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Nalanda Assembly Election 2025: इस बार कौन साधेगा JDU का अभेद्य किला, नालंदा में एक बार फिर नीतीश की साख दांव पर

Nalanda Assembly Constituency (नालंदा विधानसभा सीट): नालंदा विधानसभा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले की सीट होने के नाते JDU का पारंपरिक गढ़ मानी जाती है, जहां विधायक श्रवण कुमार सात बार जीत चुके हैं। इस बार मुकाबला कड़ा है, विपक्ष पूरी ताकत से मैदान में है। जातीय समीकरण और नीतीश कुमार की लोकप्रियता नतीजों में अहम भूमिका निभाएंगे। आइए जानते हैं कैसा रहेगा नालंदा सीट का समीकरण।

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नालंदा सीट पर कैसा है समीकरण

Photo : Times Now Digital

Nalanda Assembly Constituency (नालंदा विधानसभा सीट): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नालंदा विधानसभा सीट एक बार फिर से राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह सीट नालंदा जिले के नूरसराय और बेन प्रखंडों से मिलकर बनी है, जिसमें सिलाव, बिहारशरीफ और राजगीर प्रखंड के कुछ हिस्से भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले की यह हाई-प्रोफाइल सीट जनता दल यूनाइटेड (JDU) का पारंपरिक गढ़ मानी जाती है, जहां मौजूदा विधायक श्रवण कुमार लगातार सात बार जीत दर्ज कर चुके हैं।

2020 में क्या था नालंदा का हाल

2020 के विधानसभा चुनाव में श्रवण कुमार ने 66,066 वोट पाकर जीत हासिल की थी, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनतांत्रिक विकास पार्टी उम्मीदवार कौशलेन्द्र कुमार को 49,989 वोट मिले थे। इस बार मुकाबला और भी कड़ा होने की उम्मीद है, क्योंकि मैदान में बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी और आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।

नीतीश के लोकप्रियता की परीक्षा

नालंदा विधानसभा को लेकर हर चुनाव में एक सवाल जरूर उठता है, क्या यह सीट JDU के कब्जे में बनी रहेगी या विपक्ष कोई उलटफेर करेगा? यह सीट सीएम नीतीश कुमार की लोकप्रियता का बैरोमीटर मानी जाती है। 1985 के बाद से कांग्रेस यहां से कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है, जबकि RJD और बीजेपी भी इस सीट को फतह करने में असफल रही हैं।

राजनीतिक इतिहास और जातीय समीकरण

नालंदा का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है। कांग्रेस नेता श्याम सुंदर सिंह ने यहां से तीन बार जीत दर्ज की थी, लेकिन 1985 के बाद जेडीयू ने इस क्षेत्र में अपना स्थायी प्रभाव कायम कर लिया। यहां की राजनीति पर जातीय समीकरणों का गहरा असर रहता है। इस क्षेत्र में कुर्मी, पासवान और यादव जाति के वोटर प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जबकि राजपूत, कोइरी और भूमिहार मतदाता भी चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

इस बार का चुनाव दिलचस्प

2025 के चुनाव में नालंदा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहने वाला है। एक ओर श्रवण कुमार अपनी आठवीं जीत दर्ज करने के लक्ष्य के साथ मैदान में हैं, वहीं विपक्ष इस गढ़ को भेदने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। नीतीश कुमार की लोकप्रियता और जातीय संतुलन इस बार भी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

नालंदा में कब होंगे चुनाव (Nalanda Election Date)

नोटिफिकेशन की तारीख10 अक्टूबर 2025
नामांकन की आखिरी तारीख17 अक्टूबर 2025
नामांकन जांच की आखिरी तारीख18 अक्टूबर 2025
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख20 अक्टूबर 2025
मतदान6 नवंबर 2025
चुनाव नतीजे14 नवंबर 2025

इतिहास और संस्कृति से जुड़ा क्षेत्र

नालंदा विधानसभा सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां स्थित प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा नालंदा म्यूजियम, ब्लैक बुद्धा, जुआफरडीह स्तूप, रुक्मिणी स्थान और चंडी-मौ गांव जैसे स्थल इस क्षेत्र को ऐतिहासिक महत्व देते हैं। नालंदा के सिलाव का खाजा तो दुनियाभर में प्रसिद्ध है और यह इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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