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जीतन राम मांझी को प्रशांत किशोर ने बताया 'पलटू', कहा- पता नहीं कब पलटकर थाम लेंगे लालटेन

Bihar Politics: प्रशांत किशोर ने मोदी सरकार में मंत्री और HAM प्रमुख जीतन राम मांझी पर तीखा तंज कसा है। पीके ने कहा कि खुद मांझी को भी नहीं पता होगा कि कब पलटकर लालटेन थाम लेंगे। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में दो ही पार्टियां हैं- एक लालू यादव की राजद और दूसरी नरेंद्र मोदी की भाजपा।

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प्रशांत किशोर ने जीतन राम मांझी पर कसा तीखा तंज।

PK Slams Jitan Ram Manjhi: बिहार में चार विधानसभा क्षेत्रों में हो रहे उप चुनाव के प्रचार में जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच, जन सुराज पार्टी के संस्थापक और पार्टी के स्टार प्रचारक प्रशांत किशोर ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी को 'पलटू' बताते हुए कहा कि यह उन्हें भी नहीं पता होगा कि कब पलटकर वह राजद के साथ आ जाएंगे।

'पता नहीं कब पलटकर लालटेन थाम लेंगे मांझी'

प्रशांत किशोर ने इमामगंज विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज प्रत्याशी जितेंद्र पासवान के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में दो ही पार्टियां हैं- एक लालू यादव की राजद और दूसरी नरेंद्र मोदी की भाजपा। उन्होंने कहा कि जदयू के नीतीश कुमार और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी भी नहीं जानते कि वे कब पलटकर लालटेन थाम लेंगे और कब कूदकर कमल पर बैठ जाएंगे।

बिहार के युवाओं को बिहार में ही रोजगार मिले

पीके ने कहा कि पहले जनता कहती थी कि हमारे पास विकल्प की कमी है। लेकिन, अब ऐसा नहीं है। अब जनता के पास जन सुराज का विकल्प है, जिसकी सोच समाज के अच्छे लोगों को राजनीति से जोड़ना और जनता का राज स्थापित करना है। उन्होंने आगे कहा कि उपचुनाव में जनता को संकल्प लेना होगा कि वह अपने बच्चों के भविष्य, उनकी शिक्षा और रोजगार के लिए वोट करेंगे, ना कि मांझी या किसी अन्य नेता के बच्चों को राजा बनाने के लिए।

प्रशांत किशोर ने लोगों को भरोसा देते हुए कहा कि अगले वर्ष 2025 के छठ के बाद आपके बच्चों, पति और आपके भाई को अपना घर-परिवार छोड़कर दूसरे राज्य में मजदूरी करने नहीं जाना पड़ेगा। जन सुराज यह सुनिश्चित करेगा कि बिहार के युवाओं को बिहार में ही 10-12 हजार रुपये का रोजगार मिले।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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