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अब सिर्फ आधार कार्ड दिखाने से Nepal में नहीं मिलेगी एंट्री, साथ रखें ये दस्तावेज; अचानक क्यों बदले नियम?

India Nepal New Border Rule: नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद सीमा विवाद को लेकर तनाव बढ़ता दिख रहा है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में दावा किया है कि भारत और नेपाल दोनों ने एक-दूसरे की जमीनों पर अतिक्रमण किया है, जिसे भारत लगातार खारिज करता रहा है। इसी कूटनीतिक गरमा-गरमी के बीच भारत-नेपाल सीमा (किशनगंज/ठाकुरगंज क्षेत्र) पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अब केवल आधार कार्ड दिखाकर नेपाल में एंट्री नहीं मिलेगी। आइए समझते हैं कि आखिर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद है क्या।

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भारत-नेपाल बॉर्डर पर अब 'आधार' कार्ड क्यों नहीं है काफी? जानिए एंट्री का नया नियम। AI IMAGE

India Nepal New Border Rule: नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद भारत को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे। हालांकि, प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अब तक कई बार ऐसे बयान दिए हैं, जो भारत को बिल्कुल रास नहीं आए हैं।

हाल ही में नेपाली संसद के निचले सदन में उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत, दोनों ने एक-दूसरे की जमीनों पर अतिक्रमण किया है। हालांकि, बालेन शाह के इस बयान की उनके ही देश में काफी आलोचना हो रही है। इसी बीच भारत-नेपाल सीमा (किशनगंज/ठाकुरगंज क्षेत्र) पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।

दरअसल, अब किसी भी नागरिक को बिना वैध सरकारी पहचान पत्र के नेपाल सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। काठमांडू के मेयर बालेन शाह की ओर से जारी आदेशों और सुरक्षा संबंधी नई गाइडलाइंस के बाद इंडो-नेपाल सीमा के गलगलिया बॉर्डर सहित अन्य चेकपोस्टों पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) और सुरक्षा एजेंसियों ने चौकसी तथा जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

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भारत-नेपाल बॉर्डर की फाइल फोटो। istock

केवल आधार कार्ड मान्य नहीं

इस नए नियम के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब सीमा पार करने के लिए केवल आधार कार्ड को पर्याप्त दस्तावेज नहीं माना जाएगा। जांच अधिकारियों के मुताबिक, अब सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर कोई भी व्यक्ति सीमा पार नहीं कर सकेगा और न ही नेपाल में प्रवेश कर पाएगा।

साथ रखें ये वैध दस्तावेज

सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि नेपाल जाने या वहां से आने वाले यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को अपने साथ निम्नलिखित वैध सरकारी पहचान पत्र रखने होंगे, जिनके बिना प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • वोटर आईडी कार्ड (मतदाता पहचान पत्र)
  • पासपोर्ट
  • अन्य कोई भी वैध और अधिकृत सरकारी पहचान पत्र
  • अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की तैयारी
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भारत नेपाल सीमा पर सुरक्षा और कड़ी कर दी गई। AI IMAGE

अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में उभरी सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। प्रतिदिन सीमा से गुजरने वाले प्रत्येक व्यक्ति के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

प्रशासन और सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती व्यापारियों, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपने साथ हमेशा वैध पहचान पत्र रखें। अन्यथा, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

बालेन शाह ने सीमा विवाद पर क्या-क्या कहा?

इससे पहले संसद में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए बालेन शाह ने कहा, "प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगह भारत की जमीन पर कब्जा किया है।" उन्होंने कहा कि नेपाल ने चीन और यूनाइटेड किंगडम के साथ भी यह मुद्दा उठाया है। शाह ने कहा, "हमने न केवल भारत और चीन से बात की है, बल्कि यूके सरकार से भी बात की है।"

उन्होंने आगे कहा, "हमारा मानना है कि यूके को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा उस समय का है, जब ब्रिटिश भारत ने इस क्षेत्र को छोड़ा था।" नेपाली प्रधानमंत्री की ये टिप्पणियां कालापानी-लिम्पियाधुरा-लिपुलेख क्षेत्र से जुड़े विवाद पर चर्चा के दौरान आईं। वहीं, भारत नेपाल के इन दावों को लगातार खारिज करता रहा है।

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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन साहा की फाइल फोटो। ANI

जब 2020 में उठा था लिपुलेख और लिम्पियाधुरा का मामला

भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद ने साल 2020 में जोर पकड़ा था। इसी वर्ष भारत ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इस नक्शे में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने हिस्से के रूप में दिखाया गया था। भारत का दावा है कि ये इलाके उसके हैं।

नेपाल ने इस पर तीखी आपत्ति जताई और कहा कि भारत को अपना नक्शा बदलना चाहिए, क्योंकि कालापानी उसका क्षेत्र है। नेपाल का दावा है कि ये सभी हिस्से उसके हैं। इसके लगभग पांच महीने बाद, मई 2020 में लिपुलेख को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया। भारत द्वारा नक्शा जारी किए जाने के बाद नेपाल ने भी अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया।

नेपाल सरकार का आरोप है कि भारत ने उसके दावे वाले लिपुलेख क्षेत्र में 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया है। वहीं, भारत लगातार नेपाल के इन दावों को खारिज करता रहा है और कहता आया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं।

Piyush Kumar
पीयूष कुमार author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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