US-Canada Trade War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। नए शुल्क से करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान प्रभावित होने की आशंका है। कनाडा ने भी अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया है। ऐसे में दोनों पड़ोसी देश एक बार फिर व्यापार युद्ध के रास्ते पर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
50% टैरिफ का मतलब क्या है?
टैरिफ किसी दूसरे देश से आयात होने वाले सामान पर लगाया जाने वाला शुल्क है। इसे विदेशी कंपनी सीधे अमेरिकी सरकार को नहीं देती, बल्कि अमेरिका में सामान आयात करने वाला कारोबारी यह शुल्क चुकाता है। इसके बाद बढ़ी हुई लागत का कुछ या पूरा हिस्सा अक्सर ग्राहकों तक पहुंचता है। इस मामले में अमेरिका ने कनाडा के कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया है। यानी यदि कोई कनाडाई उत्पाद अमेरिका में 100 डॉलर के मूल्य का है और उस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो आयातक को 50 डॉलर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।
हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि हर कनाडाई सामान अमेरिकी बाजार में सीधे 50 प्रतिशत महंगा हो जाएगा। कीमत पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां अतिरिक्त लागत को खुद वहन करती हैं, ग्राहकों पर डालती हैं या कनाडाई आपूर्तिकर्ताओं से कीमत कम करवाती हैं।
किन कनाडाई सामानों पर असर पड़ेगा?
नए टैरिफ का दायरा काफी बड़ा है। इसके तहत हॉकी स्टिक, शराब और सीमेंट जैसे उत्पादों के अलावा कई कृषि और उपभोक्ता सामान शामिल हैं। व्हाइट हाउस की सूची के अनुसार, प्रभावित उत्पादों में शहद, बीज, कृषि उत्पाद, कुछ कॉस्मेटिक्स और परफ्यूम, कपड़े, आभूषण, फर्नीचर, कैमरे और कपड़ा उत्पाद भी शामिल हैं। कनाडा अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। पिछले साल कनाडा के कुल माल निर्यात का करीब 72 प्रतिशत अमेरिका गया था। इसलिए भले ही नए टैरिफ कनाडा के कुल अमेरिकी निर्यात के लगभग 5 प्रतिशत हिस्से को सीधे प्रभावित करें, लेकिन दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसका राजनीतिक और कारोबारी महत्व काफी ज्यादा है।
आखिर ट्रंप ने इतना बड़ा टैरिफ क्यों लगाया?
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से कनाडा की व्यापार नीतियों को अमेरिका के लिए अनुचित बताते रहे हैं। उनका आरोप है कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों, खासकर डेयरी, शराब और कुछ अन्य वस्तुओं के साथ भेदभाव करता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ को अमेरिका के कारोबारी हितों की रक्षा और कनाडा पर दबाव बनाने के एक तरीके के रूप में पेश किया है। पिछले साल लगाए गए अमेरिकी शुल्कों के जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान पर जवाबी शुल्क लगाए थे। ट्रंप ने उस प्रतिक्रिया को भी अपने फैसले के समर्थन में इस्तेमाल किया।
ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाने के लिए कौन सा कानून इस्तेमाल किया?
इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि ट्रंप ने 1930 के टैरिफ अधिनियम की धारा 338 का इस्तेमाल किया है। जब अमेरिका महामंदी से गुजर रहा था तब कांग्रेस ने 1930 में व्यापक "स्मूट-हॉली" कानून (जिसका नाम इसके कांग्रेसी प्रायोजकों के नाम पर रखा गया था) के हिस्से के रूप में यह कानून पारित किया। इस अधिनियम ने सभी वस्तुओं पर टैरिफ में व्यापक वृद्धि की और विश्व व्यापार को सीमित करने तथा महामंदी को और भी बदतर बनाने के लिए अर्थशास्त्रियों के बीच कुख्यात हो गया।उसी दौर के व्यापक टैरिफ कानूनों को बाद में वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाने और महामंदी को और गंभीर बनाने वाले कदमों से जोड़ा गया। धारा 338 अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों से आयात पर ऊंचा शुल्क लगाने की शक्ति देती है, जिन पर अमेरिकी कारोबार के साथ भेदभाव करने का आरोप हो। इस प्रावधान का इस तरह बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने का कोई मजबूत आधुनिक उदाहरण नहीं है।
पिछले महीने प्रस्तावित टैरिफ की घोषणा करते हुए, ट्रंप ने दावा किया था कि कनाडा अमेरिका से आने वाली कारों, शराब और डेयरी उत्पादों के निर्यात के साथ अनुचित भेदभाव कर रहा है। राष्ट्रपति ने पिछले साल अपने टैरिफ के खिलाफ कनाडा की जवाबी कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की और बताया कि अमेरिकी शराब और कारों का कनाडाई आयात पिछले वसंत से कम होने लगा था। यही वजह है कि नए टैरिफ के खिलाफ कानूनी चुनौती की संभावना भी बनी हुई है। खास बात यह है कि इस प्रावधान में शुल्क लागू करने के लिए किसी विस्तृत जांच की स्पष्ट आवश्यकता नहीं है और इसकी कोई निश्चित समयसीमा भी निर्धारित नहीं है।
ऐसे में क्या है कनाडा का रुख ?
ट्रंप के इस व्यापार युद्ध के एलान के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी अमेरिकी कदम का जवाब देने का ऐलान किया है। कनाडा की जवाबी कार्रवाई 8 सितंबर से शुरू होने की घोषणा की गई है। इसमें अमेरिका से आने वाले इस्पात, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, लुगदी और कागज तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सामानों को निशाना बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर अमेरिका अपने टैरिफ में काफी कमी करता है, तो कनाडा इस्पात, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल पर बचे हुए जवाबी टैरिफ हटाने और प्रांतों को अमेरिकी शराब की बिक्री बहाल करने के लिए प्रोत्साहित करने को तैयार है। लेकिन वाशिंगटन की अंतिम मांगें हद से ज्यादा थीं। इस दौरान कॉर्नी ने वाशिंगटन पर "आर्थिक एकीकरण को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने" का आरोप लगाया और कहा कि कनाडा पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नवीनतम टैरिफ से "हमला" हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके देश के पास जवाबी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त भंडार और लचीलापन है।और बढ़ सकता है व्यापार युद्ध?
अब जबकि अमेरिका और कनाडा में टैरिफ पर वार पलटवार शुरू हो गया है तो व्यापार युद्ध का खतरा बढ़ता दिखता है। अमेरिका ने कनाडा पर टैरिफ बढ़ाया, कनाडा ने जवाबी शुल्क लगाने का ऐलान किया और ट्रंप के शीर्ष व्यापार वार्ताकार जैमीसन ग्रीर ने भी कनाडा की कार्रवाई के जवाब में अतिरिक्त अमेरिकी कदम उठाने की चेतावनी दी है। ऐसे में अगर यह सिलसिला जारी रहता है, तो स्थिति टैरिफ बढ़ाने और जवाबी टैरिफ लगाने के चक्र में बदल सकती है। इसका असर सिर्फ दोनों देशों की सरकारों तक सीमित नहीं रहेगा। सीमा पार सामान भेजने वाली कंपनियों की लागत बढ़ेगी, सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कुछ उत्पाद अमेरिकी तथा कनाडाई बाजारों में महंगे हो सकते हैं।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अब इस टैरिफ का असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। इसे सरल शब्दों में समझें तो ऐसे कि मान लीजिए कोई अमेरिकी कंपनी कनाडा से कोई उत्पाद 100 डॉलर में आयात करती है। यदि उस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगता है, तो उसकी लागत बढ़कर 150 डॉलर के आसपास हो सकती है, अन्य खर्चों को छोड़कर। कंपनी के पास फिर तीन विकल्प होंगे वह अतिरिक्त लागत खुद उठाए, कनाडाई सप्लायर से कीमत घटवाए या ग्राहक के लिए कीमत बढ़ा दे। इसी वजह से टैरिफ से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा जिन कंपनियों का कारोबार कनाडा और अमेरिका के बीच सीमा पार व्यापार पर निर्भर है, उन्हें ऑर्डर घटने, उत्पादन कम करने या कर्मचारियों को लेकर अनिश्चितता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
USMCA का भविष्य क्यों चर्चा में है?
अमेरिका कनाडा के बीच इस व्यापारिक जंग के बाद से USMCA के भविष्य को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच USMCA (United States-Mexico-Canada Agreement) पहले से मौजूद व्यापार समझौता है। इसका उद्देश्य तीनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना है। नए टैरिफ इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कुछ ऐसे उत्पाद भी शुल्क के दायरे में आ रहे हैं जिन्हें पहले USMCA के तहत संरक्षण प्राप्त था। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर तीनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की व्यावहारिक अहमियत कितनी रह गई है?