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Suryagarha Assembly Election 2025: वह सीट जहां से कभी नहीं जीती JDU, कहलाती थी वाम-कांग्रेस की सीट, वहां से इस बार कौन मारेगा बाजी?

Suryagarha Assembly Constituency (सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट): अपनी धार्मिक पहचान के अलावा सूर्यगढ़ा सिर्फ एक विधानसभा सीट राजनीतिक नजरिए से बेहद खास है। इस सीट से कभी जदयू ने जीत नहीं हासिल की है और साल 1990 तक तो यहां कांग्रेस और वाम दलों का दबदबा रहा है। आइए समझते हैं इस चुनाव के लिहाज से सूर्यगढ़ा सीट का हाल।

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सूर्यगढ़ा सीट का समीकरण

Photo : Times Now Digital

Suryagarha Assembly Constituency (सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट): बिहार के लखीसराय जिले में स्थित सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट मुंगेर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र तीन प्रखंडों, पिपरिया, सूर्यगढ़ा और चानन से मिलकर बना है। लखीसराय जिला मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर पश्चिम में स्थित सूर्यगढ़ा ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कांग्रेस और वाम दलों का रहा दबदबा

1990 तक सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट पर कांग्रेस और वाम दलों का मजबूत प्रभाव रहा। कांग्रेस और सीपीआई, दोनों ही दलों ने यहां चार-चार बार जीत दर्ज की। हाल के वर्षों में राजनीति का समीकरण बदला है, 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के प्रहलाद यादव ने कांग्रेस उम्मीदवार रामानंद मंडल को हराकर जीत हासिल की। प्रहलाद यादव इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं और अब तक पांच बार विधायक रह चुके हैं। जेडीयू को अब तक इस सीट पर जीत नसीब नहीं हुई है, जबकि भाजपा ने 2005 और 2010 में प्रेम रंजन पटेल की जीत के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।

सूर्यगढ़ा का जातीय समीकरण

साल 2020 में सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र में 3,29,176 रजिस्टर्ड मतदाता थे, जो 2024 में बढ़कर 3,62,004 हो गए। यहां 14.77% अनुसूचित जाति, 3.5% मुस्लिम वोटर्स और सबसे प्रभावशाली 25% से अधिक यादव समुदाय के मतदाता हैं। अहीर समुदाय का यह दबदबा इस क्षेत्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।

सूर्यगढ़ा पूरी तरह ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है, यहां कोई शहरी वोटर नहीं है। क्षेत्र में लोकतांत्रिक भागीदारी लगातार सशक्त हो रही है और इसका प्रमाण देता है यहां का वोटिंग प्रतिशत। साल 2015 में 51.96%, 2019 में 55.14% और 2020 में 56.04% तक वोटिंग हुई थी।

सूर्यगढ़ामें कब होंगे चुनाव (Suryagarha Election Date):

नोटिफिकेशन की तारीख10 अक्टूबर 2025
नामांकन की आखिरी तारीख17 अक्टूबर 2025
नामांकन जांच की आखिरी तारीख18 अक्टूबर 2025
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख20 अक्टूबर 2025
मतदान6 नवंबर 2025
चुनाव नतीजे14 नवंबर 2025

सूर्यगढ़ा का इतिहास

सूर्यगढ़ा का नाम इतिहास में इसलिए भी दर्ज है क्योंकि 1534 में यहां शेरशाह सूरी और हुमायूं के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इस युद्ध में शेरशाह सूरी ने हुमायूं को पराजित कर दिल्ली सल्तनत का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था। इतिहास में इसे ‘सूरजगढ़ा का युद्ध’ कहा जाता है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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