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एक महीने में 5% से ज्यादा लुढ़के Sensex-Nifty, इस साल 14% क्रैश, 24 लाख करोड़ साफ

भले ही आधिकारिक तौर पर शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति को क्रैश नहीं कहा जा रहा है। लेकिन, 1 महीने में सेंसेक्स और निफ्टी 5 फीसदी से ज्यादा लुढ़क चुके हैं। जबकि, YTD यह गिरावट 14% तक पहुंच गई है।

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बाजार में बढ़ती जा रही गिरावट

Share Market Crash : भारतीय शेयर बाजार सितंबर 2024 के बाद से लगातार जूझता हुआ दिख रहा है। मोटे तौर पर पूरे दो साल से बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स Nifty ऊपर जाने की जगह 22000 से 24000 के दायरे में है। जबकि, 2 साल में दो बार ऐसा हुआ है कि इसने 26000 का आंकड़ा छुआ है। पिछले 1 महीने में ही Nifty 5% से ज्यादा लुढ़क चुका है। ठीक यही हाल इसके राइवल इंडेक्स Sensex का है।

दोनों बेंचमार्क इंडेक्स की ग्रोथ को इस साल अब तक यानी ईयर टू डेट (YTD) के टाइमफ्रेम पर देखा जाए, तो दोनों ही इंडेक्स 14% से ज्यादा लुढ़क चुके हैं। YTD के हिसाब से Sensex जहां 14.43% यानी करीब 12,291.58 अंक लुढ़ककर 72,897.02 पर ट्रेड कर रहा है। जबकि, इसी समय में Nifty 12.71% की गिरावट के साथ 3,322.75 अंक नीचे 22,823.80 के आसपास कारोबार कर रहा है।

24 लाख करोड़ हुए साफ

निफ्टी और सेंसेक्स में इनके पीक से देंखें, तो करीब 24 लाख करोड़ के मार्केट कैप की गिरावट देखने को मिली है। Sensex जब 86,159.02 के पीक पर था, तो इसका मार्केट कैप करीब 155 लाख करोड़ (1.7 ट्रिलियन डॉलर) पहुंच गया था। वहीं, इस पीक से सेंसेक्स की आज की स्थिति देंखे, तो यह करीब 15 फीसदी से ज्यादा नीचे है। यानी सेंसेक्स में लिस्टेड देश की 30 सबसे बड़ी कंपनियों के मार्केट कैप में करीब 24 लाख करोड़ यानी करीब 260 अरब डॉलर की वैल्यू साफ हो चुकी है। वहीं, इस दौरान पूरे बाजार से करीब 60 लाख करोड़ की वैल्यू साफ हुई है। हालांकि, कई नई कंपनियों के लिस्ट होने और सेक्टर रोटेशन की वजह से ओवरऑल मार्केट कैप उतना कम नजर नहीं आता है।

किन वजहों से अटका भारत का बाजार?

दो साल से भारतीय बाजार के लिए अलग-अलग ट्रिगर ने काम किया है। मसलन, भारतीय बाजार की ग्रोथ और वैल्यूएशन में बैंकिंग, फाइनेंस और आईटी स्टॉक्स की अहम हिस्सेदारी है। लेकिन, पिछले 2 साल आईटी स्टॉक्स के लिए बुरे सपने जैसे रहे हैं। यूएस की एआई कंपनियों के एक्सपेंशन, ग्रोथ और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट के साथ भारत की आईटी कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बाजार, खासतौर पर बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी को नीचे खींचने में आईटी कंपनियों की अहम भागीदारी रही है। क्योकि, पूरा आइटी इंडेक्स (Nifty IT) इस साल अब तक (YTD) 26.90% लुढ़क चुका है। इसमें खासतौर पर TCS, Infosys, Wipro और HCL की गिरावट अहम रही है।

बैंकिंग सेक्टर के झटके

भारतीय बाजार के ग्रोथ के इंजन बैंकिंग सेक्टर के स्टाॅक्स को भी इस साल कई झटके लगे हैं। खासतौर पर HDFC और SBI दोनों ही स्टॉक्स में रेगुलेटरी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दों की वजह से बड़ी गिरावट देखने केा मिली है। इसके अलावा फाइनेंशियल स्टॉक्स पर भी रेगुलेटरी सख्ती का असर दिखा है।

जियो-पॉलिटकल रिस्क बिगाड़ रहे खेल

भारतीय बाजार की गिरावट का सबसे बड़ा फैक्टर जियो-पॉलिटिक रिस्क से जुड़ा है। यह पूरा साल अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की वजह से Crude Oil की सप्लाई से जुड़े रिस्क की वजह से बर्बाद हुआ है। फरवरी में शुरू हुआ यह युद्ध अब तक जारी है। इसकी वजह से दुनिया का सबसे अहम शिपिंग और एनर्जी रूट Hormuz Strait बंद है। यहां से क्रूड और गैस की सप्लाई बाधित है। इसकी वजह से भारत में ईंधन की लागत बढ़ रही है, जो ओवरऑल महंगाई को बढ़ाने वाली चीज है।

रुपये और डॉलर का रिश्ता

क्रूड के महंगे होने के साथ ही रुपये और डॉलर का रिश्ता भी गड़बड़ाने लगता है। RBI की तरफ से तमाम कोशिशों के बाद भी प्रति डॉलर रुपया 95 के आसपास बना हुआ है। रुपये की कमजोरी के पीछे क्रूड के साथ ही अमेरिकी टैरिफ का भी असर है। इसके अलावा भारतीय कंपनियों पर रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने की स्थिति में 100% तक टैरिफ की तलवार लटकी है। ये सभी फैक्टर कुल मिलाकर कंपनियों की ग्रोथ के पक्ष को प्रभावित करते दिख रहे हैं, जिसकी वजह से FII भी लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जो 'कोढ़ में खाज' का काम कर रहा है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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