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जज्बातों की वास्तुकार: हॉलीवुड में कैसे जाह्नवी गुप्ता प्रोडक्शन डिजाइन को दे रही हैं नई पहचान

भारतीय डिजाइनर जाह्नवी गुप्ता हॉलीवुड में अपनी अनूठी सेट डिजाइनिंग का लोहा मनवा रही हैं। एएफआई (AFI) से स्नातक जाह्नवी ने किरदारों के मनोविज्ञान और विजुअल सेंस का सटीक प्रयोग कर 'नाइट फीड्स' जैसी पुरस्कार विजेता फिल्मों और अत्याधुनिक वीआर प्रोजेक्ट्स में अपनी खास पहचान बनाई है।

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भारतीय प्रतिभा का हॉलीवुड में जलवा, प्रोडक्शन डिजाइनर जाह्नवी गुप्ता की हो रही दुनिया भर में तारीफ

फिल्म देखते समय दर्शकों का ध्यान अक्सर कलाकारों के अभिनय, संवाद या सिनेमैटोग्राफी पर जाता है। लेकिन एक कलाकार के कुछ बोलने से पहले ही उसका परिवेश उसके व्यक्तित्व, मनःस्थिति और भावनाओं की कहानी कहने लगता है। युवा प्रोडक्शन डिजाइनर जाह्नवी गुप्ता इसी कला को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं। उनका मानना है कि सेट सिर्फ एक लोकेशन नहीं होता, बल्कि वह किसी किरदार के अवचेतन मन का दृश्य रूप होता है।

महज 24 वर्ष की उम्र में अमेरिकन फिल्म इंस्टीट्यूट (AFI) से स्नातक जाह्नवी गुप्ता ने हॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है। शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्म, म्यूजिक वीडियो, वर्चुअल रियलिटी (VR) और कमर्शियल्स जैसे अलग-अलग माध्यमों में उनका काम न केवल फिल्म समारोहों में सराहा गया है, बल्कि निर्माता, निर्देशक और शिक्षकों ने भी उनकी प्रतिभा की खुलकर प्रशंसा की है।

बचपन के स्केच से हॉलीवुड तक

जाह्नवी का सफर किसी पारंपरिक फिल्म प्रेमी की तरह शुरू नहीं हुआ। बचपन में उन्हें किरदारों की तस्वीरें बनाना और उनके लिए काल्पनिक दुनिया तैयार करना पसंद था। कॉलेज में विश्व सिनेमा का अध्ययन करते हुए उन्होंने महसूस किया कि उन्हें फिल्मों की कहानी से ज्यादा उन जगहों ने आकर्षित किया, जहां कहानी घटित होती है।

कॉलेज के दौरान एक असाइनमेंट में उन्हें एक खाली कमरे को फिल्मी सेट में बदलने का मौका मिला। यही वह पल था जब उन्हें एहसास हुआ कि उनका भविष्य प्रोडक्शन डिजाइन में है।

AFI में प्रवेश के लिए आवश्यक ड्राफ्टिंग कौशल उन्होंने बेहद कम समय में सीखा। लॉस एंजिल्स पहुंचने के बाद उन्होंने पारंपरिक सेट डिजाइन से लेकर LED वॉल्यूम, AI आधारित प्री-प्रोडक्शन और वर्चुअल रियलिटी जैसे आधुनिक माध्यमों तक खुद को लगातार विकसित किया।

'Night Feeds' में दिखी जाह्नवी की रचनात्मक सोच

जाह्नवी की रचनात्मक सोच का सबसे प्रभावशाली उदाहरण उनकी चर्चित फिल्म 'Night Feeds' में दिखाई देता है। यह फिल्म प्रसव के बाद मानसिक तनाव (Postpartum Anxiety) से जूझ रही एक अरब-अमेरिकी मां की कहानी है।

फिल्म की पूरी दृश्य भाषा एक शब्द पर आधारित थी—"Intrusive"। जाह्नवी ने इस भावना को दर्शाने के लिए लाल रंग का बेहद नियंत्रित इस्तेमाल किया। शुरुआत में लाल रंग बहुत कम दिखाई देता है, लेकिन जैसे-जैसे नायिका की मानसिक स्थिति बिगड़ती है, लाल रंग धीरे-धीरे पूरे फ्रेम पर हावी होने लगता है।

बिस्तर की चादर, कपड़े और सेट की छोटी-छोटी वस्तुएं दर्शकों के अवचेतन मन में बेचैनी पैदा करती हैं। दर्शकों को शायद इसका अहसास भी नहीं होता, लेकिन वे उस मनोवैज्ञानिक यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं जिसे जाह्नवी अपने डिजाइन के माध्यम से रचती हैं।

फिल्म का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा मिसाइल हमले के बाद तबाह हुए घर का सेट तैयार करना था। जाह्नवी ने वास्तविक इमारतों के ढहने की संरचना का अध्ययन किया, टेक्सचर सैंपल जुटाए, डिजिटल मॉडल बनाए और फिर ऐसा मलबा तैयार किया जिसे देखकर दर्शक तुरंत पहचान सकें कि यह वही घर है जिसे उन्होंने फिल्म की शुरुआत में देखा था।

Night Feeds का एक दृश्य

Night Feeds का एक दृश्य

सिर्फ पारंपरिक फिल्मों तक सीमित नहीं है जाह्नवी

जाह्नवी केवल पारंपरिक फिल्मों तक सीमित नहीं हैं। Apple Vision Pro के लिए बनी VR फिल्म 'Code Red' में उन्होंने बिना पारंपरिक कैमरा फ्रेम के पूरी दुनिया तैयार की। उनके अनुसार वर्चुअल रियलिटी के लिए डिजाइन करना थिएटर की तरह है, जहां दर्शक कहानी के भीतर मौजूद होता है। वहीं वर्टिकल वीडियो के लिए डिजाइन बिल्कुल अलग चुनौती है, क्योंकि वहां फ्रेम इतना सीमित होता है कि हर वस्तु का अपना स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए।

इसी तरह 'Afterlife' जैसी फिल्मों में उन्होंने लॉस एंजिल्स को शुरुआती 2000 के दशक के यमन में बदल दिया। हर प्रोजेक्ट में संस्कृति, समय और स्थान के अनुसार अलग दृश्य संसार तैयार करना उनकी विशेषता बन चुका है।

दबाव में भी बेहतरीन प्रदर्शन

जाह्नवी की सबसे बड़ी ताकत उनकी रचनात्मकता के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता भी है। एक फीचर फिल्म में तीन प्रोडक्शन डिजाइनर प्रोजेक्ट छोड़ चुके थे। शूटिंग शुरू होने में सिर्फ पांच दिन बचे थे, तभी जाह्नवी को जिम्मेदारी सौंपी गई। बेहद कम समय में उन्होंने बस स्टॉप, गैस स्टेशन, सड़क, स्ट्रीट लाइट, वाहन और कई जटिल सेट तैयार कर दिए। निर्माता ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि वह "अपनी पीढ़ी के डिज़ाइनरों से कहीं आगे काम करती हैं और उनमें असाधारण कलाकार बनने के सभी गुण मौजूद हैं।" निर्देशक फियिन गैम्बो भी उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि उन्होंने कई बार खाली कमरों को जीवंत दुनिया में बदलते देखा है।

AFI में उनके प्रोफेसर ने भी उन्हें पिछले दो दशकों के सबसे प्रतिभाशाली, जिज्ञासु और अनुशासित छात्रों में से एक बताया।

जाह्नवी गुप्ता के कार्य की एक झलक

जाह्नवी गुप्ता के कार्य की एक झलक

नई पीढ़ी की प्रोडक्शन डिजाइनर

जाह्नवी के काम को दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में सम्मान मिला है। उनकी फिल्मों का चयन और पुरस्कार AFI Fest, LA Shorts, Global Film Festival of India और कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में हो चुका है। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए Art Directors Guild ने भी उन्हें अपने प्रतिष्ठित Production Design Initiative के लिए चुना है।

लेकिन जाह्नवी की असली पहचान पुरस्कारों से नहीं, बल्कि उनकी सोच से बनती है। उनके लिए प्रोडक्शन डिजाइन केवल सुंदर सेट तैयार करना नहीं, बल्कि किरदारों की अनकही भावनाओं, उनके डर, उम्मीदों और मनोवैज्ञानिक संघर्षों को दृश्य रूप देना है।

आज जब फिल्म निर्माण लगातार नई तकनीकों और नए माध्यमों की ओर बढ़ रहा है, जाह्नवी गुप्ता उन चुनिंदा युवा भारतीय प्रतिभाओं में शामिल हैं जो यह साबित कर रही हैं कि एक बेहतरीन सेट केवल आंखों को नहीं, बल्कि दर्शकों के मन और अवचेतन को भी प्रभावित करता है। शायद यही वजह है कि उनका हर डिज़ाइन किसी दृश्य से अधिक, एक भावनात्मक अनुभव बन जाता है।

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