शहर

हिरासत में लिए गए थप्पड़ कांड में FIR की मांग पर अड़े सौरव भारद्वाज, विकासपुरी पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन

Parvesh Verma Slap Row: रेखा गुप्ता सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग पर अड़े आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

Image

आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज

Photo : Times Now Digital

Parvesh Verma Slap Row: राष्ट्रीय राजधानी में थप्पड़ कांड को लेकर सियासत गर्मायी हुई है। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार में लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर पर अड़े आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

विकासपुरी स्टेशन के बाहर प्रदर्शन

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग को लेकर सौरभ भारद्वाज आम आदमी पार्टी के विधायकों और पार्षदों के साथ विकासपुरी पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान, दिल्ली पुलिस ने सौरभ भारद्वाज और विधायक जरनैल सिंह को हिरासत में ले लिया।

'पुलिस ने FIR दर्ज करने से किया मना'

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने भाजपा के थप्पड़बाज मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, ''पुलिस का कहना है कि उसने थप्पड़ मारे जाने वाला वह वीडियो नहीं देखा है, जबकि यह वीडियो कल से पूरा देश देख चुका है। मतलब साफ है, ये पुलिसवाले प्रवेश वर्मा को बचाने में लगे हैं, लेकिन हम भी तब तक डटे रहेंगे, जब तक एफआईआर नहीं हो जाती।''

उन्होंने कहा, ''देश का 'जेन जेड' इतना कमजोर नहीं है कि भाजपा का कोई भी मंत्री उसे थप्पड़ मारकर यूं ही बचकर बिना मुकदमे के निकल जाए। पुलिसकर्मी प्रवेश वर्मा की कोठी के बाहर बैरिकेड लगाकर उनकी हिफाजत कर रहे हैं, जबकि जिस साहिब सिंह को थप्पड़ मारा गया था वो कल रात एक बजे तक थाने में था और अभी भी थाने में है।''

प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज

दिल्ली पुलिस ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ एनसीआर (असंज्ञेय रिपोर्ट) दर्ज की है, जबकि आम आदमी पार्टी विधायक सिंह के खिलाफ लोक सेवकों के कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

क्या है NCR?

एनसीआर तब दर्ज की जाती है, जब प्राप्त जानकारी किसी असंज्ञेय अपराध से संबंधित होती है। ऐसे मामलों में, पुलिस को जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होती है, जबकि संज्ञेय अपराध में पुलिस कानून के तहत दी गई व्यवस्था के अनुसार जांच आगे बढ़ा सकती है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article