Bengal Election 2026: 23 अप्रैल, गुरुवार को पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान हो रहा है। लेकिन लोकतंत्र के इस उत्सव से पहले बंगाल की धरती 'चुनावी युद्धक्षेत्र' में तब्दील हो चुकी है। नारों, दावों, आरोपों और कड़वी बयानबाजी ने बंगाल के सियासी पारे को उस स्तर पर पहुंचा दिया है जहां मर्यादा और राजनीति के बीच की रेखा धुंधली पड़ गई है। यह बात तो किसी से छुपी नहीं है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला केवल विकास या बुनियादी मुद्दों पर नहीं, बल्कि 'अस्मिता' और 'पहचान' की लड़ाई बन गया है। जहां भाजपा सत्ता परिवर्तन के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं ममता बनर्जी अपनी साख बचाने के लिए 'बंगाल की बेटी' के नारे के साथ मैदान में डटी हैं, और यही 'आवेग' नेताओं की भाषा पर दिखने लगा है। आइए देखते हैं, चुनाव से पहले नेताओं की जबान में कैसे आई तल्खी।
योगी के 'विवेकानंद' विवाद पर तल्ख हुईं महुआ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब बंगाल के प्रचार में उतरे, तो विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। टीएमसी ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि योगी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्ध नारे, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" को स्वामी विवेकानंद का बता दिया। इस पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि योगी को बंगाल में ज्ञान देने के बजाय यूपी जाकर 'फैंटा' पीना चाहिए। हालांकि, सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने योगी के पक्ष में वीडियो डालकर इसे टीएमसी का 'प्रोपेगेंडा' करार दिया।
खान-पान पर हुई राजनीति
बंगाल में राजनीति रसोई तक पहुंच गई है। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सड़क किनारे झालमुड़ी खाने को ममता बनर्जी ने 'नाटक' करार दिया। ममता ने यहां तक कह दिया कि "अगर पीएम मछली खाना चाहते हैं, तो मैं खुद उनके लिए पका दूंगी।" टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता में आई तो मछली-मांस पर प्रतिबंध लगा देगी, जिसे भाजपा ने सिरे से खारिज करते हुए इसे मतदाताओं को डराने की कोशिश बताया। इसके बाद एक वीडियो भी सोशल मीडिया में घूमता नजर आया जिसमें भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर माछ-भात खाते नजर आए। इसके अलावा ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि दुकान पर पहले से माइक और कैमरे लगाए गए थे और झालमुड़ी भी उनके ही सुरक्षाकर्मियों (एसपीजी) ने तैयार की थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के समय वे कभी ‘चायवाला’ बन जाते हैं तो कभी गुफा में चले जाते हैं। ममता ने सवाल उठाया कि क्या उनकी जेब में कभी 10 रुपये भी रहते हैं, और इसे लोगों को गुमराह करने की कोशिश बताया।
'ए दीदी' बनाम 'ओ दीदी': शाह की भाषा पर उठे सवाल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान ने टीएमसी को आहत कर दिया है। शाह ने एक रैली में कहा, "ए दीदी कान खुलकर सुन लो..." इस घटना का एक 6 सेकेंड का वीडियो भी सोशल मीडिया पर टीएमसी की ओर से पोस्ट किया गया। वीडियो पोस्ट करने के साथ ही टीएमसी ने इसपर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी का कहना है कि यह 'ओ दीदी' से 'ए दीदी' तक का सफर महिलाओं के प्रति भाजपा के अपमानजनक नजरिए को दर्शाता है। वहीं शाह ने साफ किया कि बंगाल भारत का हिस्सा है और यहां बाबरी मस्जिद जैसी कोई चीज नहीं बनने दी जाएगी।
SIR के विवाद पर कल्याण बनर्जी का 'हिंसक' बयान
बीते दिनों टीएमसी के दिग्गज नेता कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी। 'विशेष सघन पुनरीक्षण' (SIR) के जरिए वोटर लिस्ट से लाखों नाम काटे जाने से नाराज कल्याण बनर्जी ने यहां तक कह दिया कि अगर ज्ञानेश कुमार उस कुर्सी पर न होते, तो वे उनकी उंगली काट देते। टीएमसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में हिंदू और बंगाली मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं।
खरगे का मोदी पर तंज: पीएम या सीएम?
कांग्रेस भी बयानबाजी में पीछे नहीं रही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी की बंगाल में सक्रियता पर तंज कसते हुए पूछा कि "क्या मोदी जी देश के प्रधानमंत्री रहना चाहते हैं या बंगाल का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं?" खड़गे ने आरोप लगाया कि पीएम मणिपुर या महंगाई पर बोलने के बजाय बंगाल की गलियों में मुख्यमंत्री स्तर के उम्मीदवार की तरह प्रचार कर रहे हैं।
गठबंधन का गणित और ओवैसी की एंट्री
चुनाव से ठीक पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी के बीच गठबंधन टूट गया। ओवैसी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे का खतरा बढ़ गया है। ममता बनर्जी ने ओवैसी को "हैदराबाद का कोयल" बताते हुए इसे भाजपा को फायदा पहुंचाने वाली साजिश करार दिया है।
बीते दिनों मालदा में प्रचार के दौरान ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी लोगों को डराते हैं कि यदि वे उनके साथ नहीं आएंगे तो उन्हें घुसपैठिया कहा जाएगा। वहीं, ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ममता यह संदेश देती हैं कि उनके पक्ष में वोट नहीं देने पर नुकसान होगा। ओवैसी ने दोनों पर तंज करते हुए कहा कि यह "भाई-बहन की जोड़ी" हमें देश से नहीं निकाल सकती, क्योंकि संविधान हमें यहां रहने का अधिकार देता है।
अभिषेक बनर्जी ने घुसपैठ पर पूछे सवाल
भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को 3000 रुपये प्रति माह और सत्ता में आने के 6 महीने के भीतर 'समान नागरिक संहिता' (UCC) लागू करने का वादा किया है। इस पर अभिषेक बनर्जी ने पलटवार करते हुए पूछा कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा था, तब अमित शाह या पीएम मोदी क्यों चुप थे? 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में जनता इन कड़वे बोलों और बड़े वादों का हिसाब करेगी। जहां टीएमसी अपनी 'लक्ष्मी भंडार' और विकास कार्यों के भरोसे है, वहीं भाजपा 'डबल इंजन' सरकार और भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल के वादे पर टिकी है। क्या बंगाल में दीदी लौटेंगी या 'भगवा' लहर इतिहास रचेगी, इसका फैसला अब मतदाताओं के हाथ में है।
