Strait of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट तेल समृद्ध देशों को जोड़ने वाला एकमात्र समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी (पश्चिम) ओमान की खाड़ी और अरब सागर (दक्षिण-पूर्व) से घिरी हुई है। ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य खूब चर्चा में रहा। युद्ध से पहले शायद कई लोगों ने इसका नाम भी कभी नहीं सुना होगा, लेकिन अब यह बेहद चर्चित हो गया है। होर्मुज की भौगोलिक विशेषताओं क्या-क्या हैं,यह कितना गहरा, चौड़ा और पुराना है, इसे लेकर आपको कुछ खास जानकारी दे रहे हैं।
इतिहास हजारों साल पुराना
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इतिहास हजारों साल पुराना है। प्राचीन काल से ही यह एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग रहा है, जिसने मेसोपोटामिया, सिंधु घाटी और अन्य प्राचीन सभ्यताओं को जोड़ा। तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व से ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग व्यापार के लिए किया जाता रहा है। तांबा, मसाले, मोती और अन्य कीमती वस्तुओं का व्यापार यहां से होता था।
विभिन्न साम्राज्यों का नियंत्रण
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर विभिन्न साम्राज्यों ने नियंत्रण स्थापित किया, जिनमें अकादियन, बेबीलोनियन, असीरियन, फारसी और अरब शामिल हैं। प्रत्येक साम्राज्य ने इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव छोड़ा। 16वीं शताब्दी में, पुर्तगालियों ने हॉर्मुज पर नियंत्रण कर लिया और इसे एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र में बदल दिया। बाद में, ब्रिटिश और डच भी इस क्षेत्र में सक्रिय हो गए। आधुनिक युग यानी 20वीं शताब्दी में तेल की खोज के साथ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का महत्व और बढ़ गया।

होर्मुज पर किसका नियंत्रण?(AP)
कितना गहरा-चौड़ा है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की औसत गहराई लगभग 40 से 60 मीटर है। हालांकि, इसके सबसे गहरे हिस्से लगभग 90 से 110 मीटर तक गहरे हैं, खासकर ईरानी तट के पास। यह एक संकरा मार्ग है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य इतना गहरा है कि यहां कच्चे तेल के बड़े-बड़े सुपरटैंकर आसानी से चल सकते हैं, जो इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग बनाता है। वहीं, ईरानी तट के पास, कुछ क्षेत्र 15-30 मीटर जितने उथले हैं। इसकी चौड़ाई सबसे संकरे स्थान पर लगभग 33-39 किलोमीटर है।
सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्ग
यह जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जहां से हर दिन बड़ी संख्या में तेल टैंकर गुजरते हैं। यहां से विश्व का कुल 20 फीसदी तेल का आवागमन होता है। भारत का 60 फीसदी तेल-गैस इसी होर्मुज रूट से आता है। युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज पर कंट्रोल कर लिया और कई देशों में तेल-गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई।
रोजना करीब 138 जहाज होर्मुज से गुजरते हैं
फिलहाल फारस की खाड़ी में लगभग 700 टैंकर, मालवाहक पोत और कंटेनर जहाज मौजूद हैं। यह आंकड़ा 1 अप्रैल, 2026 तक स्वचालित पहचान प्रणाली के आंकड़ों पर आधारित है। संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र के अनुसार, सामान्यतः रोजाना लगभग 138 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं ।

होर्मुज से कितने जहाजों की आवाजाही (AP)
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एकमात्र समुद्री लिंक
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का यह एकमात्र समुद्री लिंक है, जो अरब प्रायद्वीप को ईरान से अलग करता है। पिछले करीब 3000 साल से इसका भूगोल लगभग स्थिर है और इसकी सबसे कम चौड़ाई महज 33 किलोमीटर (21 मील) है। जहाजों के आने-जाने के लिए उपलब्ध रास्ता और भी संकरा है जो इसे बेहद खतरनाक बनाता है।
रास्ते को चौड़ा क्यों नहीं किया जाता?
तो फिर इस रास्ते को चौड़ा क्यों नहीं किया जाता...इसका सबसे बड़ा कारण इसकी प्राकृतिक संरचना है। होर्मुज के दोनों ओर बड़ी-बड़ी पहाड़ी श्रृंखलाएं और डूबी हुई चट्टानें मौजूद हैं। ईरान की ओर जाग्रोस पर्वत की श्रृंखलाएं सीधे समंदर में उतरती हैं। वहीं, ओमान की ओर मुसंदन प्रायद्वीप की नुकीली चट्टानें भी खड़ी हैं। इन चट्टानों को काटना इतना महंगा और जटिल काम है कि अर्थव्यवस्था ही चरमरा सकती है।
