West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एक चुनावी रैली में कथित तौर पर जातिसूचक शब्द के अपमानजनक प्रयोग को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले में आयोग ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कहा कि एक चुनावी रैली के दौरान टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने खुले मंच से कथित जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल कर अनुसूचित जाति समुदाय का अपमान किया। इस पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
आयोग के अनुसार, इस तरह की टिप्पणी न केवल निंदनीय है, बल्कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(s) के तहत दंडनीय अपराध है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि आयोग अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी स्तर पर जातिगत अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आयोग ने DGP से मांगी रिपोर्ट
आयोग ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। किशोर मकवाना ने कहा कि राज्य में अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ अत्याचार और हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है।
NCSC कर रहा मामले की निगरानी
उन्होंने कहा कि आयोग पूरे मामले की निगरानी कर रहा है और राज्य सरकार से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की उचित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
बता दें कि 23 अप्रैल 2026 को कोलकाता के चौउरंगी क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी रैली में टीएमसी उम्मीदवार के समर्थन में भाषण देते हुए ममता बनर्जी ने राज्य सरकार के कार्यों का उल्लेख करते समय कथित तौर पर जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया था।
