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Asthawan Assembly Seat 2025: अस्थावां में 20 साल से जदयू का दबदबा; क्या राजद को मिलेगी यहां से पहली जीत या फिर चलेगा नीतीश फैक्टर?

Asthawan Assembly Constituency (अस्थावां विधानसभा सीट): अस्थावां विधानसभा सीट नालंदा जिले की एक ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्रीय सीट है, जो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में फिर से सुर्खियों में है। अस्थावां में इस बार जदयू, राजद और जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। आइए जानते हैं इस बार कैसा है अस्थावां सीट का हाल।

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क्या है अस्थावां सीट का चुनावी समीकरण

Photo : Times Now Digital

Asthawan Assembly Constituency (अस्थावां विधानसभा सीट): बिहार विधानसभा चुनाव के बीच नालंदा जिले की अस्थावां विधानसभा सीट एक बार फिर सियासी चर्चा का केंद्र बन गई है। इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। जदयू ने जितेंद्र कुमार, राजद ने रवि रंजन कुमार और जन स्वराज पार्टी ने लता सिंह को मैदान में उतारा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले की इस सीट पर हर बार की तरह इस बार भी मुकाबला हाई प्रोफाइल होने जा रहा है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान

अस्थावां, नालंदा जिले का एक प्रमुख प्रखंड है, जो जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से करीब 11 किलोमीटर पूर्व स्थित है। यह इलाका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कृषि दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। इसके आसपास विश्वप्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय और जैन धर्मस्थल पावापुरी जैसे स्थान हैं, जो इसे धार्मिक और शैक्षिक दृष्टि से विशेष बनाते हैं। अस्थावां के पास बहने वाली फल्गु नदी इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। यहां का उपजाऊ भूभाग कृषि को मुख्य आजीविका बनाता है और धान, गेहूं तथा सब्जियों की खेती प्रमुखता से की जाती है।

गांवों की विशिष्टता और सामाजिक सौहार्द

अस्थावां का गिलानी गांव अपनी अनोखी सामाजिक एकता के लिए प्रसिद्ध है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग अपने नाम के आगे ‘गिलानी’ उपनाम लगाते हैं। इस गांव के आम देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। वहीं, जियर गांव धार्मिक दृष्टि से जाना जाता है। यह गांव भगवान सूर्य नारायण की पूजा और वैष्णव परंपरा के पालन के लिए प्रसिद्ध है, जिससे इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता झलकती है।

अस्थावां का राजनीतिक इतिहास

अस्थावां विधानसभा सीट की स्थापना 1951 में हुई थी और यह नालंदा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसमें अस्थावां, बिंद, सरमेरा और बरबीघा प्रखंड का एक भाग शामिल है। अब तक इस सीट पर 18 चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2001 का उपचुनाव भी शामिल है। 1985 से 2000 तक यहां निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा। उन्होंने चार बार लगातार और कुल पांच बार जीत दर्ज की। 2001 के बाद से जदयू और उसकी पूर्ववर्ती पार्टी समता पार्टी ने लगातार छह बार जीत दर्ज की है। कांग्रेस चार बार, जनता पार्टी दो बार और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी एक बार जीत चुकी है। भाजपा और राजद अब तक इस सीट पर जीत नहीं दर्ज कर पाए हैं।

अस्थावां में नीतीश फैक्टर

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस सीट पर गहरा प्रभाव माना जाता है। नालंदा जिले से होने के कारण उनकी विकास योजनाओं और स्थानीय जुड़ाव ने जदयू की पकड़ को मजबूत बनाए रखा है। हालांकि, इस बार राजद और जन स्वराज पार्टी के उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं।

अस्थावां में कब होंगे चुनाव (Ashtawan Election Date)

नोटिफिकेशन की तारीख10 अक्टूबर 2025
नामांकन की आखिरी तारीख17 अक्टूबर 2025
नामांकन जांच की आखिरी तारीख18 अक्टूबर 2025
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख20 अक्टूबर 2025
मतदान6 नवंबर 2025
चुनाव नतीजे14 नवंबर 2025

चुनावी समीकरण और संभावनाएं

अस्थावां सीट पर मुकाबला केवल राजनीतिक दलों का नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों और विकास के एजेंडे का भी है। यादव, कुर्मी और ब्राह्मण मतदाता यहां की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। नीतीश कुमार की मजबूत छवि और राजद के नए जोश के बीच इस सीट का परिणाम बिहार की सियासी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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