगी पार्टियों असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 10-10 सीटें जीतीं।
हिमंत का ऐलान- पहला कार्यकाल तो ट्रेलर था
57 वर्षीय हिमंत ने राज्य के विकास पथ को जारी रखने का संकल्प लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल महज एक ट्रेलर था और पूरी फिल्म दूसरे कार्यकाल में सामने आएगी। विकास संबंधी पहलों, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद, उनका पहला कार्यकाल विवादास्पद उपायों और बयानबाजी से भी भरा रहा, विशेष रूप से बांग्लादेशी मूल के बंगाली भाषी मुसलमानों के मुद्दे पर वह बेहद मुखर रहे।
विपक्षी हमले के बावजूद अडिग रहे
अतिक्रमण वाली भूमि पर बेदखली अभियान, बाल विवाह पर नकेल कसना, बहुविवाह के विरुद्ध कदम, पशु संरक्षण अधिनियम का प्रवर्तन और सरकारी मदरसों को बंद करना जैसे कार्यों की विपक्षी दलों ने आलोचना की है, जो उन पर सामाजिक ध्रुवीकरण को गहरा करने का आरोप लगाते हैं। विवादों के बावजूद वे अडिग रहे, हालांकि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा उनकी पत्नी पर लगाए गए आरोपों से संबंधित एक विवाद ने तीखी बहस को जन्म दिया, जिसका जिक्र खेड़ा को राहत देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी हुआ।
कांग्रेस के आरोप रहे बेअसर
विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप बार-बार लगाए हैं और उनकी पत्नी के व्यापारिक लेन-देन पर सवाल उठाए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। पूर्वोत्तर के सबसे प्रभावशाली राजनेता माने जाने वाले हिमंत सरमा भाजपा के प्रमुख प्रचारक के रूप में उभरे और 126 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी की 82 सीटों पर शानदार जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके भाषणों की आलोचना करते हुए उन्हें विभाजनकारी और संवैधानिक पदधारी के लिए अशोभनीय बताया है।
1996 में अपने पहले चुनाव में हारने के बाद हिमंत सरमा 2001 से लगातार जलुकबारी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कांग्रेस और भाजपा दोनों के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर चुके हैं। 2001 से लगातार सरकारों में मंत्री रहे सरमा ने प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक रणनीति के लिए ख्याति अर्जित की है।
