India-Belgium defence ties: बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में अहम समझौते हुए हैं। बेल्जियम के साथ जो समझौते हुए हैं उनमें हथियारों के साथ-साथ ड्रोन, समुद्री सुरक्षा, माइन्स हटाने वाली तकनीक, रडार, गोला-बारूद और दूसरे डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के लिए ये समझौते बेहद अहम माने जा रहे हैं। यही नहीं भारत-बेल्जियम के बीच आपसी व्यापार को अगले पांच वर्षों में बढ़ाकर दोगुना यानी 26 अरब डॉलर करने की बात कही गई है। अभी दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार करीब 13 अरब डॉलर का है लेकिन हम यहां व्यापार के बारे में नहीं रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए हुए समझौते के बारे में चर्चा करेंगे। बेल्जियम के साथ भारत के रिश्ते की अगर बात करें तो दोनों देशों के रिश्ते आजादी के समय से हैं। 1947 में भारत जब आजाद हुआ तो नई दिल्ली को मान्यता देने वालों में बेल्जियम भी शामिल था। तब से इस यूरोपीय देश के साथ भारत के संबंध हैं लेकिन अगले दशकों तक आपसी रिश्ते सामान्य बने रहे लेकिन संबंधों में अब एक रवानगी देखी जा रही है।
छोटे हथियार बनाने में महारत रखते हैं यूरोप के देश
डिफेंस के क्षेत्र में यदि छोटे हथियारों के बारे में बात करें तो यूरोप के कई देश इसमें महारत रखते हैं। पिस्टल, राइफल, हैंडगन, कारतूस जैसे छोटे हथियार बनाने में जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक और बेल्जियम का कोई मुकाबला नहीं है। सटीकता और गुणवत्ता के मामले में ये हथियार विश्व स्तरीय माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के जवान बेल्जियम में बने एफएन एफ2000 राइफल का इस्तेमाल करते हैं। यह राइफल बेल्जियम की कंपनी फैब्रिक नेशनेल बनाती है। इससे छोटे हथियार और राइफल निर्माण में बेल्जियम की विशेषज्ञता समझी जा सकती है। समझौते के बाद अब भारत और बेल्जियम दोनों मिलकर राइफल और छोटे हथियारों का निर्माण करेंगे। बेल्जियम अपनी तकनीक भी साझा करेगा।
यूरोप के देशों के पास है क्रिटिकल टेक्नॉलजी
यूरोप के देशों के पास डिफेंस क्षेत्र की क्रिटिकल टेक्नॉलजी हैं। हथियारों के निर्माण में ये टेक्नॉलजी बेहद अहम है। भारत, डील के जरिए धीरे-धीरे ये तकनीक तो हासिल करना ही चाहता है, वह यह भी चाहता है कि ये टेक्नॉलजी पाकिस्तान तक नहीं पहुंचें। इटली के बाद बेल्जियम ने भी भारत को भरोसा दिया है कि वह पाकिस्तान को अपनी क्रिटिकल टेक्नॉलजी शेयर नहीं करेगा। पाकिस्तान के खिलाफ भारत की यह बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता है। एक जमाने में अपने हथियारों एवं टेक्नॉलजी से पाकिस्तान की मदद करने वाले यूरोप के देशों को समझाने में भारत सफल हो रहा है। यूरोप के देशों को भी आज लगता है कि भविष्य भारत के साथ है न कि पाकिस्तान के साथ। उन्हें इस बात का अहसास हो चुका है कि पाकिस्तान कुछ देने और लौटाने की हालत में नहीं है।
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गोला-बारूद का उत्पादन
बेल्जियम के लीएज स्थित मशीनरी निर्माता न्यू लाचाउसी ने ने टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के साथ समझौता किया है। इसके तहत दो प्रकार की कैलिबर वाली गोलियों के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड प्रति वर्ष होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 5 करोड़ यूरो है। संयंत्र की स्थापना और इसकी डिलीवरी 2028 और 2029 में निर्धारित है। न्यू लाचाउसी स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और आधुनिकीकरण में भी सहायता देगा। इससे दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय तक औद्योगिक सहयोग की संभावना बनेगी।
माइन वॉरफेयर यानी समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटना
रणनीतिक रूप से इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण समझौता एक्सेल बेल्जियम और लार्सन एंड टुर्बो (L&T) के बीच हुआ है। L&T भारत के माइन-काउंटरमेजर वेसल (MCMV) कार्यक्रम के लिए बोली लगा रही है। समझौते के तहत एक्सेल ऐसे स्वायत्त सिस्टम या ‘टूलबॉक्स’ उपलब्ध कराएगा, जिनका इस्तेमाल समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने, उनकी पहचान करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए किया जाएगा। भारत के इस कार्यक्रम के पहले चरण में 12 जहाज शामिल हैं। हालांकि, भविष्य में यह जरूरत बढ़कर 59 जहाजों तक पहुंच सकती है। बेल्जियम सरकार के मुताबिक, भारत के साथ भविष्य के सहयोग के लिए समुद्री सुरक्षा सबसे संभावनाशील क्षेत्रों में से एक है। इसमें माइन-काउंटरमेजर सिस्टम, स्वायत्त समुद्री प्रणालियां, अंडरवाटर रोबोटिक्स, एडवांस्ड सेंसर और बंदरगाहों, पाइपलाइनों तथा समुद्र के नीचे बिछी डेटा केबल जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा शामिल है।
बेल्जियम के रॉकेट अब भारत में बनेंगे
एक अन्य महत्वपूर्ण समझौते के तहत थेल्स बेल्जियम और कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम भारत में 70 मिमी रॉकेटों की असेंबली के लिए सहयोग करेंगे। पूरी तरह भारत में निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है। इस व्यवस्था से थेल्स को अपने अंतरराष्ट्रीय ऑर्डरों के लिए एक अतिरिक्त उत्पादन केंद्र मिलेगा, जबकि भारत इस हथियार प्रणाली के निर्माण की अपनी घरेलू क्षमता विकसित कर सकेगा।
FN Herstal भारत में उत्पादन की संभावनाएं तलाशेगा
बेल्जियम की प्रमुख छोटे हथियार निर्माता कंपनी FN Herstal ने कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम के साथ भारत में संयुक्त उत्पादन केंद्र स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने के लिए समझौता किया है। प्रस्तावित केंद्र में FN के हथियारों, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का निर्माण किया जा सकता है।
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बेल्जियम की काउंटर-ड्रोन तकनीक
बेल्जियम की कंपनी Sol.One ने डीजीवीके एंटरप्राइजेज के साथ साझेदारी की है। इसके तहत उसकी साबोटेउर ड्रोन और बुजकिल एवं हित्चिकर इंटरसेप्टर प्रणालियों को भारतीय बाजार में पेश किया जाएगा। भारतीय सशस्त्र बल इन प्रणालियों के बारे में जानकारी मांग चुके हैं और इनके परीक्षण किए जाने की उम्मीद है। अगर ये सिस्टम सैन्य जरूरतों पर खरे उतरते हैं, तो बेल्जियम सरकार के मुताबिक, इससे बड़े ऑर्डर का रास्ता खुल सकता है।
अर्जुन टैंक के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स
ओआईपी सेंसर सिस्टम ने इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड के साथ अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम पर सहयोग का समझौता किया है। OIP इससे पहले अर्जुन Mk-I के लिए 130 से अधिक साइट्स उपलब्ध करा चुकी है। वहीं अर्जुन Mk-II के लिए बेल्जियम की कंपनी ने एक नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है, जो लेजर-गाइडेड मिसाइलों को लॉन्च करने में सक्षम है। बेल्जियम सरकार के मुताबिक, यह नया समझौता भारत के बख्तरबंद प्लेटफॉर्म के भविष्य के अपग्रेड और संभावित रूप से नई पीढ़ी के लड़ाकू वाहनों के विकास का रास्ता खोल सकता है।
