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गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह और ईरान की मिसाइलों से...7 मोर्चों कैसे जंग लड़ रहा इजराइल? क्या शुरू होगी 'वर्ल्ड वार-3'

Iran Israel Conflict:इजराइल एक साथ 7 मोर्चे पर जंग लड़ रहा है। एक गाजा में हमास के खिलाफ, दूसरी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ, तीसरी यमन में हूती विद्रोहियों से और मिडिल ईस्ट में सीरिया, इराक और ईरान के साथ इसके अलावा वेस्ट बैंक में भी। हालांकि, इजराइल अब तक सभी मोर्चों पर भारी पड़ा है।

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इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू।

Photo : ANI

Iran Israel Conflict: 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने इजराइल पर हमला किया तो दुनिया को यह अंदाजा नहीं था कि यह जंग इतनी भयावह हो जाएगी। हमास के बाद हिजबुल्लाह, ईरान, हूती जैसे इजराइल के दुश्मनों ने एक-एककर उस पर हमले किए और व्यापक युद्ध की आहट पूरे पश्चिम एशिया में सुनाई देने लगी। हालांकि, इजराइल अब तक सभी मोर्चों पर भारी पड़ा है।

बीते महीने जब ईरान इस जंग में कूदा तो स्थिति और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। 27 सितंबर को ईरान ने इजराइल पर करीब 200 रॉकेट और मिसाइलें दागीं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से इजराइल को निशाना बनाया। ईरान की तरफ से यह हमला हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लहा की मौत का बदला लेने के लिए किया गया। हालांकि, इजराइल ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया और इसमें अमेरिका और ब्रिटेन ने उसकी मदद की।

एक साथ 7 जंग लड़ रहा इजराइल

इजराइल एक साथ 7 मोर्चे पर जंग लड़ रहा है। एक गाजा में हमास के खिलाफ, दूसरी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ, तीसरी यमन में हूती विद्रोहियों से और मिडिल ईस्ट में सीरिया, इराक और ईरान के साथ इसके अलावा वेस्ट बैंक में भी। भारत में पूर्व इजराइली राजदूत डैनियर कार्मन का कहना है कि यह एक असंभव स्थिति है, लेकिन हम प्रबंल हैं क्योंकि हमारे पास क्षमताएं हैं। हमारे पास अच्छी सेना, रक्षा प्रणाली, वायु रक्षा प्रणाली और ताकतवर साझेदार हैं, जिन्होंने हमारी मदद की।

तीसरे विश्व युद्ध की आहट!

मिडिल ईस्ट में छिड़ी सीमित जंग कब व्यापक होगी, इसके कयास लगाना मुश्किल है। हालांकि, ईरान के युद्ध में कूद पड़ने से इसकी संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने पहली बाद खुलकर इजराइल का साथ दिया और ईरान की मिसाइलों को मार गिराने में उसकी मदद की। ऐसा ही दावा ब्रिटेन ने भी किया है। ऐसे में अगर यह जंग व्यापक रूप लेती है तो इजराइल की तरफ अमेरिका और ब्रिटेन जैसे ताकतवर यूरोपीय देश खड़े मिलेंगे। वहीं, दूसरी तरफ ईरान जंग का अगुआ बनता है तो उसे कतर, इराक, यमन, लेबनान जैसे मुस्लिम देशों का साथ मिल सकता है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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