UNGA World Map Resolution: संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य पूरी दुनिया में इस्तेमाल हो रहे नक्शे की भौगोलिक गड़बड़ियों को सुधारना है। टोगो (Togo) द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद वैश्विक मानचित्र पर विभिन्न महाद्वीपों के वास्तविक आकार को सही और समान अनुपात में दर्शाना है।
एपी और पीटीआई के मुताबिक 193 सदस्यों वाली महासभा में इस प्रस्ताव के समर्थन में 164 देशों ने मतदान किया। भारत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि अमेरिका ने अकेले इसके खिलाफ वोट डाला। इसके अलावा एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोलदोवा, सर्बिया और यूक्रेन जैसे 6 देश मतदान से दूर रहे।

(Photo: X/@AfricanUnionUN)
आखिर मर्केटर मैप (Mercator Projection) के साथ क्या समस्या है?
वर्तमान में दुनिया के स्कूलों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों, मीडिया और किताबों में जो नक्शा हम देखते हैं, उसे 'मर्केटर प्रोजेक्शन' कहा जाता है। इसे 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने समुद्री जहाजों के दिशा तय करने के लिए डिजाइन किया था। चूंकि पृथ्वी गोल है और नक्शा चपटा होता है, इसलिए मर्केटर ने जहाजों को सही दिशा दिखाने के लिए कोणों को तो सही रखा, लेकिन इससे भूमध्य रेखा से दूर स्थित उत्तर और दक्षिण के इलाकों का आकार काफी फैल गया।
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इस नक्शे की सबसे बड़ी खामी यह है कि यह अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के विशाल महाद्वीपों को उनकी वास्तविक तुलना में काफी छोटा दिखाता है। उदाहरण के लिए, मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका महाद्वीप लगभग एक ही आकार के दिखाई देते हैं, जबकि असलियत में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है। इसी तरह उत्तर अमेरिका और यूरोप के आकार को उनकी वास्तविक सीमा से कहीं ज्यादा बड़ा दिखाया जाता रहा है।

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'इक्वल अर्थ' नक्शा और UNGA का नया फैसला
संयुक्त राष्ट्र में पारित प्रस्ताव 'करेक्ट द मैप' (Correct the Map) में कहा गया है कि सदियों से चली आ रही इस मानचित्रिक गड़बड़ी का ऐतिहासिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और भू-राजनीतिक असर पड़ा है। इसने दुनिया के प्रति एक असंतुलित दृष्टिकोण पैदा किया है।
प्रस्ताव में 'इक्वल अर्थ' (Equal Earth) प्रोजेक्शन का समर्थन किया गया है, जो 2018 में विकसित किया गया था। यह नया नक्शा पृथ्वी की गोलाई और महाद्वीपों के वास्तविक आकार का सही अनुपात बनाए रखता है। टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी के अनुसार, नक्शे केवल भूगोल नहीं बताते, बल्कि ये हमारी शिक्षा और वैश्विक धारणा को दिशा देते हैं। यूएन ने साफ किया है कि यह प्रस्ताव किसी पर नए नक्शे को जबरन नहीं थोपता, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और सरकारों को इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
भारत ने समर्थन में वोट क्यों दिया और क्या रखी शर्त?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रथम सचिव राघू पुरी ने भारत का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि भारत इस प्रस्ताव की मंशा का स्वागत करता है। भारत का मानना है कि नक्शे समाज को दुनिया का सही पैमाना समझाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, भारत ने एक तकनीकी स्पष्टीकरण भी दिया। भारत ने कहा कि इस प्रस्ताव का मतलब 'इक्वल एरिया' (Equal Area) नक्शों के व्यापक इस्तेमाल का समर्थन करना है, न कि केवल 'इक्वल अर्थ' या किसी एक खास नक्शे को बढ़ावा देना।
राघू पुरी ने कहा कि अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग नक्शों की जरूरत होती है और कोई भी एक नक्शा हर जगह सही नहीं बैठ सकता। इसलिए, इस प्रक्रिया को तकनीकी रूप से तटस्थ रखा जाना चाहिए ताकि देश अपनी जरूरत के हिसाब से सही प्रोजेक्शन चुन सकें।
अमेरिका ने विरोध क्यों किया और पाकिस्तान का रुख क्या रहा?
दूसरी तरफ, अमेरिका ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे समय की बर्बादी करार दिया। यूएन में अमेरिकी प्रतिनिधि यारीना फेरेंसेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय शांति, समृद्धि और वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय 16वीं सदी के नक्शों और 'वैचारिक एजेंडे' पर बहस कर रहा है। अमेरिका का कहना था कि ऐसे प्रस्तावों से संयुक्त राष्ट्र अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।
वहीं, पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान तो किया, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि यह प्रस्ताव केवल शैक्षणिक और महाद्वीपों के सही आकार के प्रदर्शन के लिए है। पाकिस्तान ने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा विवादित माने गए क्षेत्रों की कानूनी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
