Rajkot School Unique Reading Initiative: आज, डिजिटल के इस दौर में स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स ने बच्चों की किताबों से दूरी बढ़ा दी है। इस चुनौती से निपटने के लिए गुजरात के राजकोट में स्थित एक निजी स्कूल ने एक अनोखा कदम उठाया है। स्कूल ने अपने विद्यार्थियों में नियमित अध्ययन और पठन-पाठन यानी Reading Culture की आदत को बढ़ावा देने के लिए 'रीडिंग रिवॉर्ड' पहल शुरू की है। जी हां, आपने सही समझा। अब बच्चों को किताब पढ़ने पर इनाम दिया जा रह है। बता दें कि इस योजना के तहत छात्रों को प्रति एक घंटे किताबें पढ़ने के बदले 5 रुपये का नकद इनाम दिया जाता है। इस प्रोत्साहन का मुख्य उद्देश्य बच्चों का ध्यान स्क्रीन टाइम से हटाकर ज्ञानवर्धक किताबों की ओर आकर्षित करना है।
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पहल से जुड़ी मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली
- स्कूल प्रशासन द्वारा छात्रों पर किसी खास विषय या किताब को पढ़ने का दबाव नहीं बनाया जा रहा। बच्चे अपनी रुचि के अनुसार कोई भी किताब चुनने और अपनी सुविधानुसार समय व स्थान पर पढ़ने के लिए स्वतंत्र हैं।
- प्रत्येक छात्र के पढ़ने के रिकॉर्ड को ट्रैक करने के लिए एक विशेष चार्ट बनाया गया है। इसमें पढ़ी गई पुस्तक का नाम, बिताए गए घंटे और पढ़े गए पेजों की संख्या दर्ज की जाती है।
- वित्तीय पुरस्कार केवल फॉर्म भरने पर नहीं मिलता। जब छात्र अपना रिकॉर्ड जमा करते हैं, तो कक्षा अध्यापक पुस्तक से संबंधित प्रश्न पूछकर यह पुष्टि करते हैं कि बच्चे ने वास्तव में इसे पढ़ा और समझा है या नहीं। सत्यापन के बाद माता-पिता और शिक्षक चार्ट पर हस्ताक्षर करते हैं।
- हर महीने के अंत में कुल पढ़े गए घंटों की गणना करके बच्चों को उनका इनाम दिया जाता है।
विद्यार्थियों और शिक्षा पर पहल का सकारात्मक प्रभाव
इस प्रयोग के शुरुआती परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं। शुरुआत में इनाम के लालच में किताबें उठाने वाले छात्रों को अब पढ़ने की प्रक्रिया खुद आनंददायक लगने लगी है। कई विद्यार्थियों का कहना है कि अब उन्हें मोबाइल फोन चलाने की तुलना में किताबें पढ़ना अधिक दिलचस्प और मनोरंजक लगता है।
स्कूल प्रशासन भी का मानना है कि पढ़ाई की यह नियमित आदत न केवल बच्चों के मानसिक विकास और शब्दकोश को मजबूत करेगी, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन (Academic Performance) में भी सुधार लाएगी। शुरुआत में दिया जा रहा यह आर्थिक प्रोत्साहन एक कैटलिस्ट की तरह है, एक बार जब बच्चों में पढ़ने का स्थायी अभ्यास बन जाएगा, तो वे बिना किसी नकद पुरस्कार के भी खुद से पढ़ना जारी रखेंगे।
