दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे पर्यावरणविद शिक्षाविद सोनम वांगचुक को हटाना दिल्ली पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। पुलिस को 'सीक्रेट ऑपरेशन' की रणनीति बेहद सटीक और गोपनीय रखनी थी। खाकी को प्रदर्शनकारियों की संख्या कम होने का इंतजार करना था और मुख्य सहयोगियों की गैरमौजूदगी का लाभ उठाना था। तो शनिवार की सुबह महज 30-35 पुलिसकर्मियों और तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे के साथ पुलिस ने बिना किसी हंगामे के वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल पहुंचा दिया। आखिर क्या थी दिल्ली पुलिस की यह थ्री-लेयर रणनीति और इसे इतनी गोपनीयता से क्यों अंजाम दिया गया?
नए पुलिस आयुक्त के कार्यभार संभालते ही एक्शन
दरअसल, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के एक सुनियोजित ऑपरेशन चलाया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नए पुलिस आयुक्त के कार्यभार संभालने के बाद हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस कार्रवाई की रणनीति तैयार की गई थी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने सुबह के उस समय को चुना जब प्रदर्शनकारियों की संख्या सबसे कम थी। साथ ही, वांगचुक के करीबी सहयोगी अभिजीत दीपके के कुछ देर के लिए प्रदर्शन स्थल से बाहर जाने के समय का भी इंतजार किया गया, ताकि मंच पर समन्वय करने वाला प्रमुख व्यक्ति मौजूद न रहे। करीब 30 से 35 पुलिसकर्मी, जिनमें नई दिल्ली जिले की स्पेशल स्टाफ और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल थे, सादे कपड़ों में बैरिकेड वाले प्रदर्शन स्थल में दाखिल हुए। सूत्रों का कहना है कि पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय रखी गई थी और इसकी पूरी जानकारी केवल चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों को ही थी। पुलिसकर्मियों ने पहले सोनम वांगचुक के बिस्तर को चारों ओर से बड़े सफेद कपड़ों से ढक दिया और फिर उन्हें चुपचाप मंच से हटाकर एंबुलेंस तक ले जाया गया, ताकि भीड़ इकट्ठा न हो और कोई हंगामा न हो।
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ऑपरेशन तीन लेयर
सूत्रों के मुताबिक, यह ऑपरेशन तीन लेयर में चलाया गया। पहली लेयर में सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने मंच को सुरक्षित कर वांगचुक को हटाया। दूसरी लेयर में CRPF और RAF के जवानों ने बैरिकेड के बाहर प्रदर्शनकारियों को रोके रखा ताकि किसी तरह का टकराव न हो। तीसरी लेयर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एंबुलेंस और पुलिस वाहनों के पास बने कंट्रोल प्वाइंट से पूरी कार्रवाई की निगरानी करते रहे।
वांगचुक को एंबुलेंस में बैठाए जाने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर जैसा रास्ता सुनिश्चित किया, जिससे एंबुलेंस बिना किसी बाधा के सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुंच गई। कार्रवाई पूरी होने के कुछ देर बाद अभिजीत डिपके प्रदर्शन स्थल पर लौटे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गैरमौजूदगी में सोनम वांगचुक को हटाया गया। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वे भूख हड़ताल जारी रखकर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से और अधिकतम संयम के साथ की गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर स्थल को शांतिपूर्वक खाली करने की भी अपील की।
कैसी है सोनम की तबीयत?
दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ने शनिवार को कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय तक भूखे रहने और शरीर में पानी की कमी के कारण कमजोर हो गए हैं, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। जंतर-मंतर पर शनिवार सुबह वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस उन्हें सरकारी अस्पताल ले गई। पुलिस ने इसके लिए चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला दिया।
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि सोनम वांगचुक लंबे समय तक भूखे रहने और निर्जलीकरण के कारण कमजोर हो गए हैं। हालांकि, फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी, देखभाल और उपचार की आवश्यकता है। बयान के अनुसार, वांगचुक को शनिवार सुबह सात बजकर 40 मिनट पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वांगचुक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं और इस विवाद से जुड़े विद्यार्थियों की मौतों के मामलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में जारी विरोध प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
पिछले तीन सप्ताह के दौरान उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को चिकित्सकों ने बताया था कि भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम घट गया है। साथ ही उनके रक्तचाप और रक्त शर्करा के स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
