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कैसे बढ़ती चली गई बृजभूषण शरण सिंह की मुसीबतें? पहले गई WFI चीफ की कुर्सी, अब कटा टिकट; एक क्लिक में जानें पूरी टाइमलाइन

Brij Bhushan Sharan Singh Case Timeline भाजपा सांसद बृजभूषण का टिकट काट दिया गया है, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे को टिकट देकर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। बीते लंबे समय से भाजपा सांसद बृजभूषण विवादों से घिरे हुए हैं। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि क्या है पूरा माजरा और और यौन उत्पीड़न के मामले में कब क्या हुआ।

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जानें इस पूरे केस में कब-क्या हुआ।

Photo : Times Now Digital

सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी... भाजपा ने उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट पर ऐसा दांव खेला, जिस पर ये कहावत बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है। भले ही बृजभूषण शरण सिंह का पत्ता कट गया हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें नाराज नहीं किया। आसान भाषा में समझा जाए तो कैसरगंज सीट से भाजपा सांसद बृजभूषण का टिकट काट दिया गया है, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे को टिकट देकर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। बीते लंबे समय से भाजपा सांसद बृजभूषण विवादों से घिरे हुए हैं, अदालत में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला चल रहा है। आखिर इस मामले में कब-क्या हुआ, आपको पूरी टाइमलाइन से रूबरू करवाते हैं।

कैसे शुरू हुआ था बृजभूषण से जुड़ा विवाद?

पिछले साल 2023 के जनवरी माह में तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसके बाद ये मामला सुर्खियों में आया। साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया जैसे नामचीन पहलवानों ने उनके खिलाफ आवाद बुलंद की थी। पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के बाद बृजभूषण ने इस्तीफा दिया और फिर उनके दोबारा चुनाव हुए तो उनके करीबी संजय सिंह WFI अध्यक्ष चुने गए। बाद में खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई पैनल को निलंबन कर दिया। नीचे पढ़ें सारा विवाद।

कब-क्‍या हुआ, जानिए पूरा टाइमलाइन

तारीखघटनाक्रम
18 जनवरी, 2023जंतर मंतर पर पहलवानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ
18 जनवरीबृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण और धमकी का आरोप लगा
18 जनवरीपहलवानों ने उनके इस्तीफे और WFI को भंग करने की मांग की
19 जनवरीबबीता फोगाट ने पहलवानों से मुलाकात की और सरकार से बात करने का भरोसा दिया
20 जनवरीभारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) अध्यक्ष पीटी ऊषा को पहलवानों ने शिकायत पत्र लिखा
20 जनवरीडब्ल्यूएफआई को पहलवानों की सलाह से चलाने के लिए नई समिति की नियुक्ति की मांग की
20 जनवरीआरोपों की जांच के लिए जांच समिति के गठन करने की मांग की गई
20 जनवरीIOA ने जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें मैरीकॉम और योगेश्वर दत्त थे
21 जनवरीपहलवानों ने खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त किया
21 जनवरीखेल मंत्री ने कहा कि आरोपों की जांच के लिए एक निगरानी समिति बनायी जायेगी
21 जनवरीअनुराग ठाकुर ने कहा कि जांच पूरी होने तक बृजभूषण पद से हट जाएंगे
21 जनवरीडब्ल्यूएफआई ने महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से किया इनकार
21 जनवरीखेल मंत्रालय ने WFI से सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने को कहा
21 जनवरीडब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर निलंबित किए गए
23 जनवरीमैरीकॉम की अगुआई में पांच सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया गया
23 जनवरीनिगरानी समिति को जांच पूरी करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया गया
24 जनवरीपहलवानों ने निराशा व्यक्त की कि सरकार ने समिति के सदस्यों के लिए उनसे सलाह नहीं ली
23 फरवरीनिगरानी समिति का कार्यकाल दो हफ्ते बढ़ाया गया
16 अप्रैलसमिति की रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौंपे जाने के बाद WFI ने सात मई को चुनाव की घोषणा की
23 अप्रैलपहलवानों ने जंतर-मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू किया
23 अप्रैलएक नाबालिग समेत सात महिला पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई
23 अप्रैलपहलवानों ने दावा किया कि पुलिस ने अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है
24 अप्रैलखेल मंत्रालय ने सात मई के चुनाव रोक दिए
25 अप्रैलबृजभूषण के खिलाफ पहलवानों ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
25 अप्रैलसुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया
27 अप्रैलआईओए की ओर से तीन सदस्यीय पैनल का गठन
27 अप्रैलपीटी ऊषा ने कहा कि सड़कों पर उतरने के बजाय आईओए से संपर्क करना चाहिए था
3 मईदिल्ली पुलिस और पहलवानों के बीच झड़प हुई, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों के सिर में चोटें आईं
3 मईप्रदर्शनकारियों ने नशे में धुत्त अधिकारियों पर मारपीट और महिला पहलवानों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया
5 मईबृजभूषण के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने वाली पहलवानों के बयान दर्ज किए
10 मईपहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह को नार्को टेस्ट कराने की चुनौती दी
11 मईपुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह का बयान दर्ज किया
28 मईविनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया सहित प्रदर्शन कर रहे पहलवानों पर मामला दर्ज किया गया
28 मईवे नई संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, जब पीएम नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने जा रहे थे
30 मईअंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने पुलिस के व्यवहार और हिरासत की निंदा की
30 मईपहलवान अपना पदक बहाने हरिद्वार पहुंचे
8 जूननाबालिग पहलवान के पिता ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर यौन उत्पीड़न की झूठी पुलिस शिकायत दर्ज कराई
7 जूनअनुराग ठाकुर ने आश्वासन दिया कि बृजभूषण के खिलाफ पुलिस जांच पूरी हो जाएगी, जिसके बाद विरोध रुका
12 जूनजम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश महेश मित्तल कुमार को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया
13 जूनडब्ल्यूएफआई का चुनाव छह जुलाई, 2023 को तय हुआ
15 जूनदिल्ली पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया
25 जूनअसम कुश्ती संघ की याचिका पर गोवाहाटी हाई कोर्ट ने 11 जुलाई को होने वाले WFI चुनावों पर रोक लगाई
18 जुलाईदिल्ली की अदालत ने बृजभूषण सिंह को अंतरिम जमानत दी
18 जुलाईबजरंग और विनेश को एशियाई खेलों में सीधे प्रवेश मिला
19 जुलाईबजरंग और विनेश को ट्रायल में अनुचित छूट के विरोध में युवा पहलवानों ने हिसार की सड़कों पर प्रदर्शन किया
19 जुलाईडब्ल्यूएफआई चुनाव सात अगस्त को तय हुए
20 जुलाईकई जूनियर पहलवान आईओए मुख्यालय पहुंच विनेश,बजरंग को दी गई छूट वापस लेने की मांग की
20 जुलाईडब्ल्यूएफआई चुनाव 12 अगस्त को पुनर्निर्धारित
11 अगस्तपंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 12 अगस्त को होने वाले डब्ल्यूएफआई चुनावों पर रोक लगा दी
23 अगस्तसमय पर चुनाव नहीं कराने के लिए डब्ल्यूएफआई को निलंबित कर दिया गया
5 दिसंबरडब्ल्यूएफआई के चुनाव 21 दिसंबर को निर्धारित हुए
21 दिसंबरबृजभूषण के खास संजय सिंह को डब्ल्यूएफआई का नया प्रमुख चुना गया
21 दिसंबरउनके पैनल ने ज्‍यादातर पदों पर आसानी से जीत हासिल की
21 दिसंबरबजरंग और साक्षी ने प्रेस कांफ्रेंस की। साक्षी ने चुनाव के विरोध में कुश्ती से संन्यास ले लिया
22 दिसंबरसंजय सिंह के चुनाव के विरोध में बजरंग ने पद्मश्री पुरस्कार लौटाया
24 दिसंबरखेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया
24 दिसंबर नवनिर्वाचित संस्था ने उचित प्रकिया का पालन नहीं किया
24 दिसंबरहलवानों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिए बिना आयोजन की ‘जल्दबाजी में घोषणा’ की
02 मई, 2024बृजभूषण शरण सिंह का टिकट कटा और उसके बेटे को भाजपा ने कैसरगंज से प्रत्याशी बनाया

कट गया बृजभूषण शरण सिंह का टिकट

उत्तर प्रदेश के कैसरगंज लोकसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगा दी है। इस बार भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह को टिकट नहीं देने का फैसला किया है। हालांकि भाजपा ने उनके बेटे करण भूषण सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। आपको इस बार इस लोकसभा सीट का समीकरण समझाते हैं और यहां के चुनावी इतिहास से रूबरू कराते हैं।

क्या कहता है कैसरगंज सीट का इतिहास?

कैसरगंज लोकसभा सीट पर अब तक कांग्रेस पार्टी को मजह तीन बार जीत नसीब हो सकी है। जबकि भाजपा ने चार बार इस सीट पर जीत का परचम फहाराया है। यहां से सबसे अधिक 5 बार समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल किया है, जबकि सबसे अधिक 4 बार सांसद भी सपा के बेनी प्रसाद वर्मा ही रहे। कैसरगंज सीट से हिंदू महासभा की शकुंतला नायर पहली सांसद चुनी गई थीं। उन्होंने इसके बाद 1967 और 71 में भारतीय जनसंघ के टिकट से जीत हासिल की थी। 1977 में जनता पार्टी के रूद्र सेन चौधरी ने जीत हासिल की। हालांकि कांग्रेस के राणा वीर सिंह ने 1980 और 84 के चुनाव में जीत का डंका बजाया। 1989 के चुनाव में भाजपा के टिकट से रूद्र सेन चौधरी फिर से सांसद चुने गए। फिर 1991 में भाजपा के लक्ष्मीनारायण मणि त्रिपाठी और फिर इस सीट पर लगातार 5 बार सपा का डंका बजा।

कैसरगंज सीट से कब कौन बना सांसद?

वर्षनामपार्टी
1952शकुंतला नायरहिंदू महासभा
1957भगवानदीन मिश्रकांग्रेस
1962बसंत कुंवरिस्वतंत्र पार्टी
1967शकुंतला नायरभारतीय जनसंघ
1971शकुंतला नायरभारतीय जनसंघ
1977रूद्र सेन चौधरीजनता पार्टी
1980राणा वीर सिंहकांग्रेस
1984राणा वीर सिंहकांग्रेस
1989रूद्र सेन चौधरीभारतीय जनता पार्टी
1991लक्ष्मीनारायण मणि त्रिपाठीभारतीय जनता पार्टी
1996बेनी प्रसाद वर्मासमाजवादी पार्टी
1998बेनी प्रसाद वर्मासमाजवादी पार्टी
1999बेनी प्रसाद वर्मासमाजवादी पार्टी
2004बेनी प्रसाद वर्मासमाजवादी पार्टी
2009बृजभूषण शरण सिंहसमाजवादी पार्टी
2014बृजभूषण शरण सिंहभारतीय जनता पार्टी
2019बृजभूषण शरण सिंहभारतीय जनता पार्टी

कभी भाजपा, कभी सपा अब फिर भाजपा में बृजभूषण

बृजभूषण शरण सिंह ने सपा में रहते हुए 2009 में इस सीट पर पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था। जिसके बाद 2014 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और वो इस सीट से तीसरी बार सांसद हैं। हालांकि बृजभूषण पहली बार 1991 में गोंडा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे। 1991 के बाद 1999 में वो दोबारा इस सीट से सांसद बने। 2004 में भाजपा के टिकट पर ही वो बलरामपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।

जब भाजपा से निष्कासित हो गए थे बृजभूषण

ये बात साल 2008 की है, जब लोकसभा में विश्वास मत के दौरान सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने संसद क्रॉस वोटिंग कर दी थी। इसके चलते भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। इसी के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया और मुलायम सिंह यादव की साइकिल पर सवार हो गए। सपा ने 2009 में उन्हें कैसरगंज सीट से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत हासिल की।

बृजभूषण के खिलाफ अदालत ने स्थगित की सुनवाई

दिल्ली की एक अदालत भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने को लेकर 26 अप्रैल को अपना फैसला सुना सकती है।

IPC की इन धाराओं के तहत बृजभूषण पर केस

दिल्ली पुलिस ने छह बार के सांसद सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (किसी महिला का शील भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न), 354डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत 15 जून को मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। पुलिस ने इस मामले में डब्ल्यूएफआई के निलंबित सहायक सचिव विनोद तोमर पर भी आरोप लगाए थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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